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Varanasi News: अहमदाबाद की हेतल ने तबले पर दिखाई पखावज की जोरदारी और लयकारी

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 04 May 2026 01:29 AM IST
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Ahmedabad's Hetal showcased the power and rhythm of Pakhawaj on the tabla.
सनबीम लहरतारा में पद्मविभूषण पंडित किशन महाराज स्मृति संगीतोत्सव में कत्थक नृत्य की प्रस्तुति द
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वाराणसी। नाद ब्रह्म के उपासक महान तबला वादक पद्मविभूषण पं. किशन महाराज की पुण्य स्मृति में संगीत सभा काशी की ओर से रविवार को सनबीम स्कूल, लहरतारा में दो दिवसीय संगीत समारोह का शुभारंभ हुआ। कलाकारों ने सुर-साज के माध्यम से गुरु वंदना कर कार्यक्रम की शुरुआत की। पं. किशन महाराज के तैलचित्र पर उनके सुपुत्र पूरण महाराज, उस्ताद अकरम खां, पं. कामेश्वरनाथ मिश्रा, पं. कन्हैया लाल मिश्रा, वीरेंद्रनाथ मिश्रा, मीनाक्षी मिश्रा, माला श्रीवास्तव, पं. रविशंकर मिश्रा, पं. माताप्रसाद मिश्रा, श्रीदेव नारायण मिश्रा, अवंतिका महाराज, राजेश मिश्रा, अजय मिश्रा, पूर्णेंदु मिश्रा सहित अन्य कलाकारों ने पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
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प्रथम दिवस की संगीत संध्या नारी शक्ति को समर्पित रही। मंच पर पं. पूरण महाराज की शिष्या अहमदाबाद की हेतल मेहता ने एकल तबला वादन से सभी को प्रभावित किया। उन्होंने पखावज के मुख्य ताल ‘धमार’ को तबले पर जोरदारी और लयकारी के साथ प्रस्तुत किया, जो काफी चुनौतीपूर्ण माना जाता है। उनकी उंगलियों की सधी थिरकन ने जटिलता को सहज सौंदर्य में बदल दिया। धमार ताल में परण, उठान, बांट, तिहाई और विशेष बोलों की प्रस्तुति ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। समापन उन्होंने तीनताल की मध्य लय से किया। हारमोनियम पर मोहित साहनी ने सधी संगत की।
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इसके बाद बनारस घराने की डालिया मुखर्जी और युवा गायिका जयंतिका डे ने गायन प्रस्तुत कर समां बांध दिया। राग यमन में विलंबित एकताल की बंदिश ‘सुमिरन करो मन...’ से शुरुआत कर द्रुत बंदिश और भजन से कार्यक्रम को सरस बनाया। तबले पर पं. किशोर मिश्रा और हारमोनियम पर हर्षित उपाध्याय ने संगत की। अंतिम प्रस्तुति में बनारस के प्रसिद्ध कथक नर्तक विशाल कृष्ण और पद्मविभूषण स्व. पं. बिरजू महाराज की पौत्री रागिनी महाराज (दिल्ली) ने युगल कथक नृत्य से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने पं. बिरजू महाराज की रचना ‘शंकर गिरिजा पति...’ से शिव आराधना की शुरुआत की। इसके बाद तीनताल में पारंपरिक कथक के उठान, तोड़ा, टुकड़ा, गत, तिहाई, घुंघरू और पैर के सधे काम ने दर्शकों को सम्मोहित किया।
समापन में पं. बिरजू महाराज की रचित ठुमरी ‘तुम काहे को करत बरजोरी श्याम...’ पर भावनृत्य प्रस्तुत किया, जिसमें उनकी शैली की चपलता और भावाभिव्यक्ति की झलक स्पष्ट दिखी। तबले पर सिद्धार्थ चक्रवर्ती, सारंगी पर ओम सहाय और हारमोनियम पर मोहित साहनी ने उत्कृष्ट संगत कर प्रस्तुति को नई ऊंचाई दी। कार्यक्रम का संचालन सौरभ चक्रवर्ती ने किया।
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