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ज्ञानवापी: वाद मित्र ने मांगी मुफ्त सुरक्षा, 2 लाख रुपये से अधिक के सुरक्षा शुल्क पर जताई आपत्ति; जानें मामला

Sun, 31 May 2026 05:49 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sun, 31 May 2026 05:49 AM IST
सार

Varanasi News: ज्ञानवापी प्रकरण में वाद मित्र एवं अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी ने प्रदेश सरकार से पूर्व की भांति निःशुल्क सशस्त्र सुरक्षा बहाल करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना सहमति सुरक्षा व्यवस्था को निजी व्यय से जोड़ दिया गया। साथ ही 2.08 लाख रुपये से अधिक के सुरक्षा शुल्क के नोटिस पर आपत्ति जताते हुए शुल्क माफ करने की मांग की है।

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Gyanvapi Amicus Curiae in Case Seeks Free Security Objects Security Fees Exceeding 2 Lakhs in varanasi
वाराणसी कोर्ट। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

Gyanvapi Case: ज्ञानवापी प्रकरण में स्वयंभू ज्योतिर्लिंग काशी विश्वनाथ (विश्वेश्वर) के वाद मित्र एवं अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी ने प्रदेश सरकार से पूर्व की भांति निःशुल्क सशस्त्र सुरक्षा बहाल करने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने गृह विभाग को पत्र भेजकर सुरक्षा शुल्क से मुक्त किए जाने की अपील की है।

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रस्तोगी ने आरोप लगाया है कि उनकी सहमति के बिना उनकी सुरक्षा व्यवस्था को निजी व्यय से जोड़ दिया गया। इसके बाद उन्हें दो लाख रुपये से अधिक की धनराशि जमा करने का नोटिस भी भेजा गया। उन्होंने इसे अनुचित बताते हुए शासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
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पत्र में विजय शंकर रस्तोगी ने कहा है कि वह वर्ष 2019 से न्यायालय द्वारा नियुक्त वाद मित्र के रूप में ज्ञानवापी मामले की पैरवी कर रहे हैं। उनके अनुसार यह देश के सबसे संवेदनशील और चर्चित मामलों में शामिल है, जिसके कारण उन्हें लगातार जान-माल का खतरा बना रहता है। इसी सुरक्षा जोखिम को देखते हुए प्रदेश सरकार ने वर्ष 2019 में उन्हें एक सशस्त्र सुरक्षाकर्मी निःशुल्क उपलब्ध कराया था।

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रस्तोगी का कहना है कि अप्रैल 2026 में स्थानीय अभिसूचना इकाई (एलआईयू) के माध्यम से उन्हें सूचना मिली कि शासनादेश के तहत उनकी सुरक्षा व्यवस्था की अवधि छह माह के लिए बढ़ा दी गई है। हालांकि इस बार सुरक्षा व्यवस्था के लिए 25 प्रतिशत निजी व्यय निर्धारित कर दिया गया है। इसके बाद उन्हें सुरक्षा मद में 2.08 लाख रुपये से अधिक की धनराशि जमा करने का नोटिस भी प्राप्त हुआ।

उन्होंने पत्र में कहा कि जब सुरक्षा व्यवस्था उनकी व्यक्तिगत मांग पर नहीं, बल्कि मामले की संवेदनशीलता और सुरक्षा एजेंसियों के आकलन के आधार पर प्रदान की गई थी, तब उसका खर्च उन पर डालना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया है कि उन्हें सुरक्षा शुल्क से पूर्णतः मुक्त किया जाए तथा पूर्व की भांति निःशुल्क सशस्त्र सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए, ताकि वह बिना किसी दबाव और भय के न्यायालय में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकें।

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