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Holi: प्रमुख चौराहों पर रहेगी एंबुलेंस, चोट लगने पर तुरंत होगा इलाज; 35 साल में छठी बार बदला गंगा आरती का समय

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Tue, 03 Mar 2026 12:42 PM IST
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सार

Holi: रंगोत्सव यानी होली को लेकर वाराणसी में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कई स्थानों पर आज होलिका दहन के बाद रंग और हुड़दंग शुरू हो जाएगा। वहीं, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने भी जनसुरक्षा के सारे इंतजाम कर लिए हैं।

Holi Ambulances stationed at major intersections providing immediate treatment for injuries
50-शहर में सुबह रेलवे रोड पर होली पूजन करती महिलाएं । संवाद
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विस्तार

होली को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने तैयारी पूरी कर ली है। जहां सार्वजनिक अवकाश की वजह से सरकारी अस्पतालों की ओपीडी सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे की जगह केवल दोपहर 12 बजे तक चलेगी। वहीं, इमरजेंसी में मरीजों का बेहतर इलाज हो सके, इसके लिए डॉक्टरों की विशेष टीम तैनात की गई है। 

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इधर, होली के दिन किसी तरह की घटना पर लोगों को तुरंत प्राथमिक उपचार मिल सके, इसके लिए चौराहों पर 108 एंबुलेंस खड़ी रहेगी। प्रभारी सीएमओ डॉ. राजेश प्रसाद ने बताया कि अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों पर भी डॉक्टरों, स्वास्थ्य कर्मियों की टीम तैनात कर दी गई है। 
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एंबुलेंस सेवा के जिला प्रभारी विकास तिवारी का कहना है कि आम लोगों को किसी तरह की कोई परेशानी न हो, इसके लिए सभी एंबुलेंस चालक, इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन की काउंसिलिंग की गई है। होली वाले दिन प्रमुख चौराहों पर जहां एंबुलेंस मौजूद रहेगी, वहीं फोन आने पर निर्धारित समय के भीतर सेवा का लाभ पहुंचाया जाएगा। 

होली पर छह घंटे बंद रहेंगे बीएचयू के पांच गेट
होली के दिन बीएचयू के मुख्य द्वार के अलावा बाहर जाने वाले रास्तों पर आवागमन बंद रहेगा। यानी, पांच गेट, सीर, छित्तूपुर, नरिया, केंद्रीय विद्यालय और हैदराबाद गेट, बंद रहेंगे। बीएचयू के चीफ प्रॉक्टर डॉ. संदीप पोखरिया द्वारा जारी सूचना में बताया गया है कि बुधवार को लंका स्थित मुख्य गेट को छोड़कर परिसर के अन्य सभी गेट सुबह 8 बजे से लेकर दोपहर 2 बजे तक बंद रहेंगे। 

होली के दिन भोर में 4 से शाम 4 बजे तक बंद रहेगा नावों का संचालन
होली पर गंगा में इस बार नाव नहीं चलेंगी। चार मार्च की भोर में 4 बजे से शाम 4 बजे तक पूरी तरह से संचालन पर प्रतिबंध रहेगा। प्रशासन ने इसके लिए सोमवार को निर्देश जारी किए। होली में घाटों पर भारी भीड़ होती है। होली की हुड़दंगई में कुछ लोग नावों की सवारी करते हैं। लापरवाही के कारण कोई हादसा न हो, इसे देखते हुए प्रशासन ने सख्ती की है।

प्रशासन ने सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा है कि हर बार की तरह ही इस बार भी होली धूमधाम से मनाई जाएगी। शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए पिछली बार की तरह ही इस बार भी 4 मार्च को सुबह 4 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक सभी प्रकार के नावों का संचालन बंद रहेगा। शाम 4 बजे से माहौल शांत होने के बाद नावों का संचालन शुरू होगा। रात 8 बजे तक ही नावें चलेंगी, इसके बाद फिर से संचालन बंद रहेगा। 

एसीपी दशाश्वमेध, अतुल अंजान त्रिपाठी ने बताया कि नावों का संचालन बंद होने के साथ ही घाटों पर किसी भी प्रकार के नशीली सामग्री के बेचने और उपयोग करने पर भी प्रतिबंध रहेगा। यदि कोई ऐसा करता पाया तो उसके खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस के अनुसार गंगा में नाव संचालन के दाैरान नाविकों को पूरी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही सभी को लाइफ जैकेट पहनने के निर्देश दिए गए हैं।

शाम 7:30 बजे होगी गंगा आरती 35 साल में छठी बार बदला समय
चंद्रग्रहण मंगलवार को लगेगा। मंदिरों में दर्शन-पूजन के साथ गंगा आरती के समय में भी बदलाव हुआ है। गंगा सेवा निधि के दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती सवा घंटे विलंब से होगी। संस्था के अध्यक्ष सुशांत मिश्रा ने बताया चंद्रग्रहण की वजह से बीते 35 साल में मां गंगा की आरती में छठवीं बार बदलाव हुआ। इससे पहले चंद्रग्रहण के चलते पांच बार गंगा आरती दिन में हुई थी। यह पहली बार है जब ग्रहण से आरती अपने समय के सवा घंटे बाद होगी। 

मंगलवार को मां गंगा की दैनिक आरती शाम 6:15 की जगह शाम 7:30 बजे से शुरू होगी। ग्रहण शाम छह से 6:47 बजे तक रहेगा। इसके बाद आरती शुरू होगी। वहीं, अस्सी घाट की गंगा आरती के समय में एक घंटा बढ़ाया गया है। यहां शाम 6:30 बजे के बजाय 7:30 बजे से आरती होगी। 

सुशांत मिश्रा ने बताया कि पिछले साल चंद्रग्रहण के कारण सात सितंबर को मां गंगा की दैनिक आरती दोपहर 12 बजे हुई थी। 35 वर्षों में छठवीं बार गंगा आरती के समय में बदलाव होगा। इसके पहले 28 अक्तूबर 2023, 16 जुलाई 2019, 27 जुलाई 2018 और सात अगस्त 2017 में मां गंगा की आरती चंद्र ग्रहण के कारण दिन में हुई थी। 

चंद्र और सूर्य ग्रहण के समय गंगा आरती के समय में बदलाव के साथ ही मंदिरों के खुलने और बंद होने के समय में भी बदलाव किया जाता है। सूतक लगने के साथ ही मंदिरों में प्रवेश और कपाट बंद कर दिए जाते हैं। बाद में सूतक के बाद खोल दिए जाते हैं।

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