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पुलिस के थाने अतिक्रमण के शिकार: आठ थानों के बाहर ‘नो एंट्री’ जैसे हाल, पांच थाने बने पार्किंग स्टैंड

रवि प्रकाश सिंह, संवाद न्यूज एजेंसी, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Wed, 13 May 2026 03:17 PM IST
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सार

Varanasi News: वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस के थाने भी अतिक्रमण के शिकार हो गए हैं। यहां आठ थानों के बाहर ‘नो एंट्री’ जैसे हाल हो गया है। वहीं पांच थाने पार्किंग स्टैंड बने हैं।

No Entry conditions prevail outside eight police stations in Varanasi five stations have turned into parking
वाराणसी के थानों पर अतिक्रमण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

वाराणसी शहर में इन दिनों अतिक्रमण हटाने और यातायात व्यवस्था सुधारने के नाम पर पुलिस और प्रशासन अभियान चला रहे हैं। सड़क किनारे खड़े वाहनों का चालान किया जा रहा है। अप्रैल में 12 दिन तक अभियान चलाकर पुलिस ने 4010 चालान काटे हैं। नियम तोड़ने वालों पर प्राथमिकी भी दर्ज की गई और अतिक्रमण करने वालों को चेतावनी भी दी गई।

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विडंबना यह है कि जिन पुलिस वालों और थानों पर शहर को अतिक्रमण मुक्त रखने की जिम्मेदारी है, उन्हीं थानों के बाहर सड़कें कब्जे और अव्यवस्था की शिकार हैं। कहीं जब्त वाहनों की कतारें लगी हैं तो कहीं पुलिसकर्मियों की गाड़ियां सड़क पर खड़ी रहती हैं। कुछ थानों के बाहर ई-रिक्शा, पैडल रिक्शा और अस्थायी दुकानों का कब्जा है। चौक, दशाश्वमेध, सिगरा, लालपुर-पांडेयपुर और मंडुवाडीह थाने के बाहर हालात खराब है। 
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कई जगहों पर सड़क का बड़ा हिस्सा पार्किंग में तब्दील हो चुका है। जब्त वाहन महीनों तक सड़क किनारे खड़े रहते हैं, जिससे रास्ते संकरे हो गए हैं। शाम होते ही कई थानों के बाहर ऐसा नजारा दिखता है, मानो सड़क नहीं बल्कि पार्किंग स्टैंड हो। आदमी अगर कुछ मिनट के लिए भी सड़क किनारे वाहन खड़ा कर दे तो चालान कर दिया जाता है।  

अवैध पार्किंग पर चालान, लेकिन थानों के बाहर कब्जे पर चुप्पी

स्थानीय लोगों का कहना है कि आम आदमी अगर कुछ मिनट के लिए भी सड़क किनारे वाहन खड़ा कर दे तो उसका तुरंत चालान कर दिया जाता है, लेकिन थानों के बाहर फैले अवैध कब्जों और बेतरतीब पार्किंग पर कोई कार्रवाई नहीं होती। लोगों का सवाल है कि क्या नियम सिर्फ आम जनता के लिए हैं।

1- चौक थाना: पुलिसकर्मियों की गाड़ियों से भरी सड़क
शहर के सबसे महत्वपूर्ण थानों में शामिल चौक थाना के बाहर सड़क पर 50 से अधिक बाइकें खड़ी मिलती हैं। शाम के बाद यह संख्या और बढ़ जाती है। यहां सबसे अधिक बाइकें श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मियों की रहती हैं। यदि कोई आम व्यक्ति यहां वाहन खड़ा कर दे तो उसे तत्काल हटा दिया जाता है।



2- लक्सा थाना: अंदर जाने के लिए मुश्किल से रास्ता
रथयात्रा-गोदौलिया मार्ग स्थित लक्सा थाना बाहर से देखने पर थाना कम और पार्किंग स्टैंड ज्यादा नजर आता है। जब्त वाहन, स्थानीय लोगों की गाड़ियां और ठेला-खुमचे थाने के मुख्य द्वार तक लगे रहते हैं। फरियादियों को अंदर जाने के लिए मुश्किल से तीन फीट का रास्ता मिलता है। वाहनों के कारण सड़क की एक लेन प्रभावित रहती है।



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3- सिगरा थाना: मुख्यद्वार के दोनों ओर वाहनों का कब्जा
सिगरा थाना के मुख्यद्वार से करीब 50-50 मीटर आगे और पीछे तक वाहनों की कतार लगी रहती है। थाने के पीछे चंदुआ सट्टी जाने वाले मार्ग पर लावारिस वाहनों का जमावड़ा है। पहले से संकरी सड़क पर पार्किंग की वजह से यहां अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है।



4- दशाश्वमेध थाना: ई-रिक्शा और दुकानों का कब्जा
शहर के सबसे व्यस्त इलाके में स्थित दशाश्वमेध थाने के बाहर हाल यह है कि वहां से गुजरने पर यह समझना मुश्किल हो जाता है कि यह थाना है या पार्किंग स्थल। थाने के आसपास अस्थायी दुकानें, ई-रिक्शा, पैडल रिक्शा और बाइकें खड़ी रहती हैं। बड़ी संख्या में लोग यहां खरीदारी और काशी विश्वनाथ मंदिर जाने के लिए पहुंचते हैं, लेकिन अतिक्रमण पर कार्रवाई नहीं होती।

आठ अप्रैल से 26 अप्रैल तक चले अभियान में कटे चालान

नियमों की अवहेलना पर पुलिस आयुक्त के निर्देश पर विशेष अभियान चलाया गया। थाना पुलिस ने 12 दिनों में 4010 चालान किए। आठ अप्रैल को 1685, 15 अप्रैल को 266, 16 अप्रैल को 192, 17 अप्रैल को 231, 18 अप्रैल को 254, 19 अप्रैल को 252, 20 अप्रैल को 231, 22 अप्रैल को 176, 23 अप्रैल को 265, 24 अप्रैल को 214, 25 अप्रैल को 131 और 26 अप्रैल को 131 चालान किए गए। हालांकि अपने ही थानों के बाहर फैली अव्यवस्था पर पुलिस की नजर नहीं पड़ी।
 

क्या बोले अधिकारी
लावारिस वाहनों के लिए बड़ागांव में जगह चिह्नित की गई है। थानों के बाहर पुलिस हो या फरियादी वाहन नहीं खड़ा करेंगे। इसके लिए थाना प्रभारियों को निर्देशित किया गया है। लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। अतिक्रमण के खिलाफ अभियान पुलिस चला रही है। नियमों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। -मोहित अग्रवाल, पुलिस आयुक्त

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