गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही थाना क्षेत्र में हुए सनसनीखेज अपहरण और फिरौती मामले का पुलिस ने महज तीन दिनों के भीतर खुलासा कर दिया है। पुलिस ने अपहृत गिरीश यादव को सकुशल ओडिशा से बरामद कर लिया है तथा इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। साथ ही पुलिस ने एक पिस्टल, जिंदा कारतूस और आरोपियों के मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। घटना में शामिल अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है।
पूरा मामला मरवाही थाना क्षेत्र के ग्राम उषाढ़ निवासी गिरीश यादव (41) से जुड़ा है। 20 जून 2026 की सुबह करीब 11 बजे उसका घर से पिस्टल की नोक पर अपहरण कर लिया गया था। दो अज्ञात आरोपी उसे जबरन एक कार में बैठाकर अपने साथ ले गए थे। घटना के बाद पीड़ित की पत्नी ने मरवाही थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई, जिस पर पुलिस ने अपहरण, धमकी और आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज रामगोपाल गर्ग के निर्देशन तथा पुलिस अधीक्षक मनोज खिलारी के मार्गदर्शन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अविनाश कुमार मिश्रा के नेतृत्व में जिला साइबर सेल और मरवाही पुलिस की संयुक्त टीम गठित की गई। जांच के दौरान अपहृत के घर में छूटे मोबाइल फोन पर आरोपियों ने कॉल कर गिरीश यादव की रिहाई के बदले 20 लाख रुपये की फिरौती मांगी। साथ ही रकम नहीं देने पर उसे जान से मारने की धमकी भी दी गई।
पुलिस ने मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड, टावर लोकेशन, डिजिटल ट्रैकिंग और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की लोकेशन का पता लगाया। अंतरराज्यीय स्तर पर कार्रवाई करते हुए विभिन्न राज्यों में पुलिस टीमें भेजी गईं। लगातार तकनीकी निगरानी और समन्वित प्रयासों के बाद पुलिस ने अपहृत गिरीश यादव को ओडिशा के कोरापुट से सुरक्षित बरामद कर लिया तथा तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान महाराष्ट्र के लातूर निवासी पुंडलिक केंद्रे, राजस्थान के जोधपुर निवासी चंद्रशेखर तथा उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद निवासी शेषपाल सिंह के रूप में हुई है। आरोपियों के कब्जे से एक पिस्टल, छह जिंदा कारतूस, छह एंड्रॉयड मोबाइल फोन तथा पुलिस लिखी प्लेट और नीली बत्ती लगी स्कॉर्पियो-एन वाहन बरामद किया गया है।
पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर मामले की विस्तृत जांच में जुटी हुई है। मामले में कुछ अन्य आरोपियों के शामिल होने और फरार होने की बात भी सामने आई है, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम लगातार प्रयास कर रही है। पकड़े गए आरोपियों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड भी पुलिस को मिले हैं। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि गिरीश यादव गांजा कारोबार से जुड़ा हुआ था और पैसों के लेनदेन को लेकर उसका अपहरण किया गया था।