दो ज्येष्ठ मास: एकादशी पर बाबा विश्वनाथ को लगेगा लंगड़ा आम का भोग, 30 दिन में पड़ेंगे 22 व्रत और त्योहार
निर्जला एकादशी पर बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक किया जाएगा। इस दिन बाबा को लंगड़ा आम का भोग लगाया जाएगा। वहीं 15 दिन के पुरुषोत्तम और 15 दिन के शुद्ध ज्येष्ठ में 22 व्रत और त्योहार पड़ेंगे।
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अधिकमास या पुरुषोत्तम मास और शुद्ध ज्येष्ठ मास के 15 दिन और बचे हैं। यानी पुरुषोत्तमी पूर्णिमा के बाद एक माह के दोनों पक्षों के व्रत व त्योहार शुरू हो जाएंगे। ज्येष्ठ मास के निर्जला एकादशी पर 25 जून को श्रीकाशी विश्वनाथ की जलाभिषेक की यात्रा निकाली जाएगी। भक्त बाबा का जलाभिषेक कर लंगड़ा आम का विशेष भोग लगाएंगे। वहीं, दक्षिण भारतीयों का तीन दिनी वट सावित्री व्रत शुरू हो जाएगा। बुधवार को नौतमा खत्म हो जाएगा।
नौ साल बाद अधिकमास ज्येष्ठ मास में पड़ा है। इसके चलते यह दो मास का है। इस मास की शुरुआत दो मई से शुरू हुई थी। जो शुद्ध ज्येष्ठ मास था। जबकि 17 मई से अधिकमास चल रहा है। पुरुषोत्तम और ज्येष्ठ मास के बचे कुल एक माह में भी तमाम व्रत और त्योहार हैं।
ज्येष्ठ मास की निर्जला एकादशी पर काशी में शिवालयों में जलाभिषेक व यात्राएं निकालने की परंपरा रही है। भक्त व्रत रखकर बाबा का जलाभिषेक करेंगे। मारवाड़ी, वैश्य समाज सहित तमाम संस्थाओं की ओर से गाजेबाजे के साथ शोभायात्राएं निकाली जाएंगी। दशाश्वमेध से बाबा धाम तक शहर की सबसे बड़ी जलयात्रा निकाली जाएगी।
इस मास में रोहिणी व्रत, महेश नवमी, मां गायत्री प्रकटोत्सव, संत कबीर प्राकट्योत्सव आदि व्रत-त्योहार मनाए जाएंगे। पिछले माह उत्तर भारतीयों का वट सावित्री व्रत खत्म हुआ है। अब 27 जून से यह तीन दिनों का व्रत शुरू होगा।
रंभा तीज व्रत, बड़ा महादेव पूजन व संत कबीर प्राकट्योत्सव
अधिकमास व ज्येष्ठ मास व्रत-त्योहारों की शुरुआत तीन जून यानी बुधवार से हो रही है। तीन जून को गणेश चतुर्थी व्रत, पांच को एकादशी पुरुषोत्तमी एकादशी, 12 को प्रदोष व्रत, 13 को शिव चतुर्दशी, 14 को पितरों के लिए श्राद्ध की अमावस्या, रोहिणी व्रत, 15 को सूर्य मिथुन संक्रांति (सूर्य का मिथुन राशि में प्रवेश), सोमवती अमावस्या व्रत, 16 को सौर आषाढ़ प्रारंभ, चंद्रदर्शन, शुद्ध ज्येष्ठ मास प्रारंभ, 17 जून रंभा तीज व्रत, छत्रसाल जयंती, 21 को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, 22 को मां धूमावती प्रकटोत्सव पर्व, 23 को महेश नवमी, 24 को मां गायत्री प्रकटोत्सव, 25 को भीमसेनी, निर्जला एकादशी व्रत, 27 जून शनि प्रदोष, वट सावित्री व्रतारंभ, बड़ा महादेव पूजन, शनि और शिव की पूजा, 29 जून वट सावित्री व्रत का पूर्णिमा दिवस (वट सावित्री पूर्णिमा), संत कबीर प्राकट्योत्सव मनाया जाएगा।