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नेशनल स्पेस डे पर 'स्पेस ऑन व्हील्स' प्रदर्शनी, डिप्टी सीएम बोले-वैज्ञानिक सोच विकसित करना जरूरी
भारत की अंतरिक्ष विज्ञान में उपलब्धियों को विद्यार्थियों से जोड़ने के उद्देश्य से नेशनल स्पेस डे 2025 के अवसर पर आज बुधवार को पीजी कॉलेज कवर्धा में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यहां स्पेस ऑन व्हील्स प्रदर्शनी व इसरो वैज्ञानिकों से विद्यार्थियों को संवाद का अवसर मिला है। स्पेस ऑन व्हील्स आकर्षक का केंद्र रहा। विद्यार्थियों ने इसका अवलोकन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने किया। कार्यकम में इसरो के वैज्ञानिक डॉ. आनंद अरूर, जुगल किशोर मणि, अरुण एस सूर्यवंशी, पी काश्वेर, डॉ.अमित दुबे, डॉ.अखिलेश त्रिपाठी आमंत्रित थे। इस मौके पर डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि विज्ञान हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा है। विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करना समय की मांग है। विज्ञान का सही आशय केवल जिज्ञासा को शांत करना नहीं है, बल्कि खोज, अनुसंधान और जिज्ञासा को और अधिक प्रोत्साहित करना है।भारतीय समाज व मानव सभ्यता में विज्ञान केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, परंपरा और जीवन शैली में गहराई से रचा-बसा है। हमारी दैनिक दिनचर्या, खान-पान, रहन-सहन व पूजा-पद्धति में विज्ञान की गूंज स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि विदेशों में भले ही भोजन की प्रस्तुति व बर्तनों पर अधिक ध्यान दिया जाता हो,लेकिन वहां स्वच्छता और पोषण पर वह वैज्ञानिक दृष्टिकोण नहीं दिखता जो भारतीय परंपरा में सहज रूप से विद्यमान है। आज हमें आवश्यकता है अपनी परंपरागत वैज्ञानिक विरासत को समझने, उसमें नवाचार जोड़ने और आगे बढ़ाने की। यही सोच भारत को आत्मनिर्भर, नवाचारशील और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में ले जा सकती है। कार्यक्रम में आमंत्रित इसरो के वैज्ञानिकों ने विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्हें भारतीय अंतरिक्ष मिशनों की जमीनी सच्चाइयों, वैज्ञानिक संघर्षों और उपलब्धि की गहराई से जानकारी दी। वैज्ञानिकों ने बच्चों का मनोबल भी बढ़ाया। वैज्ञानिक डॉ. आनंद अरूर ने कहा कि भारत अब तकनीक में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है। चंद्रयान-3 और गगनयान जैसे मिशन इस बात का प्रमाण हैं कि अब हम अनुसरण नहीं कर रहे, बल्कि नवाचार गढ़ रहे हैं। आपमें से ही कोई विद्यार्थी भविष्य में इसरो के मिशन डायरेक्टर के रूप में काम करेगा। आज आप जो प्रश्न पूछते हैं, वही कल आपको नई खोजों की ओर ले जाएंगे। इसलिए सोचिए, संकोच मत करिए और कभी सपने देखना मत छोड़िए।
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