UP: रिश्वत लेने के आरोपी दरोगा और सिपाही गए जेल, सीपी ने रिपोर्ट तलब की; केस में नाम हटाने को मांगे थे रुपये
Varanasi Crime: वाराणसी में एंटी करप्शन की टीम ने बुधवार को दो पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि दोनों प्राथमिकी से नाम हटाने के लिए पैसे मांग रहे थे। टीम दोनों से पूछताछ कर रही है।
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Varanasi News: दहेज उत्पीड़न समेत अन्य धाराओं में दर्ज प्राथमिकी में नाम हटाने के एवज में 50 हजार रुपये की घूस मांगने और 20 हजार पर सौदा तय कर रिश्वत लेते समय गिरफ्तार काशी विद्यापीठ चौकी प्रभारी शिवाकर मिश्रा और सिपाही गौरव कुमार को एंटीकरप्शन की टीम ने बृहस्पतिवार को विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम प्रथम) अनिल कुमार की अदालत में पेश किया।
अदालत ने अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद दोनों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने मामले की जांच के लिए रिपोर्ट मांगी है। साथ ही अब तक तैनाती के दौरान किस तरह की कार्यशैली रही इसकी भी विभागीय जांच कराई जाएगी।
इसके पूर्व बीएचयू चौकी पर तैनाती के दौरान भी शिवाकर मिश्रा का नाम कुछ मामलों में उछला था। बीएचयू के आईआईटी की एक छात्रा से जुड़े गंभीर मामले में जांच को प्रभावित करने और प्रकरण को दूसरी दिशा में मोड़ने की कोशिश के आरोप उन पर लगे थे।
वहीं, बीएचयू के ही एक नामी प्रोफेसर के मामले में भी खूब इधर उधर किया था। बुधवार को गिरफ्तारी के दौरान सिगरा पुलिस का आरोपियों के बचाव में काशी विद्यापीठ चौकी पर पहुंचकर कार्रवाई में हस्तक्षेप करने के मामले को भी पुलिस आयुक्त ने गंभीरता से लिया है।
ये है मामला
सिगरा थाना क्षेत्र के विद्यापीठ चौकी इंचार्ज शिवाकर मिश्रा और आरक्षी गौरव कुमार द्विवेदी को एंटी करप्शन की ट्रैप टीम ने बुधवार शाम 20 हजार घूस लेते चौकी से गिरफ्तार किया। सिपाही के पास से 20 हजार की नकदी मिली। दहेज उत्पीड़न समेत अन्य आरोपों की दर्ज प्राथमिकी से नाम निकालने के एवज में रुपये मांगे गए थे। आरोपी दरोगा और सिपाही से लालपुर-पांडेयपुर थाना में एंटी करप्शन की टीम पूछताछ कर रही है। इस दौरान चौकी में नोकझोंक भी हुई।
चंदौली के अलीनगर थाना क्षेत्र के मुगलचक निवासी प्रह्लाद गुप्ता ने भ्रष्टाचार निवारण संगठन वाराणसी में शिकायती पत्र दिया। प्रहलाद ने एंटी करप्शन को बताया कि उनकी पत्नी ममता गुप्ता ने सिगरा थाने में दहेज उत्पीड़न, मारपीट समेत अन्य आरोपों में प्राथमिकी दर्ज कराई है। परिजनों को भी आरोपी बनाया है।
पुलिस ने की कार्रवाई
मुकदमे में जेल तक चला गया। एक साल बाद रिहा होकर आया। प्राथमिकी की विवेचना विद्यापीठ चौकी इंचार्ज शिवाकर मिश्रा के पास है। प्राथमिकी से नाम निकालने और फाइनल रिपोर्ट लगाने के एवज में एक लाख रुपये की मांग विवेचक शिवाकर मिश्रा ने की। धमकी दी गई कि पैसे नहीं मिले तो धारा बढ़ाकर जेल जाना तय है।
आर्थिक रूप से टूटने का हवाला दिया तो मामला 50 हजार रुपये तक सेट हुआ। इस बीच लगातार चौकी इंचार्ज शिवाकर मिश्रा की ओर से रुपये देने का दबाव बनाया गया। बहन से कर्ज मांगा। पहली किश्त में 20 हजार रुपये लेकर शाम 6.30 बजे चौकी पर पहुंचा।
