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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Temples and Ganges lie just 400 meters to 4 kilometers away from garbage pass covering noses and mouths

काशी के नर्क: इन कूड़ाघरों से 400 मीटर से 4 किमी दूर मंदिर और गंगा, नाक-मुंह दबाकर गुजरते हैं लोग; परेशानी

Sun, 05 Jul 2026 11:42 AM IST
Aman Vishwakarma गुंजन श्रीवास्तव, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
गुंजन श्रीवास्तव, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sun, 05 Jul 2026 11:42 AM IST
सार

Varanasi News: शहर के शिवाला, सोनिया, विश्वेश्वरगंज, मच्छोदरी पार्क और रेवड़ी तालाब क्षेत्र के कूड़ाघरों से उठ रही दुर्गंध से लोग परेशान हैं। इन स्थानों से 400 मीटर से चार किलोमीटर के दायरे में मंदिर और गंगा स्थित हैं। राहगीरों को नाक-मुंह ढककर गुजरना पड़ रहा है।

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Temples and Ganges lie just 400 meters to 4 kilometers away from garbage  pass covering noses and mouths
शिवाला में कूड़ाघर के पास सड़क पर फैला मलबा। - फोटो : संवाद

विस्तार

Ground Report: एक ओर काशी स्वच्छता रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन का दावा कर रही है, वहीं, दूसरी ओर शहर के कई प्रमुख इलाकों में बने कूड़ाघर स्थानीय लोगों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। शिवाला, सोनिया, विश्वेश्वरगंज, मच्छोदरी पार्क और रेवड़ी तालाब स्थित कूड़ाघरों के आसपास हालात ऐसे हैं कि लोगों का गुजरना तक मुश्किल हो जाता है। 

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शिवाला कूड़ाघर से केदार मंदिर की दूरी करीब डेढ़ किलोमीटर और गंगा महज 400 मीटर दूर है। सोनिया कूड़ाघर से श्री काशी विश्वनाथ मंदिर लगभग चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। विश्वेश्वरगंज कूड़ाघर से कालभैरव मंदिर करीब डेढ़ किलोमीटर और रेवड़ी तालाब कूड़ाघर से बटुक भैरव मंदिर लगभग दो किलोमीटर दूर है। सड़कों पर बिखरा कूड़ा, उठती दुर्गंध और जानवरों की आवाजाही के कारण इन इलाकों की तस्वीर किसी नर्क सी दिखती है। 
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अमर उजाला की टीम ने विभिन्न कूड़ाघरों के आसपास का जायजा लिया। कई स्थानों पर कूड़े के ढेर सड़क तक फैले मिले। राहगीर नाक पर रूमाल रखकर गुजरते दिखे, जबकि महिलाएं साड़ी या दुपट्टे से चेहरा ढंककर निकलती नजर आईं। स्थानीय लोगों का कहना है कि दिनभर छोटी-बड़ी गाड़ियां कूड़ा डंप करती रहती हैं, जबकि उसका उठान समय से नहीं हो पाता। इससे स्थिति और खराब हो जाती है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन कूड़ाघरों के आसपास धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल भी मौजूद हैं। 

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प्रतिदिन शहर से निकलता है 1300 टन कूड़ा 
नगर निगम के अनुसार शहर से प्रतिदिन 1200 से 1300 टन कूड़ा निकलता है। इसमें 40 प्रतिशत गीला, 35 प्रतिशत सूखा, 15 प्रतिशत खतरनाक तथा 10 प्रतिशत बायोमेडिकल कचरा शामिल होता है। अधिकांश कूड़ा मिश्रित रूप में आता है, जिसे करसड़ा प्लांट में अलग-अलग श्रेणियों में छांटा जाता है।

बांटे जा रहे चार प्रकार के डस्टबिन: कचरे के लिए चार प्रकार के डस्टबिन वितरित किए जा रहे हैं। हरे रंग के डस्टबिन में गीला कचरा, नीले रंग के डस्टबिन में सूखा कचरा, लाल रंग के डस्टबिन में बायोमेडिकल कचरा और काले रंग के डस्टबिन में घरेलू खतरनाक कचरा रखने की व्यवस्था है।

दो महीने बाद शहर में एक भी कूड़ाघर नहीं रहेगा। 27 में से 23 कूड़ाघर बंद कराए जा चुके हैं। शेष चार कूड़ाघरों को भी बंद कराने की दिशा में काम चल रहा है। - अशोक कुमार तिवारी, मेयर

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