खैरागढ़ छुईखदान गंड़ई जिले में पुलिस ने ऑनलाइन सट्टा ऐप के एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह मामला 'शिवा बुक' नामक ऑनलाइन सट्टा ऐप से जुड़ा है, जिसे आरोपियों ने '100 प्लेयर' और 'फेयर प्ले गेम' जैसे नामों से बदलकर संचालित किया जा रहा था। पुलिस ने इस गिरोह के पांच सदस्यों को गुरुग्राम से गिरफ्तार किया है। यह घटना डिजिटल युग में बढ़ते अपराधों और उनसे निपटने की चुनौती को दर्शाती है।
'शिवा बुक' जैसे ऑनलाइन सट्टा ऐप, अपराध के बदलते स्वरूप का एक चिंताजनक उदाहरण हैं। ये ऐप छोटे दांव से शुरू होकर करोड़ों रुपये के अवैध लेनदेन को डिजिटल माध्यम से संचालित करते हैं। ऑनलाइन सट्टा, पारंपरिक जुए का ही आधुनिक रूप है, जहाँ मोबाइल ऐप और वेबसाइट मैदान, फड़ या बुक्की की जगह ले चुके हैं। ऐसे ऐप अक्सर वैध ऑनलाइन गेम या स्पोर्ट्स प्लेटफॉर्म का भेष धरते हैं, ताकि लोगों को क्रिकेट, फुटबॉल, कैसीनो या कार्ड गेम पर पैसे लगवाने के लिए आकर्षित किया जा सके। ये गिरोह व्हाट्सऐप, टेलीग्राम, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए संपर्क स्थापित करते हैं।

'शिवा बुक' जैसे ऐप एक नाम से अधिक समय तक सक्रिय नहीं रहते। पुलिस या साइबर एजेंसियों की नजर पड़ते ही इन्हें बंद कर दिया जाता है और नया नाम व पैनल शुरू कर दिया जाता है, जैसे '100 पैनल' या 'फेयर प्ले'। सर्वर, डोमेन और लॉगिन सिस्टम को विदेश या अन्य राज्यों में शिफ्ट कर दिया जाता है, ताकि जांच एजेंसियों को भ्रमित किया जा सके। खैरागढ़ प्रकरण में सामने आए 8 से 10 करोड़ रुपये के लेनदेन का आंकड़ा, इस डिजिटल मनी ट्रेल की गंभीरता को उजागर करता है। लैपटॉप, मल्टी सिम, हाई-स्पीड वाई-फाई, वीपीएन और क्लाउड सर्वर इस नेटवर्क के प्रमुख औजार हैं। एक कमरे में बैठा व्यक्ति देश भर में फैले हजारों उपयोगकर्ताओं से जुड़ा रहता है। यही कारण है कि ऑनलाइन सट्टा अब केवल स्थानीय अपराध न रहकर, अंतरराज्यीय और साइबर क्राइम का एक बड़ा चेहरा बन चुका है।
छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम 2022, आईटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं के तहत ऑनलाइन सट्टा एक गंभीर अपराध है। इसमें आर्थिक धोखाधड़ी, साइबर फ्रॉड और संगठित अपराध की श्रेणी में कार्रवाई होती है। कानून में खातों को सीज करने, डिजिटल उपकरणों को जब्त करने और लंबी सजा का प्रावधान है। ऑनलाइन सट्टा न केवल लोगों का पैसा छीनता है, बल्कि परिवार, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक ताने-बाने को भी तोड़ता है। आसान कमाई के लालच में युवा वर्ग इसका सबसे बड़ा शिकार बन रहा है, जिससे कर्ज, अपराध और आत्मघाती कदम उठाने तक की नौबत आ जाती है। गुरुग्राम में की गई यह कार्रवाई स्पष्ट करती है कि ऑनलाइन सट्टा चलाने वाले अब दूरी या तकनीक के सहारे बच नहीं सकते। पुलिस भी डिजिटल अपराधों से निपटने के लिए तकनीकी रूप से मजबूत हो रही है और ऐसे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की दिशा में अग्रसर है।

छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम 2022, आईटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं के तहत ऑनलाइन सट्टा एक गंभीर अपराध है। इसमें आर्थिक धोखाधड़ी, साइबर फ्रॉड और संगठित अपराध की श्रेणी में कार्रवाई होती है। कानून में खातों को सीज करने, डिजिटल उपकरणों को जब्त करने और लंबी सजा का प्रावधान है। ऑनलाइन सट्टा न केवल लोगों का पैसा छीनता है, बल्कि परिवार, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक ताने-बाने को भी तोड़ता है। आसान कमाई के लालच में युवा वर्ग इसका सबसे बड़ा शिकार बन रहा है, जिससे कर्ज, अपराध और आत्मघाती कदम उठाने तक की नौबत आ जाती है। गुरुग्राम में की गई यह कार्रवाई स्पष्ट करती है कि ऑनलाइन सट्टा चलाने वाले अब दूरी या तकनीक के सहारे बच नहीं सकते। पुलिस भी डिजिटल अपराधों से निपटने के लिए तकनीकी रूप से मजबूत हो रही है और ऐसे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की दिशा में अग्रसर है।