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Uma Shankar Singh: पिता की विरासत संभालेंगे यूकेश सिंह, मायावती के बयान से बढ़ीं अटकलें; पहले से थे सक्रिय

Fri, 07 Aug 2026 11:17 AM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, बलिया।
अमर उजाला नेटवर्क, बलिया। Published by: Pragati Chand Updated Fri, 07 Aug 2026 11:17 AM IST
सार

Ballia News: बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के निधन के बाद बेटे यूकेश सिंह पर राजनीतिक निगाहें टिकीं हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अब तय है कि उमाशंकर सिंह की राजनीतिक विरासत को उनके ही आगे बढ़ाएंगे।  

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BSP MLA Umashankar Singh son Yukesh Singh will shoulder political responsibilities in ballia
बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के के पुत्र प्रिंस उर्फ यूकेश सिंह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के निधन के बाद अब उनकी राजनीतिक विरासत उनके पुत्र प्रिंस उर्फ यूकेश सिंह संभालेंगे। इसकी चर्चा राजनीतिक हल्कों में जोर पकड़ रही है। सूत्रों के अनुसार, पिता के अस्वस्थ होने के बाद से प्रिंस सिंह क्षेत्र में सक्रिय हो गए थे। वह विधायक की निर्माण कंपनी छात्र शक्ति इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी लिमिटेड के सीईओ भी हैं।

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कुछ दिन पहले भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने फेसबुक पर पोस्ट कर लिखा था कि प्रिंस सिंह भाजपा से चुनाव लड़ेंगे। हालांकि इस पर प्रिंस सिंह की प्रतिक्रिया नहीं आई थी। वहीं, विधायक के लखनऊ के गोमती नगर स्थित आवास पर श्रद्धांजलि देने पहुंचीं बसपा सुप्रीमो मायावती ने प्रिंस का कद और बढ़ा दिया।
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मायावती ने कहा कि यदि परिवार के लोग चाहेंगे तो उन्हें राजनीति में आगे बढ़ाने का कार्य करूंगी। बहरहाल राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अब तय है कि उमाशंकर सिंह की राजनीतिक विरासत को उनके पुत्र प्रिंस सिंह यूकेश ही आगे बढ़ाएंगे।  
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उमाशंकर बसपा के सच्चे सिपाही थे: मायावती 
बसपा सुप्रीमो मायावती उमाशंकर सिंह के आवास पर शोक संवेदना व्यक्त करने के दौरान भावुक हो गई। उन्होंने कहा कि उमाशंकर बसपा के सच्चे सिपाही थे। वह मुझे सगे भाई की तरह मानते थे। तबीयत खराब होने पर मैं बीते दिनों उनसे मिलने आई थी। फिर वह खुद मेरे घर आ गए तो मैंने कहा कि आप क्यों आए, मैं खुद आ जाती। उनके निधन से बसपा को बड़ी क्षति हुई है। उनके परिजन बेहद दुखी है। मैं उनके परिजनों को पूरा ध्यान रखूंगी। 

उन्होंने आगे कहा कि उमाशंकर जब से बसपा से जुड़े, पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाई। कभी बसपा को धोखा नहीं दिया। वह एक विजनेसमैन थे। पार्टी में आए उतार चढ़ाव के दौरान कई लोग चले गएलेकिन उन्होंने साथ नहीं छोड़ा। भाई भी बहुत बने, लेकिन धोखा देकर चले गए। उमाशंकर चाहे जहां रहें, हमेशा रक्षाबंधन पर राखी बंधवाने आते थे। पार्टी के साथ अपने क्षेत्र और समाज का भी हमेशा ध्यान रखा। अब अगर उनका बेटा राजनीति में आना चाहेगा तो उसे पूरा सहयोग करेंगे। उनकी विधानसभा के लोग भी शायद यहीं चाहेंगे।

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