सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Former volleyball players explained intricacies of game in Varanasi

वॉलीबॉल: तकनीक, रफ्तार और रिफ्लेक्स का तालमेल, महज तीन सेकेंड में लेना होता है फैसला, जानें- खास बातें

रोहित चतुर्वेदी, अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Thu, 08 Jan 2026 05:28 PM IST
विज्ञापन
सार

Varanasi News: वाराणसी आयोजित नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप के दौरान वॉलीबॉल के पूर्व खिलाड़ियों ने अमर उजाला से खेल से जुड़ी अहम जानकारियां साझा की। इस दौरान बताया कि पलक झपकते 110 किमी रफ्तार की बॉल सामने होती है। ऐसे में महज तीन सेकेंड में फैसला लेना होता है। 

Former volleyball players explained intricacies of game in Varanasi
नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप - फोटो : महमूद खान
विज्ञापन

विस्तार
Follow Us

वॉलीबॉल देखने में भले ही आसान खेल लगे लेकिन इसे खेलना दिमाग, तकनीक और रिफ्लेक्स का असाधारण तालमेल मांगता है। गेंद हवा में उड़ती नहीं, बल्कि गोली की रफ्तार से खिलाड़ी की ओर आती है। ऐसे में खिलाड़ी के पास फैसला लेने के लिए महज तीन सेकेंड का समय होता है, कि वह रिसीव करे, पास दे या फिर अटैक खेले। सिगरा स्थित डॉ. संपूर्णानंद स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में चल रही 72वीं सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप में यह नजारा साफ देखने को मिल रहा है।

Trending Videos

Former volleyball players explained intricacies of game in Varanasi
नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप - फोटो : महमूद खान
पुरुष और महिला वर्ग के खिलाड़ी जब सर्विस करते हैं, तो गेंद की गति 110 से 115 किलोमीटर प्रति घंटा तक होती है। इतनी तेज रफ्तार में गेंद महज तीन सेकेंड में विपक्षी पाले में पहुंच जाती है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

Former volleyball players explained intricacies of game in Varanasi
नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप - फोटो : महमूद खान
पूर्व वॉलीबाल खिलाड़ी और प्रतियोगिता की तकनीकी समिति के सदस्य डॉ. आशीष कुमार सिंह बताते हैं, तेज गति से आती गेंद पर खिलाड़ी को पलक झपकते निर्णय लेना होता है कि वह किस तरह का शॉट खेलेगा। एक छोटी सी चूक पूरे पॉइंट का रुख बदल सकती है। यही वजह है कि वॉलीबॉल में तकनीक के साथ-साथ मानसिक सतर्कता भी उतनी ही जरूरी होती है।

Former volleyball players explained intricacies of game in Varanasi
नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप - फोटो : महमूद खान
इनडोर और आउटडोर में बदल जाती है गेंद की चाल
आशीष के अनुसार इनडोर और आउटडोर कोर्ट में गेंद की गति और व्यवहार में अंतर आ जाता है। इनडोर स्टेडियम में हवा का असर कम होने से गेंद अपेक्षाकृत स्थिर रहती है, जबकि आउटडोर में मौसम और हवा गेंद की दिशा और रफ्तार को प्रभावित करती है। खिलाड़ियों को दोनों परिस्थितियों में खुद को ढालना पड़ता है।

इसे भी पढ़ें; बरतें सावधानी: बिना प्यास भी पीएं पानी, हार्ट अटैक का खतरा होगा कम; बीएचयू के डॉक्टरों ने दी खास सलाह

Former volleyball players explained intricacies of game in Varanasi
नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप - फोटो : महमूद खान

तेज गति से आती गेंद को नियंत्रित करने के लिए खिलाड़ी अपनी अंगुलियों को विशेष कोण पर स्थिर रखते हैं। इससे न सिर्फ गेंद की रफ्तार को कम किया जाता है, बल्कि अंगुलियों को चोटिल होने से भी बचाया जाता है। वॉलीबॉल का वजन 260 से 280 ग्राम के बीच होता है लेकिन स्मैश के दौरान गेंद की रफ्तार और दबाव कई गुना बढ़ जाती है। वॉलीबॉल के खेल में मौसम का प्रभाव भी अहम होता है। नमी, तापमान और हवा गेंद की गति और उछाल को प्रभावित करते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed