Adhikmas 2026: 59 दिन में 35 दिन व्रत और त्योहार, ज्येष्ठ मास में आठ बड़ा मंगल, पूजन-अर्चन के 10 गुना फल
Varanasi News: इस बार हिंदू नववर्ष अधिकमास का वर्ष है। अधिकमास को पुरुषोत्तम मास और मलमास भी कहते हैं। यह हर तीन साल में पड़ता है। वहीं ज्येष्ठ मास में दौरान पूजन-अर्चन और दान-पुण्य का 10 गुना फल मिलेगा।
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ज्येष्ठ मास शनिवार को शुरू हो गया। इस बार हिंदू नववर्ष अधिकमास का वर्ष है। अधिकमास ज्येष्ठ में लगा है। ऐसे में ज्येष्ठ मास 60 दिन का होगा और करीब 35 दिन व्रत एवं त्योहार रहेंगे, जबकि 30 दिन अधिकमास होगा। ज्येष्ठ मास का कृष्ण पक्ष शुद्ध ज्येष्ठ होगा। इसके बाद शुक्ल व कृष्ण पक्ष यानी अधिकमास होगा। इसमें मांगलिक कार्य नहीं होंगे।
जलयात्रा, पंचक्रोशी यात्रा और हरिनाम जप-तप, पूजन-अर्चन और दान-पुण्य का 10 गुना फल मिलेगा। अधिकमास को पुरुषोत्तम मास और मलमास भी कहते हैं। यह हर तीन साल में पड़ता है। तब वह साल हिंदू वर्ष के अनुसार 13 माह का हो जाता है।
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय ने बताया कि वैशाख पूर्णिमा के बाद शनिवार को ज्येष्ठ मास शुरू हो गया। हिंदू त्योहार चंद्रमा की स्थिति व उसकी गति पर आधारित होते हैं। शुद्ध ज्येष्ठ मास में मांगलिक कार्य होंगे, जबकि अधिकमास में नहीं होंगे।
अधिकमास शुक्ल पक्ष यानी 17 मई से शुरू होगा, जो 15 जून तक रहेगा। इसके बाद शुद्ध ज्येष्ठ मास का शुक्ल पक्ष लग जाएगा, जो 29 जून ज्येष्ठ पूर्णिमा तक रहेगा। इस मास में भगवान श्रीहरि विष्णु और श्रीहनुमानजी की पूजा-अर्चना करने से सुख-शांति और सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। ज्योतिषविदों के अनुसार 11 साल बाद 2037 में फिर ज्येष्ठ मास में अधिकमास आएगा।
चार को पहला और 23 जून को आठवां बड़ा मंगल
ज्येष्ठ मास में आठ बड़ा मंगल पड़ेंगे। पहला 5 मई, दूसरा 12 मई, तीसरा 19 मई, चौथा 26 मई को पड़ेगा। जबकि 2 जून को पांचवां, 9 जून को छठवां, 16 जून को सातवां और 23 जून को आठवां बड़ा मंगल पड़ेगा। बड़ा मंगल पर हनुमान मंदिरों में पूजन-अर्चन के लिए भीड़ होगी। शहर भर के हनुमान मंदिरों में लोग दर्शन-पूजन के लिए जाएंगे। संस्थाएं जगह-जगह भंडारा लगाएंगी।
ज्येष्ठ मास में वट सावित्री व गंगा दशहरा
ज्येष्ठ मास के दो माह में व्रत व त्योहार पड़ेंगे। प्रमुख रूप से 3 मई को देवर्षि नारद जयंती, 5 को संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत, 13 को अपरा एकादशी व्रत, 14 को प्रदोष व्रत, वट सावित्री व्रत (प्रथम संयम), 15 को सावित्री व्रत (द्वितीय संयम), 16 को स्नान-दान-श्राद्धादि की अमावस्या, शनि जयंती, वट सावित्री व्रत (तृतीय संयम), 20 को वैनायकी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत, 23 को श्रीदुर्गा अष्टमी व्रत, 26 को गंगा दशहरा, 27 को कमला एकादशी, 28 को प्रदोष व्रत, 30 को व्रत की पूर्णिमा, 31 को स्नान-दानादि की ज्येष्ठी पूर्णिमा, 3 जून को संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी, 8 को कालाष्टमी एवं श्री शीतलाष्टमी व्रत, 11 को कमला एकादशी, 12 को प्रदोष व्रत, 13 को मास शिवरात्रि व्रत, 14 को श्राद्धादि की अमावस्या, 15 को स्नान-दान-व्रतादि की अमावस्या, 18 को वैनायकी श्रीगणेश चतुर्थी, 22 को श्रीदुर्गा अष्टमी व्रत, धूमावती जयंती, 25 को निर्जला एकादशी, 27 को प्रदोष व्रत और 29 जून को ज्येष्ठी पूर्णिमा पर स्नान-दानादि होगा।
