तंग गलियों में सिमटी जिंदगी: आजमगढ़ के पुराने शहर में आग लगी तो... दो फीट की गली में पैदल भी नहीं भाग सकेंगे
Azamgarh News: आजमगढ़ जिले में पहाड़पुर, आसिफगंज, मुख्य चौक, पुरानी कोतवाली के आसपास के मोहल्लों की पहचान पुरानी तंग गलियों से है। इन तंग गलियों में खतरा बहुत है। अतिक्रमण के बाद यहां सिर्फ डेढ़ से दो फीट का रास्ता बचा है।
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लगेगी आग तो आएंगे घर कई जद में...। ख्यात शायर राहत इंदौरी की यह मशहूर पंक्ति आजमगढ़ के पुराने शहर की हकीकत बयां करती है। पहाड़पुर, आसिफगंज, मुख्य चौक, पुरानी कोतवाली के आसपास के मोहल्लों की पहचान पुरानी तंग गलियों से है। इन गलियों की चौड़ाई महज चार से पांच फीट है। अतिक्रमण के बाद सिर्फ डेढ़ से दो फीट का रास्ता बचा है। इन क्षेत्रों में मकान एक-दूसरे से सटे हैं। अधिकांश गलियों में चार पहिया वाहन तो दूर, दोपहिया वाहन निकलना भी मुश्किल है।
गलियों में स्थित दुकानों की सामान आधी गली तक फैले हैं। ऐसे में यदि किसी मकान या दुकान में आग लग जाए तो दमकल विभाग के बड़े वाहन घटनास्थल तक नहीं पहुंच पाएंगे। आग बुझाने के लिए कर्मियों को पाइप और अन्य उपकरण लेकर पैदल ही जाना पड़ेगा। इससे राहत कार्य में देरी होने की आशंका बनी रहेगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बाजार क्षेत्र में बिजली के तारों का जाल, छोटी-छोटी दुकानों में रखा ज्वलनशील सामान और लगातार बढ़ते अतिक्रमण खतरे को और गंभीर बना रहा है। त्योहारों और शादी के मौसम में भीड़ बढ़ने पर स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
शहर में समय-समय पर अतिक्रमण हटाने के अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन कुछ समय बाद फिर वही स्थिति बन जाती है। लोगों का मानना है कि संभावित अग्निकांड जैसी आपदा से बचाव के लिए तंग गलियों को अतिक्रमण मुक्त कराना, अग्निशमन पहुंच मार्ग चिह्नित करना और स्थानीय स्तर पर जागरूकता बढ़ाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
कुर्मी टोला, बदरका, आसिफगंज, खत्री टोला, कुंदीगढ़, दलसिंगार, कोट मोहल्ला, गुरुटोला, तकिया, टेढि़या मस्जिद, पुरानी कोतवाली, मुख्य चौक।
25 वार्डों में 50 इलाके ऐसे जहां पैदल चलना भी मुश्किल
शहर के 25 वार्डों में 50 से ज्यादा ऐसे इलाके हैं, जहां दो लोग एक साथ पैदल भी नहीं चल सकते हैं। इन इलाकों में आग लग जाए तो दमकल गाड़ी भी नहीं पहुंच सकती। डेढ़ लाख से ज्यादा आबादी वाले शहर में आज भी 50 हजार से अधिक आबादी निवास करती है। दिन में यहां लगने वाले बाजार के कारण संख्या करीब एक लाख तक पहुंच जाती है।
अग्निशमन विभाग के पास उपलब्ध संसाधन
- सात बड़ी गाड़ियां
- पांच छोटे हाईप्रेशर
- एक फायर क्विक रिस्पांस व्हीकल
- दो फायर बुलेट
लोग बोले
- मुकेरीगंज में पहले भी बड़ा हादसा हो चुका है। इसके बावजूद आज तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं हुई। संकरी गलियों में आग लगने पर सबसे पहले स्थानीय लोग ही बचाव में जुटते हैं। -संदीप सिंह, कटरा
- इलाके में कई गलियां इतनी संकरी हैं कि ठेला भी मुश्किल से निकलता है। ऐसे में दमकल कैसे पहुंचेगी। अग्निशमन विभाग को ऐसे क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था करनी चाहिए। -अमित जायसवाल, कोलघाट
- लखनऊ में लबे रोड अग्निकांड होने पर अग्निशमन विभाग समय से पहुंच नहीं सका। यहां तो गलियां ही गलियां है। अगर कोई हादसा होता है तो जनजीवन रामभरोसे है। -आशीष सिंह, गुरुटोला
- गलियों में किनारे के दुकानदार आधा दूरी तक अपने सामान रखे रहते हैं। इस कारण गलियां आधे से ज्यादे अतिक्रमण की शिकार हैं। इसके खिलाफ अभियान चलाने की आवश्यकता है। -श्रीकांत खेतान, कोलघाट
अधिकारी बोले
घनी आबादी और संकरी गलियां अग्निशमन में चुनौती जरूर हैं, लेकिन विभाग हर परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार है। ऐसे क्षेत्रों के लिए फायर बुलेट और क्विक रिस्पांस व्हीकल का उपयोग किया जाता है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर दमकल कर्मी पैदल रास्ता बनाकर मौके तक पहुंचने का प्रयास करते हैं। विवेक शर्मा, सीएफओ