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वाराणसी ः संस्कृत साधक पद्मश्री वागीश शास्त्री पंचतत्व में विलीन, नम आंखों से हरिश्चंद्र घाट पर दी अंतिम विदाई

Thu, 12 May 2022 09:25 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Thu, 12 May 2022 09:25 PM IST
सार

वह संस्कृत व्याकरणविद, भाषाविद, तंत्र और योग के ज्ञाता थे। 2018 में भारत सरकार ने उन्हें साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में पद्मश्री से सम्मानित किया था।  

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Varanasi: Sanskrit seeker Padmashree Vagish Shastri, merged in Panchatattva, bid farewell to Harishchandra Ghat with moist eyes
संस्कृत के विद्वान पद्मश्री वागीश शास्त्री - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

संस्कृत को पूरे विश्व में एक अलग पहचान दिलाने वाले पद्मश्री से सम्मानित महामहोपाध्याय डॉ. भागीरथ प्रसाद त्रिपाठी वागीश शास्त्री का अंतिम संस्कार बृहस्पतिवार को किया गया। हरिश्चंद्र घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनको अंतिम विदाई दी गई।

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उनके निधन की सूचना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत देश भर के राजनेताओं और गणमान्य लोगों ने सोशल मीडिया के जरिये श्रद्धासुमन अर्पित किए। बृहस्पतिवार को सुबह नौ बजे शिवाला स्थित आवास से डॉ. वागीश शास्त्री की अंतिम यात्रा निकाली गई।
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दाह संस्कार के पहले उनको गार्ड आफ ऑनर दिया गया। मुखाग्नि उनके पुत्र वाचस्पति शास्त्री ने दी। संस्कृत के साधक को अंतिम विदाई देते समय घाट पर मौजूद हर किसी की आंखें नम हो उठीं। इस दौरान उनके पुत्र वाशुतोष पति शास्त्री और अशापति शास्त्री, कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव, एसीपी भेलूपुर प्रवीण कुमार सिंह, इंस्पेक्टर भेलूपुर रमाकांत दुबे आदि मौजूद रहे।
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Varanasi: Sanskrit seeker Padmashree Vagish Shastri, merged in Panchatattva, bid farewell to Harishchandra Ghat with moist eyes
वाराणसी में बृहस्पतिवार को हरिशचन्द्र घाट पर पद्मश्री वागीश शास्त्री को राजकीय सम्मान गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया । - फोटो : अमर उजाला
संस्कृत के विद्वान तथा भाषाविद महामहोपाध्याय पद्मश्री भागीरथ प्रसाद त्रिपाठी वागीश शास्त्री (89) का बुधवार की देर रात निधन हो गया। वागीश शास्त्री के निधन की सूचना से संस्कृत जगत में शोक की लहर व्याप्त हो गई। निजी चिकित्सालय में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। बृहस्पतिवार को उनकी अंतिम यात्रा शिवाला स्थित आवास से निकलेगी। 

पद्मश्री वागीश शास्त्री के ज्येष्ठ पुत्र आशापति शास्त्री ने बताया कि पिताजी कई दिनों से बीमार चल रहे थे। सोमवार को उनकी हालत ज्यादा गंभीर हो गई थी तो चिकित्सकों ने उनको वेंटीलेटर पर रखा था।  मंगलवार को उनकी हालत में सुधार हो रहा था। बुधवार की देर शाम को फिर से अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और रात 10:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।

उनकी अंतिम यात्रा सुबह शिवाला स्थित आवास से हरिश्चंद्र घाट के लिए निकली। वह संस्कृत व्याकरणविद, भाषाविद, तंत्र और योग के ज्ञाता थे। 2018 में भारत सरकार ने उन्हें साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में पद्मश्री से सम्मानित किया था।  
वह संस्कृत व्याकरणविद, भाषाविद, तंत्र और योग के ज्ञाता थे। 2018 में भारत सरकार ने उन्हें साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में पद्मश्री से सम्मानित किया था।  
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