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पितृ पक्ष: काशी में एक रुपये के सिक्के पर बिठाई जाती हैं इंग्लैंड, अमेरिका और फ्रांस की अतृप्त आत्माएं

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sun, 21 Sep 2025 12:16 PM IST
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सार

काशी में अपने पितरों की आत्मा को शांति मोक्ष दिलाने के लिए देश ही नहीं विदेशों से भी लोग आते हैं। विधि-विधान से पूजन कर पितरों का पिंड दान करते हैं। पिशाच मोचन पर त्रिपिंडी के लिए सैकड़ों विदेशी पहुंचते हैं।

Pitru Paksha unsatisfied souls of England America and France are seated on one rupee coin
पिंडदान करने पहुंचे विदेशी श्रद्धालु। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

Varanasi News: वर्षों से अतृप्त आत्माओं को मुक्ति दिलाने के लिए दुनिया भर के लोग काशी का रुख कर रहे हैं। यहां एक ऐसा तीर्थ है जहां अकाल मृत्यु के बाद दिवंगत की आत्मा को शांत करने के लिए त्रिपिंडी का श्राद्ध होता है।

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काशी के इस पिशाचमोचन तीर्थ पर न केवल भारत के सुदूर राज्यों के लोग श्राद्ध के लिए आ रहे हैं बल्कि अमेरिका, इंग्लैंड और फ्रांस जैसे विकसित देशों के नागरिक भी अतृप्त आत्माओं की शांति के लिए नारायण बलि और दशमहाविद्या जैसे कर्मकांड कराने आते हैं।
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पितृपक्ष में विदेशियों की अतृप्त आत्माओं की शांति के लिए बुकिंग शुरू हो गई है। इसका अनुष्ठान नवंबर से मार्च के बीच में होगा। एक रुपये के सिक्के को पीपल के पेड़ पर रखकर पितरों का उधार चुकाया जाएगा। अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस और मॉरीशस से आने वाले विदेशियों की संख्या 300 से 400 के आसपास है। तीर्थ पुरोहित नीरज पांडेय ने बताया कि विदेशियों का त्रिपिंडी, नारायण बलि के साथ दशमहाविद्यालय का हवन कराया जाता है। 

पिशाचमोचन कुंड पर चुकाते हैं आत्माओं का उधार : गरुण पुराण के काशी खंड में पिशाच मोचन कुंड का उल्लेख मिलता है, जहां पितरों को प्रेत बाधा और अकाल मृत्यु से मुक्ति मिलती है। यहां पर आत्माओं के उधार भी चुकाए जाते हैं।

तीर्थ पुरोहित राजेश मिश्र ने बताया कि पीपल के पेड़ में ठोंके गए असंख्य सिक्के और कील किसी न किसी अतृप्त आत्मा का ठिकाना हैं। पीपल के पेड़ पर मृत व्यक्ति की तस्वीर और उनके किसी न किसी प्रतीक चिह्न को भी लगाया जाता है। 

सर्वपितृ अमावस्या पर आज देंगे पितरों को विदाई
आश्विन मास की अमावस्या पर पितरों को विदाई दी जाएगी। 21 सितंबर को सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध से पितृगण प्रसन्न होकर जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली का आशीर्वाद देते हैं। अंतिम दिन गंगा के तट से लेकर पिशाचमोचन कुंड और घरों में श्राद्ध व तर्पण किया जाएगा। इसके साथ ही पितरों का आशीर्वाद लेकर उनको विदाई दी जाएगी। ज्योतिषविद विमल जैन ने बताया कि आश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि शनिवार 20 सितंबर को रात 12 बजकर 17 मिनट से 21 सितंबर की देर रात 01 बजकर 24 मिनट तक रहेगी। 

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