Varanasi News: शासन का आदेश नहीं माने लेखपाल, पंचायत सचिवालयों में लटके ताले; प्रधानों और ग्रामीणों में रोष
शासन के निर्देशों के बावजूद कई विकासखंडों के पंचायत सचिवालयों में लेखपाल नहीं पहुंचे, जिससे सचिवालयों पर ताले लटके रहे। इससे प्रमाण पत्र, दाखिल-खारिज और अन्य कार्यों के लिए पहुंचे ग्रामीणों को निराश लौटना पड़ा। प्रधानों और ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए शासन के आदेशों का पालन सुनिश्चित कराने की मांग की।
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प्रदेश सरकार के निर्देश के बावजूद जिले के अधिकांश ग्राम सचिवालयों में शनिवार को लेखपाल नहीं मिले। कई गांवों में सचिवालय खाली रहे। कुछ ग्राम पंचायतों में पंचायत सहायक या ग्राम पंचायत अधिकारी मौजूद मिले। ग्रामीणों और ग्राम प्रधानों का कहना है कि लेखपाल नियमित रूप से नहीं बैठते, जिससे छोटे-छोटे कामों के लिए भी लोगों को तहसील के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
काशी विद्यापीठ ब्लॉक के केराकतपुर की ग्राम प्रधान पुष्पा सिंह ने कहा कि लेखपाल अभी तक उनके गांव आए ही नहीं हैं, ऐसे में शिकायतों का निस्तारण कैसे होगा। लखमीपुर के प्रधान जंगबहादुर, धन्नीपुर के प्रधान फकीर अली और घमहापुर के प्रधान हंसराज साहनी ने बताया कि लेखपाल नियमित नहीं आ रहे हैं।
शनिवार को काशी विद्यापीठ ब्लॉक के केराकतपुर, महमूदपुर, लखमीपुर और घमहापुर ग्राम सचिवालयों में लेखपाल नहीं मिले।
पैमाइश करें या सचिवालय में बैठें
शनिवार को चौबेपुर क्षेत्र के अधिकांश ग्राम सचिवालयों में भी लेखपाल नहीं मिले। इस संबंध में जब लेखपालों से पूछा गया तो उनका कहना था कि पैमाइश और अन्य फील्ड कार्यों के कारण लगातार क्षेत्र में रहना पड़ता है। इसी तरह नियारडीह, रजलापुर, पुरेधूशाह, ताला, बेला, बन्तरी, भदवा, सुल्तानीपुर, हथियर और दाऊदपुर के स्थानीय लोगों ने भी बताया कि लेखपाल कभी-कभार ही आते हैं।
जिले में 1242 ग्राम पंचायतें, ग्राम सचिव सिर्फ 137 : जिले में 1242 ग्राम पंचायतें हैं, जबकि ग्राम सचिव सिर्फ 137 हैं। यानी एक ग्राम सचिव के जिम्मे औसतन नौ से अधिक ग्राम पंचायतें हैं। ऐसे में सचिव महीने भर में सभी गांवों तक नहीं पहुंच पाते। चोलापुर में उपेंद्र दीक्षित के पास 13 ग्राम पंचायतों का प्रभार है। निखिल पटेल के पास 9 ग्राम पंचायतें हैं। पिंडरा में किसलय शुक्ला के पास 7, सचिन त्रिपाठी के पास 11कार्यभार है।
दरेखू पंचायत सहायक मिलीं, लेखपाल नहीं
शनिवार को आराजी लाइन (रोहनिया) ब्लॉक के दरेखू ग्राम सचिवालय में पंचायत सहायक मौजूद थीं, लेकिन लेखपाल नहीं पहुंचे। शहावाबाद में टीकाकरण अभियान चल रहा था, वहां भी लेखपाल अनुपस्थित रहे। बसंतपट्टी के ग्राम प्रधान ने बताया कि लेखपाल एक जुलाई के बाद सचिवालय नहीं आए। वहीं, चिरईगांव ब्लॉक के जाल्हूपुर गांव में लेखपाल क्षेत्र में तो पहुंचे, लेकिन ग्राम सचिवालय नहीं गए।
अधिकतर ग्राम पंचायतों में लटके रहे ताले
सेवापुरी ब्लॉक के पूरे, चित्रसेनपुर और छतेरी ग्राम सचिवालयों में भी यही स्थिति रही। कहीं सचिवालय पर ताला लटका मिला तो कहीं पंचायत सहायक मौजूद रहे, लेकिन लेखपाल नहीं पहुंचे। ग्रामीणों ने बताया कि लेखपाल के बैठने का कोई निश्चित दिन तय नहीं है। इसी तरह खरगूपुर, रैसी रामपुर, ओदरारा और गोसाईपुर के ग्राम प्रधानों ने बताया कि लेखपाल केवल एक दिन सचिवालय पहुंचे।
सभी सचिव अपनी-अपनी ग्राम पंचायतों का कार्य ठीक से देख रहे हैं। सभी से बेहतर काम कराया जा रहा है। आगे और सचिव मिलेंगे तो तैनाती भी की जाएगी। - आलोक सिन्हा, डीपीआरओ
सचिव हों या प्रधान, यहां कोई रोजाना नहीं आता। फोन करके बुलाना पड़ता है। अभी लेखपालों के बैठने के निर्देश हुए हैं, लेकिन वे बैठ नहीं रहे हैं। - इम्तियाज हाशमी, महमूदपुर
अधिकतर ग्रामीण तो गांव के सचिव या लेखपाल को पहचानते तक नहीं हैं, क्योंकि वे आते ही नहीं। जन्म प्रमाणपत्र, मृत्यु प्रमाणपत्र समेत कई जरूरी काम अटके रहते हैं। - रोहित मिश्रा, भीमचंडी