Rathyatra Mela: मिट्टी के चूल्हे पर तैयार हो रहा प्रभु जगन्नाथ का चमत्कारी काढ़ा, काशी पहुंचे सैकड़ों भक्त
काशी में जगन्नाथ रथयात्रा के दौरान मिट्टी के चूल्हे पर प्रभु जगन्नाथ के लिए पारंपरिक काढ़ा तैयार किया जा रहा है, जिसे प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं को वितरित किया जाएगा। प्रसाद पाने के लिए कई राज्यों से श्रद्धालु पहुंचे हैं। महिलाओं ने सेवा व्यवस्था की कमान संभालते हुए पूरे श्रद्धाभाव से प्रसाद तैयार करने और वितरण का दायित्व निभाया।
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Varanasi News: अस्सी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ को अर्पित किए जाने वाले पारंपरिक औषधीय काढ़े का प्रसाद पाने के लिए विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। प्रतिदिन 500 से अधिक श्रद्धालुओं को काढ़े का प्रसाद वितरित किया जा रहा है।
मंदिर के प्रधान पुजारी पं. राधेश्याम पांडेय ने बताया कि शनिवार दोपहर करीब तीन बजे मंदिर परिसर में मिट्टी के चूल्हे पर काढ़ा बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई। लगभग एक घंटे तक धीमी आंच पर पकाए गए इस काढ़े में लौंग, छोटी-बड़ी इलायची, दालचीनी, तेजपत्ता, काली मिर्च, तुलसी दल सहित कुल 10 प्रकार की औषधीय सामग्रियों का उपयोग किया गया।
शनिवार को परंपरा के अनुसार अस्वस्थ माने जा रहे भगवान जगन्नाथ को विशेष औषधीय काढ़े का भोग लगाया गया। काढ़ा तैयार करने से लेकर प्रसाद वितरण तक पूरे आयोजन में महिला श्रद्धालुओं ने भी बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को काढ़े का भोग अर्पित करने के बाद शाम चार बजे से श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण शुरू हुआ, जो देर शाम तक चलता रहा।
काढ़े की तैयारी में बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालु भी शामिल रहीं। कोई तुलसी दल चुनने में जुटी थी तो कोई मंदिर की साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाओं में सहयोग कर रही थी। महिलाएं परिवार के उत्तम स्वास्थ्य और रोगमुक्ति की कामना के साथ काढ़े का प्रसाद भी ग्रहण कर रही थीं।
पटना से अपनी बेटी के साथ पहुंचीं श्रद्धालु सुमन राय ने बताया कि उनकी बेटी रूपराशि राय लंबे समय से बार-बार सर्दी-जुकाम की समस्या से परेशान रहती है। कई जगह उपचार कराने के बावजूद स्थायी लाभ नहीं मिला। प्रभु जगन्नाथ के औषधीय काढ़े की महिमा सुनकर वह बेटी के स्वास्थ्य लाभ की कामना लेकर काशी आई हैं। वहीं अस्सी निवासी बेबी दुबे ने बताया कि वह परिवार के सभी सदस्यों के निरोग और स्वस्थ जीवन की प्रार्थना के साथ काढ़े का प्रसाद लेने मंदिर पहुंची हैं।
पं. राधेश्याम पांडेय ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रद्धा और विश्वास के साथ इस औषधीय काढ़े के प्रसाद का सेवन करने से रोगों से मुक्ति और उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि 15 जुलाई को भगवान जगन्नाथ की भव्य डोली यात्रा निकाली जाएगी, जबकि 16 जुलाई से तीन दिवसीय ऐतिहासिक रथयात्रा मेले का शुभारंभ होगा, जिसमें देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
जगन्नाथ मंदिर के अनुष्ठानों में दक्षिणामूर्ति मठ ने मांगी पारंपरिक सहभागिता
अस्सी स्थित पूर्वाम्नाय श्री दक्षिणामूर्ति मठ ने श्री जगन्नाथ मंदिर न्यास से आगामी रथयात्रा एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में अपनी पारंपरिक सहभागिता बहाल करने का अनुरोध किया है। इस संबंध में शनिवार को मठ की ओर से मंदिर न्यास को एक औपचारिक पत्र भेजा गया। मठ ने अपने अनुरोध के समर्थन में प्राचीन परंपराओं तथा आदि शंकराचार्य से जुड़े ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख किया है।
पत्र में पुरी की प्राचीन धार्मिक परंपराओं का हवाला देते हुए तीन प्रमुख अनुष्ठानों में मठ की सहभागिता सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है। मठ ने मांग की है कि रथयात्रा से एक दिन पहले तथा बहुड़ा यात्रा से एक दिन पूर्व मठ की ओर से भेजे जाने वाले मिष्ठान्न, विशेष रूप से खाजा और रसगुल्ले, भगवान को भोग के रूप में अर्पित किए जाएं।