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कोर्ट का फैसला: पत्नी की हत्या करके शव पर नमक डाल दफनाने वाले को उम्रकैद, 50 हजार रुपये का लगा जुर्माना

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Wed, 10 Jun 2026 12:55 PM IST
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सार

Varanasi News: पत्नी की हत्या करके शव पर नमक डालकर दफनाने वाले दोषी राजेंद्र प्रसाद को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। हत्या में 50 हजार का जुर्माना लगाया गया, जबकि साक्ष्य छिपाने के मामले में तीन साल की सजा और 20 हजार का जुर्माना लगाया गया। 

Life imprisonment for man who murdered wife and buried her body after covering it with salt in Varanasi
court - फोटो : ANI
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विस्तार

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश न्यायाधीश अतुल चौधरी की अदालत ने पांच साल पांच महीने बाद पत्नी आशा देवी की हत्या कर घर के आंगन में कब्र खोदने और भारी मात्रा में नमक डाल कर शव दफनाने के मामले में मंगलवार को भिटारी के राजेंद्र प्रसाद को दोषी करार दिया। साथ ही हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। साक्ष्य छिपाने के मामले में तीन साल की सजा सुनाई गई। 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। अदालत ने कहा कि दोषी को दी गईं दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। जेल में बिताई गई पहले की सजा भी समायोजित होगी। 



अभियोजन पक्ष के मुताबिक, लोहता थाना क्षेत्र के भिटारी गांव निवासी आशा देवी के बेटे रामविलास ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस को बताया था कि वारदात 28 दिसंबर 2020 की है। उस दिन रामविलास और उसका भाई अमर सुबह काम पर चले गए थे। दोपहर में अमर घर लौटा और अपनी मां आशा देवी के बारे में पिता राजेंद्र प्रसाद से पूछने लगा। राजेंद्र ने बताया कि वह सुनार की दुकान पर गई है। वापस आ जाएगी। शाम करीब छह बजे जब बड़ा भाई रामविलास घर पहुंचा तो उसने भी मां के बारे में पूछा। 
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दोनों भाइयों को पिता के जवाब पर संदेह हुआ। उन्होंने देखा कि राजेंद्र आंगन में फरसे से मिट्टी समतल कर रहा था। पूछने पर उसने धूप सेंकने के लिए जमीन बराबर करने की बात कही। इसी दौरान भाई कमरे में गए तो वहां खून के छींटे दिखाई दिए। 

शक गहराने पर उन्होंने आंगन की उस जगह को खोदा जहां मिट्टी समतल की जा रही थी। खोदाई में मां आशा देवी का शव मिला। हत्या के बाद आशा को दफनाया गया था। शव जल्दी गल जाए इसलिए नमक डाला गया था। अभियोजन के मुताबिक मौके पर पहुंचे राजेंद्र प्रसाद ने अपने बेटों से कहा था कि वह पत्नी से संपत्ति अपने नाम कराने की मांग कर रहा था लेकिन उसने इन्कार दिया। इस कारण उसकी जान ले ली और भाग निकला। 

पुलिस ने वारदात के तीन दिन बाद राजेंद्र प्रसाद को गिरफ्तार किया था। अदालत में 10 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद अदालत ने राजेंद्र प्रसाद को हत्या और साक्ष्य मिटाने के आरोप में दोषी करार दिया। दोषी का वारंट तैयार कर जिला कारागार भेजा गया।

बेटों से सच छिपाया, ताजी मिट्टी से खुला गया राज
आशा देवी के बेटों ने पुलिस को बताया कि पिता राजेंद्र प्रसाद ने बेहद शातिर तरीके से बात घुमाई थी। झूठ बोला था कि तुम्हारी मां सोनार की दुकान पर बंधक रखे गहने छुड़ाने के लिए गई है । लंबा समय बीत जाने के बाद भी जब आशा देवी घर नहीं लौटीं, तो अमर ने पिता से फिर पूछा, लेकिन राजेन्द्र प्रसाद लगातार इधर-उधर की बातें करके गुमराह करता रहा। शाम लगभग छह बजे रामविलास घर आ गया। जब दोनों भाइयों ने मिलकर अपने पिता पर दबाव बनाया, तो घबरा गया। घबराहट में घर के अंदर आंगन के एक कोने में चला गया और वहां फावड़े से जमीन की मिट्टी को बराबर करने लगा । ताजी मिट्टी देखकर शक गहरा गया। जब कड़ाई से पूछा, तो पिता ने बहाना बनाया कि वह केवल धूप सेंकने के लिए जमीन को समतल कर रहा है। पिता की हरकतों के कारण ही फावड़ा लेकर पहुंच गए और खोदाई की। इसके बाद खून से लथपथ मां का शव मिल सका।

रोज की झंझट खत्म कर दी, उसे मार दिया
अभियोजन के मुताबिक, जब शव मिल गया तो राजेंद्र ने गुस्से से कहा रोज की झंझट खत्म कर दी। आशा को मार दिया। राजेंद्र ने पत्नी की हत्या की और साक्ष्य मिटाने के लिए भारी मात्रा में नमक डालकर शव को दफना दिया ताकि शव जल्दी गल जाए। अपना गुनाह कबूल करने के बाद राजेंद्र घर से भाग निकला। इसके बाद पीड़ित बेटों ने आसपास के ग्रामीणों को सूचना दी और पुलिस को बुलाया।

12 गहरे और गंभीर चोट के निशान
आशा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बर्बरता का जिक्र किया गया था। बताया गया था कि मृतका के सिर और चेहरे पर धारदार हथियार (लकड़ी के टुकड़े और अन्य वस्तुओं) से वार किया गया था। 12 गहरे और गंभीर चोट के निशान पाए गए थे जो मौत के मुख्य कारण बने थे। पुलिस ने ठोस वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया था। फॉरेंसिक लैब (विधि विज्ञान प्रयोगशाला) की रिपोर्ट भी सजा की आधार बनी है।
 

वारदात के वक्त घर में केवल दोषी राजेंद्र और उसकी पत्नी आशा देवी ही मौजूद थी। कानून के स्थापित सिद्धांतों के अनुसार, यदि चारदीवारी के भीतर पत्नी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होती है, तो पति को स्पष्टीकरण देना अनिवार्य होता है। इसमें राजेंद्र प्रसाद पूरी तरह से विफल रहा। दो क्विंटल वजनी मिट्टी और साक्ष्यों के आधार पर राजेंद्र दोषी है। -अदालत

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