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नमो-ललिता घाट की आरती: बीएचयू, दिल्ली और भोपाल से लीं डिग्रियां, 2 महीने ट्रेनिंग; जानें अर्चकों के बारे में

हिमांशु अस्थाना, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sun, 22 Mar 2026 10:58 AM IST
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सार

Varanasi News: काशी विश्वनाथ मंदिर के 250 शास्त्री में से नमो और ललिता घाट की आरती के लिए अर्चकों का चयन हुआ है। ये अर्चक भारत के नामचीन विश्वविद्यालयों से शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं। गंगा आरती के लिए भी इन्हें दीक्षा दी गई थी।

Aarti at Namo and Lalita Ghats Degrees Earned from BHU Delhi and Bhopal 2-Month Training Priests
ललिता घाट पर गंगा आरती करते अर्चक। - फोटो : संवाद
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विस्तार

Ganga Aarti in Varanasi: श्री काशी विश्वनाथ मंदिर की गंगा आरती करने वाले अर्चक बीएचयू और संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय सहित दिल्ली (संस्कृत विश्वविद्यालय) और भोपाल सहित देश के कई विश्वविद्यालयों से स्नातक कर चुके हैं। इनके पास शास्त्री और आचार्य की डिग्रियां हैं। सनातन परंपरा और सात्विकता ही इनकी सबसे बड़ी योग्यता है। 

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ये सभी बनारस के निवासी हैं और आधिकारिक तौर पर विश्वनाथ मंदिर में दर्शन और पूजन कराने वाले शास्त्री हैं। नमो घाट और ललिता घाट पर गंगा आरती से पहले इनकी दो महीने तक ट्रेनिंग हुई। मंदिर के 250 शास्त्रियों में से इनका चयन किया गया।
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श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के एसडीएम शंभू शरण ने बताया कि गंगा आरती के लिए अर्चक ब्रह्म मुहूर्त में जागकर तीनों प्रहर संध्या और वंदना करते हों, सात्विक और सनातनी हों। ऐसे लोगों को रखा गया है जो नियमपूर्वक कार्य करेंगे। इनकी न्यूनतम योग्यता शास्त्री (स्नातक) है। 

45 मिनट की गंगा आरती और उसके पहले पांच मिनट का पूजन करना होता है। ये अर्चक आरती के अलावा विश्वनाथ मंदिर में रुद्राभिषेक भी कराते हैं। शंभू शरण के अनुसार, केवल इन सात ही नहीं, बल्कि कई अर्चकों को गंगा आरती के लिए प्रशिक्षित किया गया है, ताकि उनके दायित्वों को समय-समय पर बदला जा सके। ये अर्चक कहीं और आरती नहीं करा सकेंगे। आवश्यकता पड़ने पर इन्हें बदला भी जा सकता है।

आग की लौ के साथ 15 बार घुमाते हैं दीपदान
आग की लौ के साथ भारी दीपदान को 15 बार घुमाने से शारीरिक अभ्यास भी होता है। सातों अर्चक घड़ी की सुई की दिशा में अलग-अलग कोणों से दीपदान घुमाकर मां गंगा की आरती करते हैं। इसके लिए उन्हें लंबी ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है। 45 मिनट की आरती में यह सबसे कठिन चरण माना जाता है।

गंगा आरती में है कष्टहरण का गुण: बीएचयू के वैदिक विज्ञान केंद्र के समन्वयक प्रो. विनय कुमार पांडेय ने बताया कि गंगा आरती एक पूर्ण वैदिक प्रक्रिया है। आरती का अर्थ कष्टों का हरण है। इसमें शामिल पूजा की पूर्णता आरती के बाद ही होती है। यह अत्यंत पवित्र कार्य है। सात्विक होना जरूरी है। आरती का स्थान गंगा के सामने ही श्रेयस्कर है। 

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