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Gyanvapi Survey: शिवलिंग जैसी आकृति का क्यों नहीं होगा वैज्ञानिक सर्वे, जानिए क्या है कारण?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: किरन रौतेला Updated Sat, 22 Jul 2023 08:22 AM IST
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सार

अदालत ने एएसआई के निदेशक को कहा है कि दोनों पक्षकारों से मिलकर चार अगस्त तक यह रिपोर्ट दाखिल करें कि मस्जिद के ढांचे को क्षति पहुंचाए बगैर वह कैसे सर्वेक्षण करेंगे। ज्ञानवापी परिसर के वजूखाने में मिले शिवलिंग जैसी आकृति का वैज्ञानिक सर्वे नहीं होगा। जानें क्यों..

Gyanvapi Survey: Why won't there be a scientific survey of a shape like Shivling? Hindu side will file caveat
फाइल फोटो - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

काशी विश्वनाथ मंदिर से सटे ज्ञानवापी परिसर का सर्वे होगा। जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने शुक्रवार को बड़ा आदेश सुनाया और ज्ञानवापी में सील वजूखाने को छोड़कर पूरे परिसर के सर्वे का आदेश भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को दिया। अदालत ने एएसआई के निदेशक को कहा है कि दोनों पक्षकारों से मिलकर चार अगस्त तक यह रिपोर्ट दाखिल करें कि मस्जिद के ढांचे को क्षति पहुंचाए बगैर वह कैसे सर्वेक्षण करेंगे। यह भी बताएं कि सर्वे करने वाली टीम में कौन-कौन रहेगा। फोटोग्राफर और वीडियोग्राफर कौन होगा। इसके साथ ही अदालत ने मुकदमे की सुनवाई की अगली तिथि चार अगस्त नियत की है।

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शिवलिंग जैसी आकृति के वैज्ञानिक सर्वे पर है सुप्रीम रोक

ज्ञानवापी परिसर के वजूखाने में मिले शिवलिंग जैसी आकृति के वैज्ञानिक सर्वे का आदेश इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी दिया था। इस आदेश को अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। वजूखाना क्षेत्र अब भी कोर्ट के आदेश पर सील है। वजूखाना में ही शिवलिंग जैसी आकृति मिलने का दावा हिंदू पक्ष की ओर से किया गया है।

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Gyanvapi Survey: Why won't there be a scientific survey of a shape like Shivling? Hindu side will file caveat
ज्ञानवापी मस्जिद में कूप में मिली आकृति। इसे हिंदू पक्ष शिवलिंग और मुसलिम पक्ष फव्वारा कह रही है। - फोटो : अमर उजाला

हिंदू पक्ष दाखिल करेगा कैविएट

जिला जज की अदालत के फैसले पर हिंदू पक्ष ने खुशी जताई है। कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में कैविएट दाखिल की जाएगी। ताकि, प्रतिवादी की अपील पर आदेश देने से पहले हिंदू पक्ष को सुना जाए। हिंदू पक्ष को सुनने के बाद ही अदालत अपना आदेश सुनाए।

मुस्लिम पक्ष बोला, जिला जज को सुनवाई का अधिकार नहीं

अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी की तरफ से कहा गया कि हाईकोर्ट के 12 मई के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश से 19 मई से स्टे है। एएसआई सर्वे के आवेदन को सुनने का अधिकार जिला जज को नहीं है। दूसरी अहम बात यह है कि इस मामले में एक बार सर्वे हो चुका है। उस पर आपत्ति भी की गई है। बगैर उसके निस्तारण के सर्वे का दूसरा आदेश नहीं दिया जा सकता। हिंदू पक्ष ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने की बात कही है, लेकिन उसका कोई साक्ष्य नहीं दिया गया है। अभी आदेश की कॉपी अभी नहीं मिली है। आदेश का अध्ययन करने के बाद फैसला लिया जाएगा। जिला जज की अदालत के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी। पहले शृंगार गौरी के पूजा का अधिकार मांगा गया। अब ज्ञानवापी के सर्वे की मांग करके मामले को उलझाया जा रहा है।

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