Holi: विश्वनाथ धाम में आज ब्रज के रसियारों-बरसाने की होली, गौने पर उड़ेंगे मथुरा के फूल-गुलाल; सुरक्षा दुरुस्त
मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान से काशी विश्वनाथ मंदिर में बृहस्पतिवार को विशेष गुलाल, गुझिया और प्रसाद भेजा गया। पूर्व महंत के आवास से प्रतिमा 5 बजे के बाद बाबा विश्वनाथ धाम में आएगी। परिसर में पूजन-अनुष्ठान की सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
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Holi: आज विश्वनाथ धाम में बाबा के गौने पर बरसाने की होली होगी। मथुरा के रसियारे काशी में शिव पर समर्पित होली खेलेंगे। आज रंग भरी एकादशी पर भक्त बाबा विश्वनाथ और गौरा पर मथुरा के अबीर-गुलाल और फूल उड़ाए जाएंगे।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान से बृहस्पतिवार को विशेष गुलाल, गुझिया और प्रसाद काशी विश्वनाथ को भेजा गया। ढोल-मजीरे के साथ भव्य गुलाल यात्रा निकाली गई। इस दौरान वहां अंग भभूत गले विषमाला, लटकन बिराजे गंग, कैसे होरी खेलू बावरिया के संग... गीतों पर कलाकारों ने प्रस्तुति देकर ब्रज में कृष्ण संग होली खेलने गए शिव को दिखाया।
शुक्रवार को यह पवित्र गुलाल बाबा विश्वनाथ को अर्पित किया जाएगा। मंदिर सीईओ विश्वभूषण मिश्रा ने बताया कि धाम में इस उत्सव के लिए भक्तों का स्वागत है। शाम को शिर्वाचनम होगा, जिस दौरान फूलों की होली खेली जाएगी। रात 10 बजे तक ये जारी रहेगा। सबसे अंत में ब्रज के रसियारों की होली होगी। यहां के भक्त ब्रज के रास और फूलों की होली के अपना समर्पण दिखाए। पूर्व महंत के आवास से प्रतिमा 5 बजे के बाद बाबा विश्वनाथ धाम में आएगी। यहां गर्भगृह में रखकर सप्तऋर्षि आरती होगी।
लट्ठमार होली पर मिली विश्वनाथ धाम की सामग्री
मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा और गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने बताया कि प्रमुख तीर्थ स्थलों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव को सशक्त करने के उद्देश्य से त्योहारों पर उपहार भेजने की परंपरा शुरू की गई थी। इस वर्ष काशी विश्वनाथ धाम से श्रीकृष्ण जन्मभूमि की रंगारंग लठामार होली कार्यक्रम के लिए सुगंधित द्रव्य, गुलाल, वस्त्र, प्रसाद आदि मिले थे। इनको भी आज रंगभरी एकादशी महोत्सव में विशिष्टता के साथ होली कार्यक्रम में अर्पित किया जाएगा।
शिव की होली से गोपियां डरीं
भगवान शिव के हृदय में आया कि वह भी होली खेलने के लिए ब्रज में पधारे। भगवान शिव के विचित्र रूप को देखकर गोपियां आश्चर्यचकित होते हुए बोलीं- अंग भभूत, गले विषमाला, लटकन बिराजै गंग, मैं कैसे होरी खेलूं या बावरिया के संग। इसके बाद भगवान कृष्ण के संकेत को पाकर भगवान शिव ने गोपी रूप धारण किया और प्रिया-प्रियतम की इस प्रिय लीला में शामिल हुए। अभी भी रंगेश्वर महादेव के रूप में मथुरा की रंगीली गली में विराजमान हैं। इसी भाव को ध्यान में रखकर बाबा विश्वनाथ को रंग भेजा गया है।
