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अनोखी पहल: गाजीपुर-बलिया एक्सप्रेस-वे पर विकसित होगा बी कॉरिडोर, मधुमक्खी पालन को मिलेगा बढ़ावा

Thu, 23 Jul 2026 04:59 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Thu, 23 Jul 2026 04:59 PM IST
सार

42.5 किलोमीटर लंबे गाजीपुर-बलिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे पर 11.5 किमी लंबा 'बी कॉरिडोर' गुनगुनाएगा। गाड़ियों की रफ्तार के साथ कुदरत की मिठास बढ़ेगी। सड़क किनारे मधुमक्खियों का संसार बसेगा। 

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'B' corridor will be developed on the Ghazipur-Ballia Expressway
एक्सप्रेसवे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश में प्रस्तावित 42.5 किलोमीटर लंबे गाजीपुर-बलिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे पर 11.5 किलोमीटर लंबा ''बी कॉरिडोर'' विकसित किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देना और उनकी घटती आबादी के संरक्षण में मदद करना है। इसके लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और वन विभाग के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

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वाराणसी वृत्त के वन संरक्षक डॉ. रवि कुमार सिंह ने बताया कि इस कॉरिडोर को विकसित करने के लिए हाईवे के दोनों किनारों और बीच के डिवाइडर पर विशेष प्रकार के पौधे लगाए जाएंगे। ये पौधे मुख्य रूप से फूलों और मकरंद से भरपूर होंगे, जो मधुमक्खियों को आकर्षित करेंगे। यहां नीम, करंज, महुआ, पलाश, जामुन और सिरिस जैसे देशी एवं फूलदार पौधे लगाए जाएंगे, ताकि हर मौसम में मधुमक्खियों को भोजन और आवास मिल सके।
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मधुमक्खियों की भोजन तलाशने की क्षमता को देखते हुए प्रत्येक 500 मीटर से एक किलोमीटर की दूरी पर फूलदार पौधों के समूह लगाए जाएंगे, ताकि वे आकर्षित हों और अपने प्राकृतिक आवास से दूर न भटकें। एनएचएआई और वन विभाग ने इस परियोजना पर संयुक्त रूप से काम शुरू कर दिया है। वन अधिकारियों का कहना है कि अगले छह से सात महीनों में यहां हरियाली नजर आने लगेगी और बी कॉरिडोर आकार लेने लगेगा।

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शहरीकरण के कारण घट रही है मधुमक्खियों की संख्या
गाजीपुर के प्रभागीय वन अधिकारी अजीत प्रताप सिंह ने बताया कि शहरीकरण और जंगलों में कमी के कारण मधुमक्खियों की संख्या लगातार घट रही है। इसका सीधा असर कृषि उपज और परागण पर पड़ रहा है। बी कॉरिडोर के माध्यम से मधुमक्खियों का प्राकृतिक आवास दोबारा विकसित होगा। इससे आसपास के ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में फसलों के परागण में वृद्धि होगी और किसानों की पैदावार बेहतर होने की उम्मीद है।

अधिकारी बोले
11.5 किलोमीटर लंबे इस हिस्से में अगले छह से सात महीनों के भीतर सघन पौधरोपण कर इसे कार्यात्मक बनाया जाएगा। मधुमक्खियां हमारी खाद्य श्रृंखला और प्राकृतिक परागण की रीढ़ हैं। राजमार्गों के किनारे इस तरह के हरित गलियारे विकसित करने से बिना अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण के पर्यावरण को भी लाभ होगा। -डॉ. रवि कुमार सिंह, वन संरक्षक, वाराणसी

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