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crackdown on the growing obscenity and 'gun culture' in Haryanvi songs is essential; the government must establish a monitoring mechanism
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हरियाणवी गीतों में बढ़ती अश्लीलता और गन कल्चर पर रोक जरूरी, सरकार बनाए निगरानी तंत्र
सामाजिक संस्था जागो ने हरियाणवी गीतों में बढ़ती अश्लीलता, बदमाशी, जातीय उन्माद और गन कल्चर को लेकर गंभीर चिंता जताई है। रविवार दोपहर को संस्था की बैठक आयोजित की गई। जिसमें संस्था के पदाधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान संस्था के प्रधान देवेंद्र दहिया ने कहा कि विगत कुछ वर्षों से कुछ कलाकार नेम व फेम के साथ आर्थिक लाभ के लिए गीतों में अश्लील शब्दों, हिंसा और अपराध को बढ़ावा दे रहे हैं, जो समाज और विशेष रूप से युवा पीढ़ी के लिए बेहद हानिकारक है।
उन्होंने कहा कि कई गीतों में बदमाशों को हथियारों के साथ महिमामंडित करते हुए दिखाया जाता है और गन कल्चर को बढ़ावा दिया जा रहा है। इतना ही नहीं, कुछ गीतों में अपराधियों को पुलिस थानों और यहां तक कि अदालतों में भी रौब झाड़ते हुए दिखाया जाता है। इससे सरकारी संस्थाओं और अधिकारियों की गरिमा को ठेस पहुंचती है तथा कानून व्यवस्था की छवि भी प्रभावित होती है। ऐसे दृश्य युवाओं को गलत संदेश देते हैं और उनमें अपराधी प्रवृत्ति के प्रति आकर्षण बढ़ाते हैं। सदस्य सेवासिंह मुवाल ने कहा कि कहा कि हरियाणा की पहचान समृद्ध लोक संस्कृति, रागनियों और संस्कारों से रही है, लेकिन कुछ गीत इस सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने हरियाणा सरकार से मांग की कि प्रदेश में प्रसारित होने वाले गीतों और वीडियो गीतों की निगरानी के लिए एक प्रभावी सेंसर बोर्ड की तरह निगरानी तंत्र बनाया जाए, ताकि अश्लील और समाज विरोधी सामग्री पर रोक लगाई जा सके।
पिछले दिनों ही एक बड़े कलाकार ने स्कूली छात्राओं के लिए अपने गाने में अश्लील शब्द प्रयोग किए। यह सब इसलिए हुआ कि गाने रिलीज से पहले कोई जांच पड़ताल नहीं होती। जिसका जो दिल में आया वह सामाजिक मर्यादाओं को तार-तार करते हुए गाने बना देता है। बैठक में सेवा सिंह मुवाल, अधिवक्ता प्रदीप जांगड़ा, प्रीतम फुटेला, भारत गोयल, राजेंद्र ठाकुर, आशु चुघ, रविन्द्र गढ़वाल, प्रमोद बजाज, मिथलेश रोहिल्ला, विनोद शर्मा व ब्राइट गोदारा मौजूद रहे।
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