UP: बिना ओटीपी अकाउंट खाली, सिम स्वैप कर पुलिसकर्मी से 12 लाख की ठगी; वाराणसी में दो गिरफ्तार
Varanasi Crime: वाराणसी में सिम स्वैप कर बिना ओटीपी बैंक खाते से 12 लाख रुपये की ठगी करने वाले गिरोह के दो आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी फर्जी आधार और यूपीआई के जरिए रकम निकालते थे। पुलिसकर्मी भी ठगी का शिकार हुआ। गिरोह कस्टमर सर्विस पॉइंट का इस्तेमाल कर खातों से पैसे उड़ाता था।
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Varanasi News: साइबर क्राइम की टीम ने बैंक खातों से ठगी करने के आरोप में बृहस्पतिवार को पुलिस लाइन के पास से अंतर जनपदीय गिरोह के दो बदमाशों मोहम्मदाबाद गाजीपुर के सुरेंद्र कुमार और बलिया के विनय कुमार को पुलिसलाइन स गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल मोबाइल फोन, फर्जी आधार कार्ड सहित दूसरे दस्तावेज और नकदी बरामद की है। आरोपियों ने बिना ओटीपी मांगे सिम स्वैप करके पुलिसकर्मी से 12 लाख की ठगी की थी।
पुलिस ने बताया कि आरोपी बेहद शातिर तरीके से लोगों के मोबाइल नंबर और बैंक खातों को निशाना बनाते थे। एक साल में 11 लोगों को निशाना बनाकर लाखों की ठगी की गई है।
24 मई 2026 को बलिया निवासी और वाराणसी पुलिस लाइन में तैनात शिवदत्त ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित ने बताया कि उनके खाते से 12 लाख रुपये निकाल लिए गए। शिकायत के आधार पर साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी। टीम ने इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस, बैंकिंग ट्रांजेक्शन और मोबाइल डेटा के आधार पर कार्रवाई कर बुधवार को वाराणसी से दोनों आरोपियों को पकड़ा।
ऐसे करते थे साइबर ठगी : पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह सबसे पहले लोगों के बैंक खातों से जुड़े मोबाइल नंबरों को निशाना बनाता था। आरोपी मोबाइल सिम को चोरी, फर्जी कॉल और सिम अपडेट के नाम पर स्वैप करा लेते थे। सिम सक्रिय होते ही बैंक खाते से जुड़े ओटीपी और अलर्ट मोबाइल पर आने लगते थे।
इसके बाद आरोपी पेटीएम, फोनपे, जी पे और मोबी जैसे यूपीआई एप को पीड़ित के नंबर पर सक्रिय कर लेते थे। फिर फर्जी आधार कार्ड और कूटरचित पहचान पत्र तैयार कर कस्टमर सर्विस पॉइंट से नकदी निकालते थे। निकाली गई नकदी को गिरोह के सदस्य आपस में बांट लेते थे। आरोपियों के खिलाफ साइबर अपराध समेत विभिन्न धाराओं में पहले से प्राथमिकी दर्ज है।
ये होता है सिम स्वैप फ्रॉड
सिम स्वैप फ्रॉड साइबर अपराध का नया तरीका है। इसमें ठग किसी व्यक्ति का मोबाइल नंबर अपने कब्जे में लेकर उसके बैंक खाते, यूपीआई, सोशल मीडिया और ओटीपी तक पहुंच बना लेते हैं। अपराधी पहले मोबाइल नंबर, आधार-पैन डिटेल, बैंक जानकारी और ओटीपी जैसी निजी सूचनाएं जुटाते हैं।
इसके बाद मोबाइल कंपनी को सिम खोने या खराब होने की झूठी जानकारी देकर फर्जी दस्तावेज के आधार पर उसी नंबर का नया सिम जारी करा लेते हैं। नया सिम एक्टिव होते ही असली सिम बंद हो जाता है और सभी कॉल व ओटीपी ठगों के पास पहुंचने लगते हैं। इसके जरिये वे बैंक खाते से रकम उड़ा देते हैं।
साइबर ठगी से ऐसे बचें
- किसी भी अनजान व्यक्ति को ओटीपी, बैंक डिटेल या यूपीआई पिन साझा न करें।
- सिम बंद हो जाएगा या सिम अपडेट जैसे कॉल आने पर तुरंत मोबाइल कंपनी के आधिकारिक नंबर पर संपर्क करें।
- बैंक खाते से जुड़े मोबाइल नंबर में अचानक नेटवर्क बंद हो जाए तो तुरंत बैंक और टेलीकॉम कंपनी को सूचना दें।
- मोबाइल में स्क्रीन शेयरिंग या संदिग्ध एप डाउनलोड न करें।
- बैंक खाते में अनधिकृत ट्रांजेक्शन होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन या साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।