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Rakhi Garhi village in Hisar has been included in the list of 15 iconic archaeological sites, and will see rapid development
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हिसार का गांव राखीगढ़ी 15 आइकॉनिक पुरातात्विक स्थलों की सूची में शामिल, तेजी से होगा विकास
एतिहासिक स्थल राखीगढ़ी को 15 आइकॉनिक पुरातात्विक स्थलों की सूची में शामिल करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की घोषणा की गई है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में बजट पेश करते हुए इसकी घोषणा की। केंद्रीय बजट में राखीगढ़ी के नाम का उल्लेख होने से क्षेत्रवासियों को इसके तेजी से विकास की उम्मीद बनी है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि राखीगढ़ी में टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए यहां पाथ-वे बनाया जाएगा। इसके अलावा सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को लोगों तक पहुंचाने के लिए यहां कल्चरल कार्यक्रम किए जाएंगे। इस पहल से दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक सिंधु घाटी के इस केंद्र को अब इंटरनेशनल टूरिज्य में सेक्टर में एक पहचान मिलने की उम्मीद है। केंद्रीय बजट 2025-26 में राखीगढ़ी को वैश्विक धरोहर केंद्र में बदलने के लिए 500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे।
नारनौंद उपमंडल के राखीगढ़ी में 6 हजार साल पुरानी हड़प्पाकालीन सभ्यता के प्रमाण मिले हैं। यहां से एक साथ 60 कंकाल मिल चुके हैं। खोदाई के दौरान महिलाओं के आभूषण , मिट्टी - पत्थरों पर लिखी पुरानी लिपि , पानी का ड्रेनेज सिस्टम भी मिल चुका है। यहां पर 9 टीले 550 हेक्टेयर एरिया में फैले हुए हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग दिल्ली की टीम यहां लगातार काम कर रही है।
राखीगढ़ी को हड़प्पाकालीन सभ्यता की सबसे बड़ी साइट माना जाता है। पुरातत्व विभाग ने अब तक 5 टीलों की जमीन को एक्वायर किया है। माना जा रहा है कि यह सभ्यता सरस्वती नदी के किनारे बसी थी।
सरस्वती नदी की सहायक नदी दृष्टवती यहां से बहती थी। करीब 28 साल पहले एएसआई ने यहां खोदाई का फैसला लिया। 1997-98 में अमरेंद्र नाथ की अगुआई में राखीगढ़ी में टीले नंबर 6 और 7 की खुदाई की गई। टीले नंबर 7 से तब एक मानव कंकाल मिला था। यह कंकाल अब दिल्ली स्थित नेशनल म्यूजियम में रखा हुआ है।
राखीगढ़ी में दूसरी बार डेक्कन यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर वसंत सिंधे की निगरानी में चली खोदाई में 6-7 नंबर टीले के साथ 1-2 की भी खुदाई की थी। जिसमें करीब 60 कंकाल मिले थे। जिनके डीएनए से अनुमान लगा कि यह सभ्यता करीब साढ़े 5 हजार वर्ष पुरानी है। इसमें सूखी नदी, बर्तन, कुएं आदि भी मिले।
इसके बाद 2023-24 में खुदाई का काम एएसआई ने अपने हाथ में ले लिया। एएसआई के अपर महानिदेशक डॉ. संजय कुमार मंजुल की अगुआई में खुदाई हुई तो इस टीले पर 6 हजार वर्ष पुरानी मकान की दीवार, शंख की चूड़ी, कच्ची ईंटें, तांबा, मनके, मोहरें मिलीं थीं।
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