बिलासपुर-प्रदेश की कानून व्यवस्था और पुलिसिया कार्यप्रणाली को लेकर हाईकोर्ट ने सवाल उठाया है। कोर्ट में पेश आंकड़ों के मुताबिक राज्य में 1 लाख 47 हजार 714 मामले ऐसे हैं, जिनमें पुलिस की जांच तो पूरी हो चुकी है, लेकिन साल से उनकी क्लोजर रिपोर्ट (खात्मा/खारिजी रिपोर्ट) सक्षम अदालतों में पेश ही नहीं की गई है। इस पर हाई कोर्ट ने डीजीपी से जवाब मांगा है, और 22 जुलाई तक स्टेटस रिपोर्ट पेश करने कहा है। यह आदेश योगेंद्र बाबू शर्मा की ओर से दायर एक आपराधिक याचिका पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने जारी किया।
हाई कोर्ट के पिछले कड़े आदेशों के परिपालन में छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक ने कोर्ट में एक व्यक्तिगत हलफनामा पेश किया। डीजीपी ने स्वीकार किया कि राज्य के कई थानों में वर्षों से मामले लंबित पड़े हैं। डीजीपी ने कोर्ट को बताया कि लंबित मामलों का रिकार्ड इतना बड़ा और भारी-भरकम है कि उसे कागजों ने पर पेश करना मुश्किल था। इसलिए पुलिस मुख्यालय ने पूरे राज्य का डेटा एक पेन ड्राइव और बंद लिफाफे में 'ई-दस्तावेज के रूप में कोर्ट को सौंपा है। हलफनामे के अनुसार, इस डंप पड़े मामलों को लेकर डीजीपी 7 मई को सभी जिले के आईजी, एसपी की आपात ऑनलाइन बैठक लेकर इन मामलों के निराकरण के निर्देश दिए थे।
कोर्ट के रुख को देखते हुए डीजीपी ने बताया कि लंबित क्लोजर रिपोर्ट को अदालतों में जल्द से जल्द के दाखिल करने लिए पूरे प्रदेश में एक विशेष अभियान शुरू किया है। इसके तहत कड़े निर्देश भी जारी किए गए हैं। रायपुर पुलिस कमिश्नर, सभी रेंज के आइजी और जिलों के एसपी को अपने-अपने क्षेत्रों में एक ठोस कार्ययोजना बनाकर लंबित खात्मा मामलों को तेजी से निपटाने के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार बनाया गया है। सभी प्रभारियों को निर्देशित किया गया है कि जांच पूरी होते ही समय सीमा के भीतर चार्जशीट या क्लोजर रिपोर्ट संबंधित अदालतों में पेश की जाए और इसकी मानिटरिंग खुद एसपी करेंगे।
हाई कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा, पुलिस इन मामलों को साल से फाइलों को दबाकर बैठी है। 15 जून 2026 तक की स्थिति में राज्यभर में 1,47,714 मामलों की फाइलें बंद होने के इंतजार में एसपी और रेलवे एसपी के दफ्तरों में धूल खा रही हैं। कोर्ट ने साफ किया कि जांच पूरी होने के बाद भी क्लोजर रिपोर्ट न लगाना कानूनी प्रक्रिया में बड़ी सुस्ती को दर्शाता है। हाई कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी पूरी अपडेटेड प्रगति रिपोर्ट 22 जुलाई 2026 तक अनिवार्य रूप से कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने कहा है।