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Varanasi: ज्ञानवापी से जुड़े प्रकरण की तीन मई को होगी सुनवाई, 7 मामलों की सुनवाई एक साथ किए जाने की है मांग

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Mon, 24 Apr 2023 04:07 PM IST
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सार

ज्ञानवापी से जुड़े एक ही प्रकृति के सात मामलों के एक साथ सुने जाने के मसले पर सुनवाई तीन मई को होगी। सोमवार को अधिवक्ता राजेंद्र सेठ के निधन से बार एसोसिएशन द्वारा शोक प्रस्ताव के मद्देनजर सुनवाई नहीं हुई।

case related to Gyanvapi masjid will be heard on 3 May in varanasi court
वाराणसी कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

वाराणसी के बहुचर्चिच ज्ञानवापी से जुड़े एक ही प्रकृति के सात मामलों के एक साथ सुने जाने के मसले पर तीन मई को सुनवाई होगी। इस मामले में पहले 21 अप्रैल को जिला जज की कोर्ट में सुनवाई होनी थी। उस दिन अवकाश होने के कारण नहीं हुई। सोमवार को अधिवक्ता राजेंद्र सेठ के निधन से बार एसोसिएशन द्वारा शोक प्रस्ताव के मद्देनजर सुनवाई नहीं हुई। ऐसे में अब सुनवाई की तिथि तीन मई तय की गई है।

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ज्ञानवापी से जुड़े श्रृंगार गौरी वाद की महिला वादिनियों लक्ष्मी देवी, रेखा पाठक, सीता साहू व मंजू व्यास ने जिला जज की अदालत में प्रार्थना पत्र देकर सात मामलों की सुनवाई एक साथ, एक ही अदालत में करने की मांग की थी। इसी पर जिला जज की अदालत ने बीते सोमवार को आदेश पारित किया था।
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जिला जज ने आदेश में स्पष्ट किया है कि जब सभी मामले स्थानांतरित होकर जिला जज की अदालत में आ जाएंगे, तब देखा जाएगा कि सभी मामले एक साथ सुने जाने योग्य हैं या नहीं।  19 पेज के आदेश में कहा गया है कि जिन अदालतों में मामले लंबित हैं, उन्हें जिला जज की अदालत में स्थानांतरित किया जाता है। इनके स्थानांतरित होकर जिला जज की अदालत में आने के बाद इस बिंदु का निर्धारण किया जाएगा कि सभी वादों का एक साथ सुना जाना उचित है या नहीं।
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एक ही प्रकृति के हैं सातों वाद

जिन सात मामलों को स्थानांतरित कर एक साथ सुनवाई किए जाने का अनुरोध जिला जज की अदालत से शृंगार गौरी वाद की महिला वादिनी लक्ष्मी देवी, रेखा पाठक, सीता साहू व मंजू व्यास ने किया है, वो सभी एक ही प्रकृति हैं। पहला मामला अविमुक्तेश्वरानंद, दूसरा मां श्रृंगार गौरी व अन्य,तीसरा आदि विश्वेश्वर व अन्य, चौथा आदि विश्वेश्वर आदि, पांचवां मां गंगा व अन्य, छठा सत्यम त्रिपाठी व अन्य और सातवां नंदी जी महाराज की तरफ से दाखिल वाद हैं।

यह सभी वाद एक ही प्रकृति के बताए गए हैं। इनमें आराजी नंबर 9130 के स्वामित्व की मांग और ज्ञानवापी परिसर स्थित शृंगार गौरी, आदि विश्वेश्वर व अन्य देवी देवताओं के राग भोग, दर्शन पूजन आदि की मांग नाबालिग देवता मानते हुए की गई है।

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