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प्रधानमंत्री के भाषण में छिपे संदेश: इतिहास के पन्नों से मोदी ने पांच नामों का जिक्र किया, पढ़िए क्या हैं इसके सियासी मायने
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सार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को वाराणसी में 700 करोड़ की लागत से तैयार हुए श्री काशी विश्वनाथ धाम का लोकार्पण किया। इस बड़े आयोजन के जरिए प्रधानमंत्री ने चुनावी बिगुल भी फूंक दिया। निशाना अगले साल उत्तर प्रदेश में होने वाला विधानसभा चुनाव था।
पीएम मोदी और योगी आदित्यनाथ
- फोटो : PTI
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विस्तार
श्री काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 50 मिनट तक भाषण दिया। उनका पूरा संबोधन पौराणिक कथाओं और मान्यताओं, बाबा विश्वनाथ, मां गंगा, श्रीराम मंदिर, राष्ट्र, सनातन, संस्कृति, प्राचीनता और देश के विकास पर केंद्रित था।
इस बीच प्रधानमंत्री ने इतिहास के पन्नों में दर्ज पांच ऐसे नामों का जिक्र किया जिसे बड़ा सियासी दांव बताया जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अपने इस संबोधन के जरिए इशारों ही इशारों में प्रधानमंत्री ने हिंदुओं को एकजुट होने का संदेश दिया है। पहले पढ़िए प्रधानमंत्री का वह पूरा बयान, जिसने उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है...
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इस बीच प्रधानमंत्री ने इतिहास के पन्नों में दर्ज पांच ऐसे नामों का जिक्र किया जिसे बड़ा सियासी दांव बताया जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अपने इस संबोधन के जरिए इशारों ही इशारों में प्रधानमंत्री ने हिंदुओं को एकजुट होने का संदेश दिया है। पहले पढ़िए प्रधानमंत्री का वह पूरा बयान, जिसने उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है...
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पीएम ने क्या कहा?
छत्रपति शिवाजी और औरंगजेब।
- फोटो : अमर उजाला
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में काशी की भव्यता, प्राचीनता और सभ्यता का जिक्र किया। कहा, 'हमारी इस वाराणसी ने युगों को जिया है। इतिहास को बनते-बिगड़ते देखा है। कितने ही कालखंड आए, कितनी सलतनतें उठी और मिट्टी में मिल गईं। फिर भी बनारस बना हुआ है। पूरी दुनिया में बनारस अपना रस बिखेर रहा है। बाबा का ये धाम शाश्वत ही नहीं रहा है, इसके सौंदर्य ने भी हमेशा संसार को आश्चर्यचकित किया है।'
प्रधानमंत्री ने आगे कहा, 'हमारे पुराणों में ऐसे ही दिव्य स्वरूपों का जिक्र है। इसकी खूबसूरती का जिक्र किया गया है। इतिहासकारों ने भी काशी की सौंदर्यता को अपने-अपने शब्दों में पिरोया है। सबने इसका बखान किया है। लेकिन समय कभी एक जैसा नहीं रहता है। कई बार आततायियों (अत्याचारियों और दुष्टों) ने इस नगरी पर आक्रमण किया। इसे ध्वस्त करने की कोशिशें की। औरंगजेब का अत्याचार और उसके आतंक का इतिहास साक्षी है। जिसने तलवार के बल पर हमारी सभ्यता को बदलने और संस्कृति को कुचलने की कोशिश की। लेकिन इस मिट्टी की बात ही कुछ और है।
यहां अगर औरंगजेब आता है तो शिवाजी भी उठ खड़े होते हैं। अगर कोई सालार मसूद इधर बढ़ता है तो राजा सुहेलदेव जैसे वीर योद्धा उसे हमारे एकता की ताकत का एहसास करा देते हैं। अंग्रेजों के दौर में वारेन हेस्टिंग्स का यहां के लोगों ने क्या हाल किया ये पूरी दुनिया को पता है। वारेन हेस्टिंग्स से जुड़ी कई कहावतें आज भी चर्चित है कि कैसे काशी के लोगों ने उसे भागने पर मजबूर कर दिया। आज समय का चक्र देखिए। आतंक का वो परियाय इतिहास के काले पन्नों तक सिमट कर रह गया है। मेरी काशी आगे बढ़ रही है और अपने गौरव को फिर से भव्यता दे रही है।'
प्रधानमंत्री ने आगे कहा, 'हमारे पुराणों में ऐसे ही दिव्य स्वरूपों का जिक्र है। इसकी खूबसूरती का जिक्र किया गया है। इतिहासकारों ने भी काशी की सौंदर्यता को अपने-अपने शब्दों में पिरोया है। सबने इसका बखान किया है। लेकिन समय कभी एक जैसा नहीं रहता है। कई बार आततायियों (अत्याचारियों और दुष्टों) ने इस नगरी पर आक्रमण किया। इसे ध्वस्त करने की कोशिशें की। औरंगजेब का अत्याचार और उसके आतंक का इतिहास साक्षी है। जिसने तलवार के बल पर हमारी सभ्यता को बदलने और संस्कृति को कुचलने की कोशिश की। लेकिन इस मिट्टी की बात ही कुछ और है।
यहां अगर औरंगजेब आता है तो शिवाजी भी उठ खड़े होते हैं। अगर कोई सालार मसूद इधर बढ़ता है तो राजा सुहेलदेव जैसे वीर योद्धा उसे हमारे एकता की ताकत का एहसास करा देते हैं। अंग्रेजों के दौर में वारेन हेस्टिंग्स का यहां के लोगों ने क्या हाल किया ये पूरी दुनिया को पता है। वारेन हेस्टिंग्स से जुड़ी कई कहावतें आज भी चर्चित है कि कैसे काशी के लोगों ने उसे भागने पर मजबूर कर दिया। आज समय का चक्र देखिए। आतंक का वो परियाय इतिहास के काले पन्नों तक सिमट कर रह गया है। मेरी काशी आगे बढ़ रही है और अपने गौरव को फिर से भव्यता दे रही है।'
इन पांच नामों की सबसे ज्यादा चर्चा
राजा सुहेलदेव
- फोटो : अमर उजाला
मोदी ने इतिहास के पन्नों से जिन पांच नामों का जिक्र किया उनमें मुगल आक्रांता औरंगजेब और उससे लोहा लेने वाले मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज, आक्रांता सालार मसूद और उसे मारने वाले राजा सुहेलदेव का नाम प्रमुख है। आखिर में प्रधानमंत्री ने ब्रिटिश अफसर वारेन हेस्टिंग्स का भी जिक्र किया।
वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक प्रमोद कुमार सिंह कहते हैं कि प्रधानमंत्री ने इन सभी नामों के जरिए दो बड़ा संदेश दिया है। पहला 'एकता में शक्ति' और उससे भी बड़ा संदेश 'हिंदुओं की एकता' का है। प्रमोद बताते हैं कि प्रधानमंत्री ने औरंगजेब और सालार मसूद जैसे आक्रांताओं के खिलाफ एकता की ताकत का जिक्र किया है। ये सभी जानते हैं कि औरंगजेब और सालार मसूद ने किस तरह हिंदुओं पर अत्याचार किया। हिंदू मंदिरों को तोड़कर मस्जिदें खड़ी कर दी। ऐसे में प्रधानमंत्री का इशारा हिंदू एकता की तरफ ही था।
राजा सुहेलदेव के जरिए पूर्वांचल पर निशाना
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में राजा सुहेलदेव के नाम का जिक्र करके पूर्वांवल के राजभर वोटर्स को साधने की कोशिश की। राजा सुहेलदेव के नाम पर ही ओम प्रकाश राजभर ने पार्टी बनाई है और अब सपा से गठबंधन कर लिया है।
राजभर वोटर्स के बीच ओम प्रकाश राजभर की अच्छी पकड़ मानी जाती है। हाल ही में ओम प्रकाश राजभर के साथी और एआईएमआईएम चीफ ओवैसी सालार महमूद के मजार पर चादर चढ़ाने गए थे। ऐसी चर्चा थी कि ओम प्रकाश राजभर भी उनके साथ थे। इसके बाद ओम प्रकाश राजभर काफी विवादों में घिर गए थे। ऐसे में प्रधानमंत्री ने राजा सुहेलदेव की वीरता और सालार मसूद से जोड़कर एक तीर से दो निशाना लगाया है।
वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक प्रमोद कुमार सिंह कहते हैं कि प्रधानमंत्री ने इन सभी नामों के जरिए दो बड़ा संदेश दिया है। पहला 'एकता में शक्ति' और उससे भी बड़ा संदेश 'हिंदुओं की एकता' का है। प्रमोद बताते हैं कि प्रधानमंत्री ने औरंगजेब और सालार मसूद जैसे आक्रांताओं के खिलाफ एकता की ताकत का जिक्र किया है। ये सभी जानते हैं कि औरंगजेब और सालार मसूद ने किस तरह हिंदुओं पर अत्याचार किया। हिंदू मंदिरों को तोड़कर मस्जिदें खड़ी कर दी। ऐसे में प्रधानमंत्री का इशारा हिंदू एकता की तरफ ही था।
राजा सुहेलदेव के जरिए पूर्वांचल पर निशाना
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में राजा सुहेलदेव के नाम का जिक्र करके पूर्वांवल के राजभर वोटर्स को साधने की कोशिश की। राजा सुहेलदेव के नाम पर ही ओम प्रकाश राजभर ने पार्टी बनाई है और अब सपा से गठबंधन कर लिया है।
राजभर वोटर्स के बीच ओम प्रकाश राजभर की अच्छी पकड़ मानी जाती है। हाल ही में ओम प्रकाश राजभर के साथी और एआईएमआईएम चीफ ओवैसी सालार महमूद के मजार पर चादर चढ़ाने गए थे। ऐसी चर्चा थी कि ओम प्रकाश राजभर भी उनके साथ थे। इसके बाद ओम प्रकाश राजभर काफी विवादों में घिर गए थे। ऐसे में प्रधानमंत्री ने राजा सुहेलदेव की वीरता और सालार मसूद से जोड़कर एक तीर से दो निशाना लगाया है।