ज्ञानवापी: वर्ष 1991 के मूल वाद की रिव्यू याचिका पर सुनवाई, 17 अगस्त को अगली तारीख; पढ़ें पूरी रिपोर्ट
वाराणसी की जिला अदालत में ज्ञानवापी से जुड़े वर्ष 1991 के मूल वाद के स्थानांतरण संबंधी रिव्यू याचिका पर सुनवाई हुई। अंजुमन इंतजामिया कमेटी और वादमित्र ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। अदालत ने पक्षों की दलीलें रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 अगस्त की तारीख तय की।
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ज्ञानवापी परिसर से जुड़े वर्ष 1991 के मूल वाद के स्थानांतरण संबंधी पुनर्विचार (रिव्यू) याचिका पर बुधवार को जिला जज संजीव शुक्ला की अदालत में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान संबंधित पक्षों ने अपने-अपने तर्क न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। दोनों पक्षों की आपत्तियां रिकॉर्ड पर लेने के बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 अगस्त की तिथि निर्धारित की है।
प्रकरण के अनुसार, वर्ष 1991 में पंडित स्वर्गीय सोमनाथ व्यास, पंडित स्वर्गीय रामरंग शर्मा और पंडित स्वर्गीय हरिहर पांडेय की ओर से ज्ञानवापी परिसर को लेकर मूल वाद दायर किया गया था। यह वाद वर्तमान में अवर न्यायालय में विचाराधीन है।
मामले में पक्षकार अनुष्का तिवारी ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र दाखिल कर मांग की है कि वर्ष 1991 के इस मूल वाद को ज्ञानवापी से संबंधित अन्य लंबित वादों के साथ समेकित किया जाए और इसे मुख्य वाद घोषित किया जाए। उनका कहना है कि एक ही विषय से जुड़े विभिन्न मामलों की एक साथ सुनवाई होने से न्यायिक प्रक्रिया अधिक प्रभावी और सुगम होगी।
बताया गया कि इससे पहले मूल वाद के स्थानांतरण को लेकर दाखिल प्रार्थना पत्र अदालत खारिज कर चुकी है। उसी आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई है, जिस पर वर्तमान में सुनवाई चल रही है।
बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान प्रार्थना पत्र 27-सी पर अंजुमन इंतजामिया कमेटी तथा वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी की ओर से मौखिक आपत्तियां दर्ज कराई गईं। दोनों पक्षों ने अपने-अपने कानूनी तर्क अदालत के समक्ष रखे।
जिला जज संजीव शुक्ला ने दोनों पक्षों की दलीलों और आपत्तियों को रिकॉर्ड पर लेते हुए आवेदिका अनुष्का तिवारी के प्रार्थना पत्र के निस्तारण के लिए अगली सुनवाई 17 अगस्त तय की है। अब इस मामले में अदालत के अगले आदेश पर सभी पक्षों की नजरें टिकी हैं।