वॉलीबॉल: तकनीक, रफ्तार और रिफ्लेक्स का तालमेल, महज तीन सेकेंड में लेना होता है फैसला, जानें- खास बातें
Varanasi News: वाराणसी आयोजित नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप के दौरान वॉलीबॉल के पूर्व खिलाड़ियों ने अमर उजाला से खेल से जुड़ी अहम जानकारियां साझा की। इस दौरान बताया कि पलक झपकते 110 किमी रफ्तार की बॉल सामने होती है। ऐसे में महज तीन सेकेंड में फैसला लेना होता है।
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वॉलीबॉल देखने में भले ही आसान खेल लगे लेकिन इसे खेलना दिमाग, तकनीक और रिफ्लेक्स का असाधारण तालमेल मांगता है। गेंद हवा में उड़ती नहीं, बल्कि गोली की रफ्तार से खिलाड़ी की ओर आती है। ऐसे में खिलाड़ी के पास फैसला लेने के लिए महज तीन सेकेंड का समय होता है, कि वह रिसीव करे, पास दे या फिर अटैक खेले। सिगरा स्थित डॉ. संपूर्णानंद स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में चल रही 72वीं सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप में यह नजारा साफ देखने को मिल रहा है।
आशीष के अनुसार इनडोर और आउटडोर कोर्ट में गेंद की गति और व्यवहार में अंतर आ जाता है। इनडोर स्टेडियम में हवा का असर कम होने से गेंद अपेक्षाकृत स्थिर रहती है, जबकि आउटडोर में मौसम और हवा गेंद की दिशा और रफ्तार को प्रभावित करती है। खिलाड़ियों को दोनों परिस्थितियों में खुद को ढालना पड़ता है।
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तेज गति से आती गेंद को नियंत्रित करने के लिए खिलाड़ी अपनी अंगुलियों को विशेष कोण पर स्थिर रखते हैं। इससे न सिर्फ गेंद की रफ्तार को कम किया जाता है, बल्कि अंगुलियों को चोटिल होने से भी बचाया जाता है। वॉलीबॉल का वजन 260 से 280 ग्राम के बीच होता है लेकिन स्मैश के दौरान गेंद की रफ्तार और दबाव कई गुना बढ़ जाती है। वॉलीबॉल के खेल में मौसम का प्रभाव भी अहम होता है। नमी, तापमान और हवा गेंद की गति और उछाल को प्रभावित करते हैं।