UP: मां के सामने मासूम भांजे की गला रेतकर हत्या, 1694 दिन बाद मिली फांसी; कोर्ट ने कहा- रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस
Ghazipur News: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में चार वर्षीय भांजे की निर्मम हत्या के मामले में अदालत ने दोषी मामा को फांसी की सजा सुनाई है। न्यायालय ने इसे “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” मामला बताते हुए कहा कि आरोपी ने क्रूरता और हैवानियत की सभी सीमाएं पार कर दीं। फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने न्याय मिलने पर संतोष जताया।
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गाजीपुर में चार वर्षीय मासूम भांजे की गला रेतकर हत्या करने के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश (कक्ष संख्या-01) शक्ति सिंह की अदालत ने आरोपी मामा मो. अमजद खां को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने इसे दुर्लभतम श्रेणी (रेयरेस्ट ऑफ रेयर) का अपराध मानते हुए कहा कि आरोपी ने क्रूरता और अमानवीयता की सारी सीमाएं लांघ दीं।
अभियोजन के अनुसार, 21 अक्तूबर 2021 को मृतक के चाचा मिर्चा गांव निवासी मोहम्मद अरबाज खां ने पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि ग्राम बारा निवासी उनके भाई के साले मो. अमजद खां ने बिना किसी कारण उनके चार वर्षीय भतीजे दानियाल की चाकू से गला रेतकर हत्या कर दी। घटना के बाद घायल बच्चे को भदौरा अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने नौ गवाहों को अदालत में पेश किया। इनमें मृतक की मां शबाना नाज, गुलशन आरा, वादी मोहम्मद अरबाज खां, जूही, मोहम्मद आसिफ खां, एखलाख खां, विवेचक रहे सेवानिवृत्त उपनिरीक्षक विनोद कुमार पांडेय तथा चिकित्सक शामिल रहे।
साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से अपराध की भयावहता स्पष्ट होती है। मृतक की श्वास नली, भोजन नली, दोनों ओर की मुख्य रक्त नलियां तथा रीढ़ की पहली हड्डी तक कट गई थी।
शरीर का पिछला हिस्सा केवल चार सेंटीमीटर चमड़ी से जुड़ा हुआ था। न्यायालय ने टिप्पणी की कि जिस समय बच्चे का गला काटा जा रहा था, उसने बचने के लिए हाथों से प्रतिरोध करने का प्रयास किया होगा, जिसकी पुष्टि उसकी उंगलियों पर मिले घावों से होती है।
फैसले में यह भी कहा गया कि आरोपी मृतक का सगा मामा था, लेकिन उसने रिश्तों की मर्यादा का भी ख्याल नहीं रखा। मात्र चार वर्ष के अबोध बालक की उसकी मां के सामने की गई निर्मम हत्या समाज को झकझोरने वाली है। अदालत ने माना कि ऐसा अपराधी सामाजिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है, इसलिए उसे मृत्युदंड दिया जाना न्यायोचित है।