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Shyam is black and Radha is fair, how will the pair be formed… Radha and Krishna are two forms of the same soul: Saint Gaurdas
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श्याम कारे-कारे राधा गोरी-गोरी, कैसे बनेगी जोड़ी... राधा और कृष्ण एक ही आत्मा के दो रूप: संत गौरदास
अग्रसेन भवन में भक्तमाल कथा के 11वें और अंतिम दिन राष्ट्रीय संत गौरदास महाराज ने राधा-कृष्ण के विवाह का वर्णन किया। संत गौरदास ने बताया कि राधा और कृष्ण को एक ही आत्मा के दो रूप माने जाते हैं। राधा का विवाह भगवान श्रीकृष्ण के साथ वृंदावन के भांडीरवन में ब्रह्मा की उपस्थिति में हुआ था। मथुरा से करीब 25 किमी दूर भांडीरवन में आज भी वह स्थान मौजूद है, जहां ब्रह्माजी ने विवाह कराया था। यहां के मंदिर में कृष्ण, राधा और ब्रह्माजी की मूर्तियां स्थापित हैं। भक्तमाल कथा के विश्राम दिवस पर संत गौरदास महाराज ने बताया कि हम सबको राधा रानी और श्याम सुंदर दोनों का एक साथ भजन एवं पूजा करनी चाहिए। चैतन्य महाप्रभु ने भी पहले राधा विरह एवं राधा प्रेम का आनंद स्वयं लिया। फिर अपने साथियों के माध्यम से राधा कृष्ण की वह गुप्त लीलाएं, जो धरा पर उपलब्ध नहीं थी, से सब भक्तों को अवगत करवाया। संत गौरदास ने राधा-कृष्ण प्रेम सहज और सुलभता से प्रदान कर दिया। राधा-कृष्ण विवाह प्रसंग के दौरान झांकी निकाली गई। विवाह में बाल-गोपालों ने श्रीकृष्ण की बरात में भाग लिया। राधा की सखियों के रूप में अनेक महिलाओं ने सज संवर कर वधू पक्ष की भूमिका निभाई। स्वयं संत गौरदास महाराज ने विवाह की रस्में पूरी करवाईं। पूरा पंडाल विवाह के मंगल भजनों पर झूम उठा। गायकों ने श्याम मेरो चंदा चकोरी श्यामा प्यारी..., हमारो धन राधा श्रीराधा-श्रीराधा..., राधा सब वेदन को सार जपे जा राधे-राधे..., श्याम कारे-कारे राधा गोरी-गोरी, कैसे बनेगी जोड़ी..., मेरे मोहन के माथे पर सजा सेहरा सलोना लगता है..., देखो घोड़ी खड़ी नंद द्वार... आदि भजन गाए तो श्रद्धालु आनंदित हो उठे। कथा के विश्राम होने पर भंडारा चलाया गया। इसमें हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
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