Exclusive: पाकिस्तान-बांग्लादेश के साथ छपे बीएचयू प्रोफेसर के दो रिसर्च पेपर जर्नल से बाहर, शोध पर उठे सवाल
Varanasi News: पाकिस्तान-बांग्लादेश के वैज्ञानिकों के साथ छपे बीएचयू प्रोफेसर के दो रिसर्च पेपर अंतरराष्ट्रीय जर्नल से बाहर किए गए। शोध में लाहौर, फैसलाबाद, खैबर पख्तूनवा, मुल्तान और पीओके के पांच संस्थान शामिल हैं।
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पाकिस्तान और बांग्लादेश के वैज्ञानिकों के साथ बीएचयू के प्रोफेसर के दो रिसर्च पेपर अंतरराष्ट्रीय जर्नल से बाहर कर दिए गए हैं। दवाओं पर हुए एक रिसर्च में तो पाक अधिकृत कश्मीर सहित पाकिस्तान के कुल पांच शोध संस्थान शामिल हैं। यूरोप में चेक गणराज्य के चार, भारत और बांग्लादेश के दो-दो संस्थान हैं। दूसरे रिसर्च में भारत सहित सऊदी अरब और मलयेशिया के भी रिसर्च इंस्टीट्यूट हैं। शोध का डेटा रिट्रैक्शन डेटाबेस पर जारी किया गया है। इनमें बाहर किए गए रिसर्च और उसके वैज्ञानिकों के नाम भी हैं।
इस तरह का संयुक्त रिसर्च करने वाले बीएचयू के शिक्षक विश्वविद्यालय के प्रशासनिक रडार पर हैं। दरअसल इन्होंने दो ही साल में 100 से ज्यादा शोध पत्र देकर बीएचयू के एकेडमिक जगत को चौंका दिया था। 2022 और 2023 में हुए रिसर्च के चलते ये पूरे विश्वविद्यालय की नजर में आ गए थे। इसी दौरान पाकिस्तान सहित अन्य देशों के साथ किए गए शोध भी सामने आ गए।
पाकिस्तान के साथ इन टॉपिक पर हुए रिसर्च
- कार्बनिक अपशिष्ट जल को निकालने के लिए फोटोकैटलिस्ट के रूप में जिंक ऑक्साइड नैनोकणों पर कॉपर डोपिंग का प्रभाव।
- नाक के माध्यम से दवा शरीर में पहुंचाने की क्षमता के लिए मोमेटासोन फ्यूरोएट से भरे मेसोपोरस नैनोकणों का डिजाइन।
पाकिस्तान के लाहौर, मुल्तान और फैसलाबाद के संस्थान
फैसलाबाद के रिपाह इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, लाहौर की राशिद लतीफ खान यूनिवर्सिटी, पाकिस्तान स्थित खैबर पख्तूनवा की हजारा यूनिवर्सिटी और पीओके स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ आजाद कश्मीर और पाकिस्तान के मुल्तान स्थित बहुआद्दीन जकारिया यूनिवर्सिटी।
चंडीगढ़ की चित्कारा यूनिवर्सिटी, चेक गणराज्य यूनिवर्सिटी ऑफ ह्राडेक क्रालव, प्राग की चार्ल्स यूनिवर्सिटी, बांग्लादेश की बीजीसी ट्रस्ट यूनिवर्सिटी और फैकल्टी ऑफ एलायड हेल्थ साइंस, सउदी अरब की किंग अब्दुल अजीज यूनिवर्सिटी, मलयेशिया की यूनिवर्सिटी केबांगसान।
मिली हैं ऐसी गड़बड़ियां, पिछले पांच साल में 75 रिसर्च पेपर बाहर
जर्नल या पब्लिशर की ओर से की गई जांच लेखक की आपत्तियां। फोटो संबंधी समस्याएं, रिजल्ट या निष्कर्षों संबंधी गड़बड़ियां पाई गईं। पिछले पांच साल में बीएचयू में हुए करीब 75 रिसर्च पेपर बाहर कर दिए गए हैं। इन पर भी एआई से चोरी और फोटो में हेर-फेर के आरोप लगे थे।
तीन साल पहले एक पाकिस्तानी नागरिक ने धान के मालवीय बीज के लिए बीएचयू के कृषि वैज्ञानिक प्रो. एसके सिंह से संपर्क किया था। प्रोफेसर ने उसे बीज देने से इन्कार कर दिया था। वहां की पाकिस्तान की ईरी से संपर्क करने को कहा गया था। बार-बार फोन और व्हाट्सएप पर मेसेज करता रहा लेकिन प्रोफेसर ने कोई जवाब नहीं दिया।
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इस साल बीएचयू के 10 रिसर्च पेपर बाहर, बिना बताए अमेरिकी वैज्ञानिक को शामिल किया
साल 2026 में बीएचयू और आईआईटी को मिलाकर कुल 10 रिसर्च पेपर को अंतरराष्ट्रीय जर्नल ने बाहर किए गए हैं। इनमें आईआईटी बीएचयू, आईएमएस बीएचयू के 3-3 और बीएचयू के चार रिसर्च पेपर शामिल हैं। इसमें एक रिसर्च पेपर में किसी अमेरिकी वैज्ञानिक को बिना उसकी सहमति से शामिल कर लिया गया था। वैज्ञानिक की शिकायत पर रिसर्च पेपर हटाया गया। वहीं एक रिसर्च पेपर एमडी करने वाले चार रेजीडेंट्स ने बिना किसी कंसल्टेंट या प्रोफेसर के ही छाप लिया था।