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Varanasi News: वाराणसी में डीएम, सीपी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस, जानें वजह; नहीं हो रही थी कार्रवाई

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sun, 11 Jan 2026 11:15 AM IST
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सार

Varanasi News: वाराणसी के अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने सिंथेटिक मांझा और नायलॉन धागा मामले में अधिकारियों को नोटिस भेजी है। इसमें कहा गया है कि एनजीटी के आदेशों का उल्लंघन किया जा रहा है।

Notice issued to DM, CP mohit agrawal Pollution Control Board in Varanasi no action was being taken
एनजीटी कानपुर - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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सिंथेटिक मांझा और नायलॉन धागा मामले में वाराणसी के जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी की गई है। अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 की धारा 30(1) के तहत डीएम व पुलिस आयुक्त सहित क्षेत्रीय अधिकारी, यूपीपीसीबी को कानूनी नोटिस भेजी है।

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नोटिस में अधिवक्ता सौरभ ने एनजीटी द्वारा खालिद अशरफ व अन्य बनाम भारत संघ और अन्य (11 जुलाई, 2017) का हवाला देते हुए कहा को सिंथेटिक मांझा/ नायलॉन धागे और पतंग उड़ाने के लिए इस्तेमाल होने वाले अन्य सभी सामान जैसे सिंथेटिक धागों के निर्माण, बिक्री, भंडारण, खरीद और उपयोग पर रोक के बावजूद प्रभावी प्रतिबंध नहीं लगाया जा रहा है।
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कानूनी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि पतंगबाजी के लिए केवल सूती धागे का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन सिंथेटिक मांझा/ नायलॉन धागे धड़ल्ले से बिक रहे हैं। एनजीटी के निर्देशों के बावजूद लगातार आदेश का उल्लंघन हो रहा है और वाराणसी में नायलॉन/ सिंथेटिक मांझा धागा और साथ ही सिंथेटिक सामग्री से लेपित धागे खरीदे, बेचे, भंडारित और इस्तेमाल किए जा रहे हैं। इससे मनुष्य, पक्षी जानवर लगातार उसके निवाला बनते जा रहे हैं।

नोटिस

पुलिस ईमानदारी से अपना कर्तव्य नहीं निभा रही है और दुकानदारों के साथ मिलीभगत करके सीधे या परोक्ष रूप से उल्लंघन के लिए जिम्मेदार है। प्रतिबंधित मांझे का निर्माण भी जारी है। सौरभ ने कहा कि क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सो रहे हैं और अपना कर्तव्य नहीं निभा रहे हैं।

यहां तक कि जिला कलेक्टर/ डीएम, वाराणसी भी उचित कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। कानूनी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि अगर जिम्मेदार अधिकारी अपने कर्तव्य का निर्वहन करने में लापरवाही करेंगे तो मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कि अदालत के समक्ष सभी के विरुद्ध आपराधिक मुकदमे एनजीटी अधिनियम, 2010 की धारा 30 के आलोक में कराया जाएगा।

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