मोक्ष के मंच पर पूरी रात नाची कामना: अबकी 40 नहीं, 10 नगरवधुओं ने किए तांडव; बाबा से मांगा जन्म सुधार का मौका
Varanasi News: महाश्मशान घाट पर जगह कम पड़ी तो नृत्यांगना और दर्शक दोनों चार गुना कम हो गए। बावजूद इसके पूरी रात बिना झपकी लिए दर्शकों ने नृत्यांजली का लुत्फ उठाया। मंदिर, धधकती लाशों और मंच पर कभी-कभी ठुमरी व दादरा तो कभी फिल्मी गानों पर ठुमके लगाए गए।
विस्तार
मोक्ष के मंच पर 10 घंटे तक कामना नाची। ये कामना अगले जन्म में आम औरत की तरह से जीवन जीने की इच्छा थी। रात 9 बजे से अगले सूर्योदय तक नाचने की इच्छा लेकर आईं नगरवधू ने बाबा मसाननाथ को मन में रखकर अपने अंदाज में लटके-झटके दिखाए। हालांकि इस बार 40 नहीं सिर्फ 10 नगरवधुओं ने तांडव-ठुमके लगाकर बाबा मसाननाथ से जन्म सुधार का मौका मांगा।
घाट पर निर्माण कार्य के चलते नगरवधुओं और दर्शकों की संख्या पिछले साल से चार गुना तक कम रही। लेकिन न तो लोगों उत्साह बैठा और न ही आंख लगी। कोई इन्हें गणिकाएं, कोई नगरवधू तो कोई योगिनियों का नाम देता रहा और पूरी रात बिना झपकी के टकटकी लगाए नृत्य भावांजलि का लुत्फ उठाता रहा।
मंदिर व्यवस्थापक गुलशन कपूर के अनुसार हर साल लगभग 40 नगरवधुएं अपने आप मणिकर्णिका घाट तक आ जाती थीं लेकिन इस बार जगह न होने से संख्या 10 तक सीमित हो गई। मगर उनके उत्साह और भक्ति में कोई कमी नहीं आई।
दुर्गा-दुर्गति नाशिनी, डिमिक-डिमिक डमरू पर हुईं प्रस्तुतियां
दुर्गा-दुर्गति नाशिनी, डिमिक-डिमिक डमरू कर बाजे, ओम नमः शिवाय, मणिकर्णिका स्रोत, खेले मसाने में होरी के साथ ही दादरा, ठुमरी और चैती गाकर बाबा के श्री चरणों में अपनी गीतांजलि अर्पित की। फिर काशी में प्रचलित मंगलम ओमकार मंगलम, बम लहरी बम बम लहरी जैसे भजन पर योगिनियां और भक्त हर कोई झूमा।
मसानकाली का पंचमकार भोग, तंत्रों से हुई पूजा
बुधवार को चैत्र नवरात्र की सप्तमी पर बाबा महाश्मशान नाथ और माता मसानकाली जी का पंचमकार का भोग लगाकर तंत्र-मंत्र विधान से आरती उतारी गई। मान्यता है कि बाबा को खुश करने के लिये शक्ति ने योगिनी रूप धरा था। ऐसे में बाबा का प्रांगण रजनीगंधा, गुलाब और अन्य सुगंधित फूलों से सजाया गया था। आरती के बाद नगर वधुओं ने गायन और नृत्य कर परंपरागत भावांजली और नित्यांजली दी और कामना की कि बाबा अगला जन्म सुधारे।
उनके साथ कई जटाधारी और तांत्रिक भी शिव धुन में मस्त दिखे। इसके बाद कुछ गणिकाओं ने जलती चिताओं के बीच में जाकर कुछ देर तक नृत्य किया और इसी के साथ मंच पर 10 गणिकाओं ने अपना नृत्य पेश किया।
अतिथियों का स्वागत मंदिर व्यवस्थापक गुलशन कपूर और उपाध्यक्ष संजय प्रसाद गुप्ता ने किया। नगर वधू नृत्य के व्यवस्थापकों में अध्यक्ष चैनू प्रसाद गुप्ता, महामंत्री बिहारी लाल गुप्ता, महंत संजय झींगरन, विजय शंकर पांडे, दिलीप यादव सहित 10 से ज्यादा लोग थे।
पहली बार मान सिंह ने भेजा न्योता, उसके बाद कभी नहीं
16वीं शताब्दी में राजा मानसिंह ने बाबा मसाननाथ के इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। पूजन के शुभ कार्य से पहले संगीत जरूरी था लेकिन श्मसान होने से उस समय संगीत प्रस्तुति के लिए कोई कलाकार आने को तैयार नहीं हुआ। यह बात काशी की नगर वधुओं को पता चली तो डर कर अपना यह संदेश राजा मानसिंह तक भिजवाया।
कहा कि यदि उन्हें मौका मिलता हैं तो काशी की सभी नगर वधूएं अपने आराध्य संगीत के जनक नटराज महाश्मसानेश्वर को अपनी भावाजंली प्रस्तुत कर सकती हैं। मानसिंह प्रसन्न हुए और सस्मान नगर वधुओं को आमंत्रित किया लेकिन अब तो बिना बुलाए यह नगर वधुएं कहीं भी रहें चैत्र नवरात्रि के सप्तमी को यह काशी के मणिकर्णिका घाट स्वयं आ जाती हैं।