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UP: टकसाल कांड...वारदात के समय 250 किमी दूर अस्पताल में भर्ती थे विधायक अभय, 7 लोगों ने दी गवाही; सभी दोषमुक्त

ललित शंकर पांडेय, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Thu, 16 Apr 2026 05:52 AM IST
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सार

Varanasi News: वाराणसी के चर्चित टकसाल मामले में 24 साल बाद फैसला आ गया। अदालत ने सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। इसमें सात लोगों ने अपनी गवाही दी। वहीं, विधायक अभय सिंह ने बताया कि घटना के दिन वह फैजाबाद स्थित प्राथमिक अस्पताल में भर्ती थे।

Taksal Scandal MLA Abhay Hospitalized 250 km Away Time of Incident 7 Witnesses Testified All Acquitted
दोषमुक्त होने के बाद कोर्ट से बाहर निकलते गोसाईगंज विधायक अभय सिंह। - फोटो : संवाद
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विस्तार

Varanasi News: टकसाल सिनेमा के पास 24 साल पहले हत्या के प्रयास के मामले में गोसाईगंज विधायक अभय सिंह, एमएलसी विनीत सिंह समेत छह आरोपियों को बचाव पक्ष के सात गवाहों की गवाही ने सजा से बचा लिया। इसमें मुंबई आरटीओ के क्लर्क, नदेसर के सैलून संचालक, फैजाबाद के डाॅक्टर, फार्मासिस्ट समेत सात गवाह शामिल हैं। जजमेंट में यह दर्ज है कि टकसाल सिनेमा के पास हुई फायरिंग की घटना के वक्त अभय सिंह और संदीप सिंह 250 किमी दूर फैजाबाद के प्राथमिक चिकित्सालय पूरा बाजार में भर्ती थे।

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अस्पताल के चिकित्सक डॉ. अरविंद कुमार सिंह और फार्मासिस्ट शुभकरण यादव ने कोर्ट में इसकी गवाही दी। चार अक्तूबर 2022 की सुबह 7:30 बजे सड़क हादसे में घायल अभय सिंह को मामले में सह आरोपी बनाए गए संदीप सिंह ने अस्पताल में भर्ती कराया था। केयरटेकर के रूप में संदीप वहां मौजूद थे। 

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पुलिस ने की कार्रवाई

घायल अभय सिंह का दूसरे दिन पांच अक्तूबर की शाम चार बजे तक उपचार हुआ था। अधिवक्ता वरुण प्रताप सिंह ने बताया कि बचाव पक्ष के गवाह में फैजाबाद प्राथमिक अस्पताल के डाॅ. अरविंद कुमार सिंह, फार्मासिस्ट शुभकरण यादव, सिंह मेडिकल के मेडिकल अफसर डाॅ. हेमंत कुमार, सुरजीत कुमार, मो. सिराज, मो. इदरीस, आरटीओ ऑफिस थाणे महाराष्ट्र के लिपिक शुभम सिंह पेश हुए। जिस महाराष्ट्र नंबर की सफारी गाड़ी में धनंजय सिंह सवार थे, वह जेसीबी का नंबर था। 2004 में जेसीबी स्वामी हरियाणा के फरीदाबाद निवासी हरदीप सिंह थे। अभियोजन पक्ष की ओर से विवेचक सेवानिवृत्त सीओ, कांस्टेबल, डॉक्टर समेत नौ गवाह पेश हुए।

24 साल में छात्र जीवन से जुर्म, जरायम और माननीय तक का सफर
वाराणसी। पूर्वांचल से अवध तक धनंजय सिंह और अभय सिंह की अदावत जुर्म, जरायम और सियासी तापमान को घटाती और बढ़ाती रही है। इन 24 साल में छात्र जीवन में साथी से दुश्मन और फिर माफिया से माननीय तक सफर तय करने वाले धनंजय सिंह और अभय सिंह की लड़ाई न्यायालय की चौखट तक चली आई।

साल 1992 में लखनऊ विश्वविद्यालय में पढ़ाई करने पहुंचे जौनपुर के सिकरारा के बनसफा गांव निवासी धनंजय सिंह और वाराणसी कैंट के बैंक कर्मी भगवान बक्स सिंह के बेटे अभय सिंह की दोस्ती हुई। अभय सिंह के पिता कचहरी एसबीआई में कार्यरत थे और भुवनेश्वर नगर काॅलोनी में रहते थे। 

अभय सिंह और धनंजय एक ही हास्टल में रहते थे। इसके बाद छात्रसंघ चुनाव से लेकर अन्य कई मामलों में दोनों की दोस्ती प्रगाढ़ रही। 1996 में लखनऊ में हेमंत सिंह की हत्या हुई। अभय सिंह और धनंजय सिंह दोनों आरोपी बनाए गए। धनंजय फरार हो गए तो अभय सिंह जेल गए। 1999 में धनंजय सिंह सरेंडर कर जेल पहुंचे। 

लगभग 54 माह जेल में अभय सिंह बंद रहे। 2000 में अभय सिंह जेल से जमानत पर छूटे। 2002 में धनंजय सिंह जौनपुर के रारी विधानसभा से विधायक हुए तो अभय सिंह ने गोसाईगंज में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा लेकिन हार गए। 2002 में ही कैंट थाने में धनंजय सिंह ने हत्या के प्रयास मामले में अभय सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। 

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