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Varanasi News: लालपुर स्टेडियम में संरक्षित होंगे पद्मश्री ओलंपियन मोहम्मद शाहिद के पदक, तैयारियां शुरू

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Thu, 26 Mar 2026 11:34 AM IST
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सार

Varanasi News: वाराणसी के लालपुर स्टेडियम में पद्मश्री ओलंपियन मोहम्मद शाहिद के पदक संरक्षित होंगे। वहीं संग्रहालय में 1980 का मॉस्को ओलंपिक का गोल्ड मेडल भी रखा जाएगा। 

Medals of Padma Shri Olympian Mohammed Shahid to be Preserved at Lalpur Stadium varanasi
हॉकी - फोटो : Adobe stock
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विस्तार

लालपुर स्टेडियम में बने हॉकी पैवेलियन के प्रथम तल पर हॉकी के उस्ताद ओलंपियन मोहम्मद शाहिद की उपलब्धियों और पदकों को संरक्षित करने के लिए संग्रहालय बनाया जा सकता है। मंडलायुक्त एस राजलिंगम के निर्देश पर इसकी तैयारियां शुरू हो गई हैं। इससे पहले मोहम्मद शाहिद की पत्नी परवीन शाहिद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मंडलायुक्त को अपने पुश्तैनी मकान की छह फीट जगह में संग्रहालय बनाने का प्रस्ताव दिया था।

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अधिकारियों का कहना है कि मुआयना करने पर वहां जगह कम मिली इसलिए संग्रहालय लालपुर में बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। परवीन शाहिद ने बताया कि वे संग्रहालय में रखने के लिए ओलंपियन की स्मृतियां खेल विभाग को सौंप सकती हैं। संग्रहालय में मोहम्मद शाहिद का 1980 के मॉस्को ओलंपिक में हॉकी में जीता गया स्वर्ण पदक भी रखा जाएगा। 1980 के बाद से भारत ने हॉकी में अब तक स्वर्ण पदक नहीं जीता है।
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अर्जुन अवॉर्ड और पद्मश्री सम्मान भी बढ़ाएंगे शोभा

मोहम्मद शाहिद को भारत सरकार ने 1980 में अर्जुन अवॉर्ड और 1986 में पद्मश्री से सम्मानित किया था। उनके ये सम्मान भी संग्रहालय की शोभा बढ़ाएंगे। उन्होंने वर्ष 1979 में पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फ्रांस में आयोजित जूनियर वर्ल्ड कप में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। वे 1982 एशियाई खेलों में रजत पदक और 1986 एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय टीम का भी हिस्सा रहे। ओलंपियन के सभी पदक और सम्मान संग्रहालय में रखे जाएंगे।
तीन ओलंपिक में भारत का किया प्रतिनिधित्व

मोहम्मद शाहिद ने 1980 में मॉस्को, 1984 में लॉस एंजिलिस और 1988 में सियोल ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। 1979 से 1989 तक उन्होंने 167 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 66 गोल किए। 1986 में लंदन में आयोजित हॉकी विश्व कप में उन्हें सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी घोषित किया गया था। वर्ष 1985 से 1986 तक वे भारतीय हॉकी टीम के कप्तान भी रहे। उनका जन्म 14 अप्रैल 1960 को वाराणसी में हुआ था। 20 जुलाई 2016 को हरियाणा के मेदांता अस्पताल में उनका निधन हुआ।

हॉकी से संन्यास लेने के बाद वे बरेका (बनारस रेल इंजन कारखाना) में वरिष्ठ क्रीड़ा अधिकारी के पद पर कार्यरत रहे। उनके निधन के बाद खेल निदेशालय, उत्तर प्रदेश हर वर्ष वाराणसी में अखिल भारतीय पद्मश्री मोहम्मद शाहिद प्राइज मनी हॉकी प्रतियोगिता का आयोजन करता है। हॉकी वाराणसी के अध्यक्ष डॉ. एके सिंह और सचिव के.बी. रावत ने बताया कि मोहम्मद शाहिद का संग्रहालय बन जाने से युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी। उन्हें मास्टर ऑफ ड्रिब्लिंग कहा जाता था।

सभी खेलों के दिग्गजों को मिले सम्मान
पूर्व ओलंपियन राहुल सिंह ने कहा कि संग्रहालय में सभी खेलों के दिग्गजों को सम्मान मिलना चाहिए। काशी के स्वर्गीय विवेक सिंह ने भी ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया था, उनकी स्मृतियां भी वहां होनी चाहिए। इसके अलावा कुश्ती और एथलेटिक्स में काशी का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों की उपलब्धियों को भी संग्रहालय में संरक्षित किया जाना चाहिए।

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