Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति का पुण्यकाल 16 घंटे, स्नान- दान और जप के लिए होंगे सात घंटे
Varanasi News: मकर संक्रांति तिथि 14 जनवरी को रात 9.39 बजे लगेगी। ऐसे में पुण्यकाल 16 घंटे होंगे। इस दौरान स्नान-दान और जप के लिए सात घंटे होंगे।
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मकर संक्रांति का पुण्य काल 16 घंटे का होगा लेकिन स्नान-जप और दान के लिए लोगों के पास सवा सात घंटे ही होंगे। 15 जनवरी को सुबह से दोपहर के 1.39 बजे तक का समय पुण्य प्राप्ति के लिए ज्यादा लाभकारी होगा। हालांकि, मकर संक्रांति 14 जनवरी को रात 9:39 बजे ही लगेगी लेकिन संक्रांति का पुण्यकाल सूर्योदय के बाद ही मान्य होगा।
बीएचयू में ज्योतिष विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पांडेय ने बताया कि सूर्य सिद्धांत की ग्रह गणना पद्धति के अनुसार तिथि निर्धारित की गई है। मकर राशि में सूर्य के संक्रमण काल का पुण्यकाल रात्रि में संक्रांति होने पर संक्रांति के बाद की 40 घटी तक यानी कि 16 घंटे का होता है। लेकिन, रात में संक्रांति के स्नान दान आदि कर्म नहीं किए जा सकते।
सूर्य सहित सभी ग्रहों के 12 राशियों में भ्रमण करने के कारण हर महीने में सभी ग्रहों की संक्रांति होती रहती हैं लेकिन उन सभी ग्रहों की सूर्य की संक्रांति विशेष पुण्यदायी होती है। उन सूर्य की अन्य संक्रांति में भी मकर संक्रांति का विशेष महत्व है। क्योंकि, यहां से देवताओं की दिन की तरफ प्रवृत्ति लगती है। इसलिए इसका विशेष महत्त्व शास्त्रों में वर्णित है।
नकारात्मक प्रभाव भी होंगे संतुलित
पंचमुखी यक्षविनायक मंदिर के महंत ज्योतिषाचार्य डॉ. रविकांत तिवारी ने बताया कि सूर्य 14 जनवरी की रात 9:39 बजे दक्षिण से उत्तरी गोलार्द्ध में प्रवेश कर जाएंगे और उत्तरायण आरंभ हो जाएगा। रात के बजाय अगले दिन ही पर्व मनाना शास्त्रानुसार उचित है। उस दिन बृहस्पतिवार रहेगा, फिर भी खिचड़ी का सेवन और दान पूरी तरह से शुभ है। मकर संक्रांति सूर्य और शनिदेव से जुड़ा पर्व है। इसमें सूर्य शनिदेव के घर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। खिचड़ी शनिदेव को प्रिय है और यह नवग्रहों का प्रतीक मानी जाती है, जिससे ग्रह दोष शांत होते हैं और बृहस्पतिवार के संभावित नकारात्मक प्रभाव भी संतुलित हो जाते हैं।
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