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Varanasi News: डीआईजी कार्यालय की सरकारी जमीन हड़पने की कोशिश, छह लोगों के खिलाफ एफआईआर
Fri, 03 Jul 2026 11:16 AM IST
वाराणसी ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jul 2026 11:16 AM IST
सार
वाराणसी जिले में डीआईजी कार्यालय की सरकारी जमीन हड़पने की कोशिश में छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। क्षेत्रीय लेखपाल ऋषि दुबे की तहरीर पर ये कार्रवाई हुई है।
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UP police
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) कार्यालय और सरकारी आवास से संबंधित उत्तर प्रदेश राज्य संपत्ति की भूमि को कथित रूप से फर्जी और कूटरचित दस्तावेज के आधार पर निजी नाम पर दर्ज कराने के प्रयास का मामला सामने आया है। क्षेत्रीय लेखपाल ऋषि दुबे की तहरीर पर कैंट थाने में छह नामजद समेत अन्य अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
क्या है पूरा मामला
पुलिस के अनुसार, नगर निगम के असेसमेंट रजिस्टर में डीआईजी कॉलोनी में भवन संख्या एस-8/108 ए-3 (आराजी संख्या-93) पुलिस उपमहानिरीक्षक कार्यालय और सरकारी आवास के रूप में दर्ज है। आरोप है कि पहले स्वर्गीय आनंद अग्रवाल ने नगर निगम को गुमराह कर संपत्ति का नामांतरण अपने नाम करा लिया था।
आनंद अग्रवाल की मृत्यु के बाद पुत्र गुंजन अग्रवाल ने 29 सितंबर 2018 को कथित अपंजीकृत वसीयत के आधार पर खुद को उत्तराधिकारी बताते हुए न्यायालय में प्रतिस्थापन प्रार्थना पत्र दाखिल किया। राज्य सरकार की आपत्ति पर न्यायालय ने 18 नवंबर 2022 को वसीयत का साक्ष्य प्रस्तुत न होने पर इसे खारिज कर दिया था।
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लेखपाल ने जो तहरीर दी है, उसमें आरोप लगाया गया है कि बावजूद उसी कथित फर्जी वसीयत और अन्य दस्तावेज के आधार पर सरकारी संपत्ति पर अधिकार और नामांतरण का प्रयास किया गया। साथ ही सरकारी अभिलेखों में हेरफेर कर राज्य संपत्ति को निजी नाम पर दर्ज कराने की साजिश रची गई।
कैंट थाना प्रभारी राजकिशोर पांडेय ने बताया कि इस मामले में स्मृता गोयल, इला अग्रवाल, बृजेश अग्रवाल, शरद अग्रवाल, मयंक अग्रवाल और गुंजन अग्रवाल को नामजद किया गया है।
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क्या है पूरा मामला
पुलिस के अनुसार, नगर निगम के असेसमेंट रजिस्टर में डीआईजी कॉलोनी में भवन संख्या एस-8/108 ए-3 (आराजी संख्या-93) पुलिस उपमहानिरीक्षक कार्यालय और सरकारी आवास के रूप में दर्ज है। आरोप है कि पहले स्वर्गीय आनंद अग्रवाल ने नगर निगम को गुमराह कर संपत्ति का नामांतरण अपने नाम करा लिया था।
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आनंद अग्रवाल की मृत्यु के बाद पुत्र गुंजन अग्रवाल ने 29 सितंबर 2018 को कथित अपंजीकृत वसीयत के आधार पर खुद को उत्तराधिकारी बताते हुए न्यायालय में प्रतिस्थापन प्रार्थना पत्र दाखिल किया। राज्य सरकार की आपत्ति पर न्यायालय ने 18 नवंबर 2022 को वसीयत का साक्ष्य प्रस्तुत न होने पर इसे खारिज कर दिया था।
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लेखपाल ने जो तहरीर दी है, उसमें आरोप लगाया गया है कि बावजूद उसी कथित फर्जी वसीयत और अन्य दस्तावेज के आधार पर सरकारी संपत्ति पर अधिकार और नामांतरण का प्रयास किया गया। साथ ही सरकारी अभिलेखों में हेरफेर कर राज्य संपत्ति को निजी नाम पर दर्ज कराने की साजिश रची गई।
कैंट थाना प्रभारी राजकिशोर पांडेय ने बताया कि इस मामले में स्मृता गोयल, इला अग्रवाल, बृजेश अग्रवाल, शरद अग्रवाल, मयंक अग्रवाल और गुंजन अग्रवाल को नामजद किया गया है।