UP: अग्रसेन महाविद्यालय के 31 शिक्षकों-कर्मचारियों को बहाल करने की संस्तुति, कुलसचिव को शासन ने भेजा लेटर
Varanasi News: जांच समिति ने यह भी पाया कि जिन कर्मचारियों को कंप्यूटर दक्षता के अभाव में हटाया गया, उन्हें पूर्व में प्रशिक्षण का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया। इसके विपरीत, उनके स्थान पर नए कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई, जिसका भी पूरा विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया।
विस्तार
श्री अग्रसेन कन्या पीजी कॉलेज से जून 2025 में कार्यमुक्त किए गए 31 शिक्षकों एवं कर्मचारियों के मामले में शासन ने बड़ा कदम उठाया है। संयुक्त निदेशक (उच्च शिक्षा) द्वारा गठित त्रि-सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर कार्यमुक्त प्रबंधकीय शिक्षकों एवं कर्मचारियों की बहाली की संस्तुति की गई है। साथ ही महाविद्यालय की विशेष संपरीक्षा (स्पेशल ऑडिट) कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
संयुक्त निदेशक (उच्च शिक्षा) डॉ. शशि कपूर की ओर से महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलसचिव को पत्र भेजा गया है। इसमें कहा गया है कि जांच समिति ने स्पष्ट किया कि महाविद्यालय प्रबंधन द्वारा वांछित अभिलेख उपलब्ध न कराना स्वेच्छाचारिता और मनमाने रवैये का द्योतक है। लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों-कर्मचारियों को हटाकर उनके स्थान पर नई नियुक्तियां करना न्यायसंगत नहीं है।
समिति ने प्रबंधन को निर्देशित किया है कि वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर कार्यमुक्त शिक्षकों एवं कर्मचारियों को पुनः महाविद्यालय में वापस लिया जाए। साथ ही कॉलेज की विशेष सम्परीक्षा कराई जाए। शिक्षा निदेशक ने 7 जनवरी को इस संबंध में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलसचिव को पत्र जारी कर क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी से अग्रेतर कार्रवाई करते हुए शासन को आख्या प्रेषित करने को कहा है।
शिकायत के बाद हुई कार्रवाई
यह कार्रवाई शिक्षकों-कर्मचारियों की लगातार शिकायतों के बाद हुई है, जो पिछले छह माह से अपनी बहाली की मांग को लेकर शासन-प्रशासन के चक्कर लगा रहे थे। उल्लेखनीय है कि जून 2025 में कॉलेज प्रबंधन ने 16 प्रबंधकीय शिक्षक एवं 15 कर्मचारियों को छात्र संख्या में कमी और कर्मचारियों में कंप्यूटर ज्ञान के अभाव का हवाला देते हुए व्हाट्सऐप के माध्यम से कार्यमुक्ति का नोटिस भेज दिया था।
जनसुनवाई से शासन तक पहुंचा मामला
कार्यवाही के विरोध में कार्यमुक्त शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री की काशी यात्रा के दौरान सर्किट हाउस में जनसुनवाई के समय अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। इसके अलावा पीएमओ कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई के दौरान विधायक नीलकंठ तिवारी से भी मिलकर बहाली की मांग रखी गई थी। शासन ने मामले का संज्ञान लेते हुए क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी को प्रकरण के निस्तारण के लिए नामित किया था।
जांच में प्रबंधन की भूमिका पर सवाल
उच्च शिक्षा निदेशक ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था। समिति के समक्ष दोनों पक्षों ने अपने-अपने साक्ष्य प्रस्तुत किए। जांच में सामने आया कि कॉलेज प्रबंधन एवं प्राचार्य द्वारा छात्र संख्या में कमी और आय कम होने से संबंधित कोई ठोस अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए गए। न ही कर्मचारियों को कंप्यूटर एवं टाइपिंग प्रशिक्षण देने के लिए कोई व्यवस्था या चेतावनी नोटिस दिखाया गया।
हाईकोर्ट के आदेश का भी हवाला
जांच रिपोर्ट में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में दायर रिट याचिका (डॉ. प्रतिभा तिवारी व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य) का उल्लेख किया गया है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि दो दशक से अधिक समय तक कार्यरत सहायक प्राध्यापकों को बिना ठोस कारण बताए एकाएक हटाया जाना उचित नहीं है और उनके मामलों पर विधि के अनुसार विचार किया जाना चाहिए।