मां-बेटी की मौत: दो बेटियों ने भागकर बचाई जान, पिता बोले- अंब्रिका की तस्वीरें भी मलबे में दफन हो गईं; मातम
Jaunpur News: राजापुर सहावें गांव में बुधवार दोपहर मिट्टी की दीवार ढहने से मां-बेटी की मौत के हादसे में कोमल और नेहा ने भागकर अपनी जान बचाई। दीवार गिरने से घर का मोबाइल भी मलबे में दब गया। हादसे में अंब्रिका की तस्वीरें भी मलबे में दफन हो गईं। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जिस बेटी की किलकारियों से घर कभी गूंजता था, अब उसकी सिर्फ बचपन की एक तस्वीर परिवार के पास रह गई है। राजापुर सहावें गांव में बुधवार को मिट्टी की दीवार ढहने से ज्ञानती देवी और उनकी बेटी अंब्रिका (12) की मौत ने परिवार को झकझोर दिया। हादसे के दौरान ज्ञानती की बेटियां कोमल (19) और नेहा (13) ने भागकर अपनी जान बचाई।
मलबा हटाकर मां-बेटी को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक दोनों की मौत हो चुकी थी। हादसे में परिवार का मोबाइल फोन भी मलबे में दब गया। उसमें अंब्रिका की तस्वीरें थीं। मलबा हटाने के बाद भी मोबाइल नहीं मिला। अब परिवार के पास अंब्रिका की बचपन की एक तस्वीर ही बची है।
परिजन इस तस्वीर को देखकर उसे याद कर रहे हैं। ज्ञानती के परिवार में पति बिंदु राजभर, चार बेटियां और दो बेटे हैं। बड़ी बेटी प्रियंका (23) की शादी हो चुकी है। इसके बाद कोमल, नेहा और सबसे छोटी अंब्रिका थीं। परिवार में बेटी की शादी और बच्चों के भविष्य को लेकर जो सपने थे, वे एक झटके में मातम में बदल गए।
हादसे के बाद कोमल और नेहा की आंखों के सामने मां और बहन की मौत का दृश्य बार-बार घूम रहा है। हादसे की सूचना मिलने पर तहसीलदार न्यायिक राहुल कुमार और लेखपाल विवेक सिंह मौके पर पहुंचे। परिवार के लोगों से घटना की जानकारी ली। तहसीलदार न्यायिक ने बताया कि परिवार को आपदा राहत सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन को अवगत करा दिया गया है।
बेटी की लिए अच्छे रिश्ते की कोशिश में था परिवार
जिस घर में बेटी की शादी की तैयारियों को लेकर उम्मीदें थीं, वहां अब मातम पसरा है। ज्ञानती की दूसरी बेटी कोमल (19) की शादी के लिए परिवार एक अच्छे परिवार की तलाश कर रहा था। परिवार को उम्मीद थी कि जल्द ही घर में शादी की खुशियां होंगी, लेकिन बुधवार को हुए हादसे ने सभी सपनों को चकनाचूर कर दिया।
नौकरी कर पिता का हाथ बंटाता था शुभम
परिवार की जिम्मेदारियों में बड़ा बेटा शुभम (18) पिता का सहारा बना हुआ था। वह निजी कंपनी में नौकरी करके परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में पिता बिंदू का हाथ बंटाता था। छोटा बेटा सत्यम अभी 10 साल का है। मां की मौत के बाद बच्चों की परवरिश और परिवार को संभालने की जिम्मेदारी अब पिता और बड़े बेटे के कंधों पर आ गई है।
ननिहाल में नवासे पर रहते हैं बिंदू
बिंदू राजभर बचपन से ही अपने ननिहाल राजापुर सहावै में रहते हैं। नवासे पर रहकर वे मेहनत-मजदूरी करके परिवार का भरण पोषण करते हैं। सीमित आमदनी में परिवार का भरण-पोषण करने वाले बिंदू के सामने अब पत्नी और बेटी को खोने के बाद बच्चों की जिम्मेदारी संभालने की चुनौती है।