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Janjgir-Champa News: पीएम आवास योजना में कथित फर्जीवाड़े की जांच तेज, नेता प्रतिपक्ष ने सौंपे सबूत
अमर उजाला नेटवर्क, जांजगीर चांपा Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 13 Jun 2026 10:43 PM IST
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(सक्ती)। नगर पंचायत बाराद्वार में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत स्वीकृत आवासों में कथित अनियमितताओं और भूमि रिकॉर्ड में कूट रचना के आरोपों को लेकर विवाद गहरा गया है। शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस बीच नगर पंचायत अध्यक्ष के बयान और शिकायतकर्ता द्वारा जांच अधिकारियों को दस्तावेज सौंपे जाने के बाद मामला और चर्चा में आ गया है।
शिकायत के अनुसार नगर पंचायत क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 288 आवासों की स्वीकृति प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि इनमें से बड़ी संख्या में आवास आबादी भूमि और घास मद की भूमि पर प्रस्तावित किए गए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि घास मद की भूमि पर आवास निर्माण की अनुमति नहीं है, इसके बावजूद संबंधित भूमि को आबादी भूमि दर्शाकर दस्तावेज तैयार किए गए और स्वीकृति के लिए भेजे गए।
मामले में नेता प्रतिपक्ष अभिषेक राय ने आरोप लगाया है कि भूमि अभिलेखों में कथित हेरफेर कर पात्रता संबंधी दस्तावेज तैयार किए गए। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उपलब्ध भूमि रिकॉर्ड, दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जांच अधिकारियों को सौंप दिए गए हैं। उनका कहना है कि अब जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।
इधर नगर पंचायत अध्यक्ष नारायण कुर्रे ने मीडिया से चर्चा के दौरान कहा कि जिन स्थानों को लेकर विवाद सामने आ रहा है, वहां कई परिवार वर्षों से निवास कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व में भी आबादी भूमि की खरीद-बिक्री और कब्जे के मामले सामने आते रहे हैं, जिनकी जांच होनी चाहिए। अध्यक्ष के इस बयान के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए हैं।
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि शिकायत नहीं होती तो क्या कथित रूप से गलत दस्तावेजों के आधार पर आवास स्वीकृति की प्रक्रिया आगे बढ़ जाती। वहीं प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि जांच के दौरान यदि किसी हितग्राही या दस्तावेज में अनियमितता पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
नगर पंचायत के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) ने बताया कि शिकायत प्राप्त होने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है। चूंकि यह विषय राजस्व अभिलेखों से भी जुड़ा हुआ है, इसलिए जिला स्तर पर गठित जांच दल सभी दस्तावेजों और तथ्यों की पड़ताल कर रहा है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल पूरे मामले में प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों की निगाहें जांच टीम की रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।
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