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Asha Bhole: 'आशा भोसले...एक स्वर्णिम अध्याय का अंत हुआ', काशी के कलाकारों की आंखें नम; दी श्रद्धांजलि

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Mon, 13 Apr 2026 07:06 PM IST
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सार

Asha Bhosle: भारत की सांस्कृतिक राजधानी काशी के कलाकारों ने गायिका आशा भोसले को याद किया। उन्होंने अपनी-अपनी यादें साझा किया। बताया कि आशाजी का जाना गायकी के क्षेत्र में एक स्वर्णिम युग का अंत है। युवा पीढ़ी उनकी कला को आत्मसात करती रहेगी।

Asha Bhosle End of Golden Chapter Artists of Kashi Teary-Eyed Pay Tribute
काशी के कलाकारों ने आशा भोसले को दी श्रद्धांजलि। - फोटो : संवाद
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विस्तार

Varanasi News: विश्व प्रसिद्ध गायिका आशा भोसले के निधन की खबर ने देश ही नहीं, पूरी दुनिया के संगीत प्रेमियों को गहरे शोक में डुबो दिया है। अपनी बहुमुखी आवाज और अद्भुत गायन शैली से दशकों तक श्रोताओं के दिलों पर राज करने वाली आशा भोसले आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका संगीत सदैव अमर रहेगा। काशी जैसे सांस्कृतिक और संगीत नगरी में भी उनके निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया गया। यहां के संगीत, साहित्य और कला जगत से जुड़े लोगों ने अपने-अपने अंदाज में उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

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गजल गायक राजेश श्रीवास्तव ने भावुक होकर कहा कि आशा जी केवल एक गायिका नहीं, बल्कि एक पूरा युग थीं। उनकी आवाज़ में मिठास, दर्द और अद्भुत विविधता का अनोखा संगम था, जो आज के दौर में दुर्लभ है। उन्होंने गजल, भजन और फिल्मी गीतों सहित हर विधा में अपनी अमिट छाप छोड़ी। उनके गीतों ने श्रोताओं के दिलों को गहराई से छुआ और पीढ़ियों को जोड़ने का काम किया। उनके निधन से संगीत जगत को अपूरणीय क्षति हुई है और एक स्वर्णिम अध्याय का अंत हो गया है।

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डाॅ. चारु चंद्र ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि आशा भोसले ने भारतीय संगीत को वैश्विक पहचान दिलाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी आवाज़ में भारतीय संस्कृति की आत्मा बसती थी, जो हर गीत में सहज रूप से झलकती थी। उन्होंने अपने लंबे संगीत सफर में न केवल पारंपरिक शैलियों को जीवंत रखा, बल्कि नए-नए प्रयोग कर संगीत को आधुनिकता से भी जोड़ा।

उन्होंने कहा कि आशा जी केवल एक महान गायिका ही नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत थीं और आगे भी रहेंगी। उनके समर्पण, अनुशासन और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति से हर कलाकार को प्रेरणा मिलती है। उन्होंने संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और उसे विश्व पटल पर स्थापित किया। उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

कथक नृत्यांगना सरला नारायण सिंह ने कहा कि आशा भोसले के गीतों पर नृत्य करना हमेशा एक विशेष और भावनात्मक अनुभव रहा है। उनकी आवाज़ में ऐसी लय, भाव और अभिव्यक्ति की गहराई थी, जो किसी भी नर्तक के प्रदर्शन को जीवंत बना देती थी। उनके गीतों के माध्यम से भावों को मंच पर उतारना सहज और स्वाभाविक हो जाता था।

उन्होंने कहा कि आशा जी की गायकी में एक अद्भुत ऊर्जा और संवेदना थी, जो नृत्य को नई ऊंचाइयों तक ले जाती थी। आज उनके निधन से ऐसा प्रतीत होता है मानो कला जगत का एक मजबूत और महत्वपूर्ण स्तंभ गिर गया हो, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।

कथक नर्तक आशीष सिंह उर्फ नृत्य मंजरी दास ने कहा कि आशा भोसले की आवाज़ में अद्भुत ऊर्जा और जीवंतता थी, जो हर कलाकार को प्रेरित करती थी। उनके गीतों पर प्रस्तुति देना किसी भी नर्तक के लिए गर्व और सौभाग्य की बात होती थी। वे संगीत और नृत्य की दुनिया में अलग-अलग पीढ़ियों को जोड़ने वाली सशक्त कड़ी थीं। उन्होंने बताया कि मुंबई में पंडित बिरजू महाराज की कार्यशालाओं के दौरान आशाजी का आना-जाना रहता था। उन पलों में उन्हें करीब से देखने और सुनने का अवसर मिला, जो आज भी अविस्मरणीय है। उनका संगीत हमेशा जीवित रहेगा और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा।

गायिका अन्नपूर्णा मालवीय ने कहा कि आशा भोसले उनके लिए केवल एक महान गायिका ही नहीं, बल्कि आदर्श और प्रेरणा स्रोत थीं। उन्होंने कहा कि आशा जी से उन्होंने बहुत कुछ सीखा—सिर्फ गायन की बारीकियां ही नहीं, बल्कि समर्पण, अनुशासन और निरंतर अभ्यास का महत्व भी। उनकी आवाज़ में ऐसी भावनात्मक गहराई थी, जो सीधे श्रोताओं के दिलों को छू जाती थी और हर गीत को जीवंत बना देती थी। उन्होंने भावुक होकर कहा कि आशा जी का जाना उनके लिए व्यक्तिगत क्षति जैसा है। संगीत जगत में उनकी कमी कभी पूरी नहीं हो पाएगी, लेकिन उनका संगीत हमेशा प्रेरणा देता रहेगा।

युवा संगीतकार वैभव बिंदुसार ने कहा कि आशा भोसले ने अपने लंबे और बहुमुखी करियर से यह सिद्ध कर दिया कि संगीत की कोई सीमा नहीं होती। उन्होंने हर दौर में खुद को समय के अनुसार ढाला और नए-नए प्रयोग कर संगीत को नई दिशा दी। उनकी गायकी में विविधता और नवाचार का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि आज के युवा संगीतकारों के लिए आशा जी एक मार्गदर्शक की तरह हैं, जिनसे सीखकर वे अपने सफर को आगे बढ़ा सकते हैं। उनका संगीत केवल आज ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक अमूल्य धरोहर बना रहेगा।

काशी के कलाकारों की भावपूर्ण श्रद्धांजलियों से यह स्पष्ट हो जाता है कि आशा भोसले केवल एक महान गायिका नहीं, बल्कि एक जीवंत भावना थीं, जो हर दिल में बसती थीं। उनके संगीत में संवेदना, विविधता और गहराई का अद्भुत संगम था, जिसने पीढ़ियों को जोड़े रखा। उनकी साधना, समर्पण और कला के प्रति निष्ठा ने उन्हें एक अलग पहचान दी, जिसे भुलाया नहीं जा सकता। आज भले ही वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी मधुर आवाज, उनके गीत और उनकी विरासत सदैव जीवित रहेंगे। आने वाली पीढ़ियां भी उनके संगीत से प्रेरणा लेती रहेंगी।

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