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UP: कफ सिरप...सात शहर, सात चेहरे और 36 साझेदार ने मिलकर अरबों की काली कमाई; बंगाल में तीन एजेंटों की तलाश

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Fri, 30 Jan 2026 06:14 AM IST
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सार

Varanasi News: कफ सिरप मामले के तीन अभियुक्त राजनीति में आने की तैयारी कर रहे थे। इस अवैध कारोबार के तार अहमदाबाद से भी जुड़े हैं। सुरक्षा एजेंसिया लगातार शुभम जायसवाल की तलाश में छापेमारी कर रही हैं। उसकी गिरफ्तार नहीं हो पाई है।

Cough syrup seven cities seven key figures 36 partners amassed billions in illicit earnings agents in Bengal
शुभम जायसवाल, भोला प्रसाद और अमित सिंह टाटा। - फोटो : अमर उजाला
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UP News: कोडीन युक्त कफ सिरप का प्रकरण केवल बनारस ही नहीं बल्कि देश के सात बड़े शहरों में चल रहा है। इसमें सात प्रमुख चेहरों ने 36 साझेदारों को मिलाकर ना केवल जालसाजी के इस खेल को आगे बढ़ाया बल्कि अरबों की कमाई की। मामलों की जांच के बीच इस तरह के कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आते जा रहे है। पुलिस सूत्रों के अनुसार अब यूपी के साथ-साथ त्रिपुरा बंगाल और अहमदाबाद में एजेंटों की तलाश कर रही है।

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एसटीएफ, एसआईटी, एफएसडीए और ईडी की जांच के बीच गिरफ्तारियों के लिए अब एजेंटों की तलाश कर रही है। खासकर बंगाल में मुर्शीदाबाद, त्रिपुरा और उत्तर 24 परगना में सक्रिय कफ सिरप तस्करी के एजेंटों की जांच के लिए एसटीएफ समेत अन्य एजेंसियां लग गई है। 
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विकास सिंह नरवे की गिरफ्तारी के बाद बंगाल बाॅर्डर पर तीन से चार एजेंटों की बात सामने आई है। पूर्वांचल में अकेले शुभम जायसवाल के सहयोगियों ने 92 लाख कफ सिरप बिक्री फर्जी तरीके से कर डाली थी जो करीब 200 करोड़ रुपये की थी।

पुलिस ने की कार्रवाई

प्रकरण का मुख्य सरगना शुभम जायसवाल पुलिस की पकड़ से बाहर है जबकि इस काले कारोबार में छह प्रमुख चेहरे समेत पूर्वांचल और पश्चिम उत्तर प्रदेश को मिलाकर 101 लोग जेल जा चुके है। 67 मामलों की जांच ईडी कर रही है। जबकि 29 के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी है। 

अबतक की कार्रवाई में पूरब से लेकर पश्चिम तक 500 फर्जी फर्मों को चिह्नित कर कार्रवाई अमल में लाई गई। जांच एजेंसियों ने पाया कि गलत तरीके से कफ सिरप के कारोबार का केंद्र वाराणसी, कानपुर, शाहजहांपुर, लखनऊ, रांची, गाजियाबाद और अहमदाबाद रहा। सात शहर में मुख्य सरगना समेत 36 लोगों के पास कारोबार का हिसाब, डिलेवरी और हवाला की रकम को खपाने की जिम्मेदारी थी।

पूर्वांचल के कई साझेदार रडार पर

काली कमाई से मुख्य अभियुक्तों में तीन राजनीति में आने की तैयारी कर रहे थे और पानी की तरह पैसा बहा रहे थे। इसमें शुभम जायसवाल, अमित सिंह टाटा और बीते दिनों गिरफ्तार हुआ विकास सिंह नरवे। विकास सिंह के बारे में जो जानकारी सामने आई उसने अपने गांव और क्षेत्र को चुनावी बैनर पोस्टर से रंग दिया था। 

ब्लॉक के एक बड़े नेता का संरक्षण भी उसे प्राप्त था। जैसे ही कफ सिरप प्रकरण में इसका नाम आया और प्राथमिकी दर्ज हुई गांव और क्षेत्र से बैनर पोस्टर हटवा लिया गया। जबकि अमित सिंह टाटा ब्लॉक प्रमुखी की तैयारी कर रहा था और शुभम पक्ष और विपक्ष दोनों पार्टियों के बड़े नेताओं के संपर्क में था और राजनीति में कदम रखने के लिए शतरंज बिछा रहा था। 

इस धंधे को शुभम लीड करता था जिसमें अमित सिंह टाटा, आलोक सिंह, विकास सिंह नरवे, आकाश पाठक, अंकित श्रीवास्तव जैसे बड़े नाम के अलावा अन्य की गिरफ्तारी हुई जबकि पश्चिम में विशाल, विभोर राणा, सौरभ त्यागी, शिवानंद समेत अन्य की गिरफ्तारियां हुई। इस मामले पूर्वांचल के कई साझेदार एसटीएफ और एसआईटी की रडार पर हैं।

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