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People came out on the streets in Hisar in support of the police, demanding that false cases be dismissed
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हिसार में पुलिस के समर्थन में सड़कों पर उतरे लोग, दर्ज झूठे केस खारिज करने की मांग
रिटायर्ड पुलिस कर्मचारी संगठन तथा सामाजिक संगठनों की बैठक वीरवार को क्रांतिमान पार्क में हुई। जिसमें संगठनों ने पुलिस कर्मियों पर राजनीतिक दबाव में दर्ज किए गए केस को लेकर रोष जताते हुए विरोध मार्च निकाला।क्रांतिमान पार्क से लघु सचिवालय तक पैदल मार्च निकालते हुए पुलिस कर्मचारी जिंदाबाद के नारे भी लगाए। संगठनों के सदस्यों ने कहा कि इस तरह से पुलिस कर्मियों को प्रताड़ना का शिकार बनाना बंद किया जाए। पुलिस कर्मियों पर दर्ज किए गए झूठे केस को वापस लिया जाए।
रिटायर्ड पुलिस कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष महेंद्र सिंह स्याहड़वा ने कहा कि हिसार में पुलिस कर्मियों पर झूठा केस दर्ज किया गया है। जिन लोगों ने पुलिस कर्मियों पर बरछे से हमला कर हत्या का प्रयास किया उन लोगों की शिकायत पर पुलिस पर ही केस दर्ज किया जा रहा है। राजनीतिक कारणों के चलते इस तरह के फैसले लिए गए।
इस फैसले से पुलिस में जबरदस्त आक्रोश है। जिन पुलिस कर्मियों को बहादुरी से डयूटी के लिए सम्मानित किया जाना चाहिए उन पर हत्या का केस दर्ज किया जा रहा है। जिन लोगों ने पुलिस पर हमला किया उसमें कई हिस्ट्रीशीटर हैं। जिन पर 15-15 केस दर्ज हैं। पुलिस पर हमला किए जाने के सीसीटीवी फुटेज भी हैं। इसके बाद भी पुलिस कर्मियों पर केस दर्ज किया गया।
यह था मामला
7 जुलाई को हिसार के बारह क्वार्टर एरिया में गली में म्यूजिक सिस्टम रख कर पार्टी की जा रही थी। जिसको बंद कराने पहुंचे पुलिस कर्मियों के साथ कुछ लोगों ने मारपीट की। बाद में बड़ी संख्या में पहुंची पुलिस ने हमलावरों को खदेड़ा तो भगदड़ में दो युवक छत से कूद गए।
जिसमें एक की मौत हो गई तथा दूसरा घायल हो गया। युवक के परिजनों ने पुलिस पर लाठी मार कर छत से गिरा कर हत्या करने का आरोप लगाया। परिजनों के समर्थन में अनुसूचित जाति संगठनों के सदस्य भी आए। नागरिक अस्पताल में 10 दिन तक धरना दिया। सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्री की अध्यक्षता में परिजन सीएम से मिले। जिसके बाद पुलिस कर्मियों पर हत्या, छेड़छाड़ सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया।
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