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There was a demand for Hansi bicycles in states such as Haryana, Rajasthan, Karnataka, Andhra Pradesh, and Goa; the industry is concerned due to the decline in demand.
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हरियाणा, राजथान, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश और गोवा जैसे राज्यों में थी हांसी की साइकिल की डिमांड, मांग घटने से बढ़ी उद्योग की चिंता
हांसी का साइकिल उद्योग हरियाणा एवं राजस्थान में एक बड़े ब्रांड के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। भारतीय साइकिल उद्योग इस समय मंदी के दौर से गुजर रहा है। कोरोना महामारी के दौरान साइकिलों की मांग में अचानक आई तेजी के चलते कंपनियों ने बड़े पैमाने पर उत्पादन किया था, लेकिन अब मांग में पहले से गिरावट आने से उद्योग के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। हांसी के साइकिल उद्योग में हर पार्ट उद्योग तैयार किया जाता हैं। पूरे भारत की बात की जाए तो कोरोना के समय 2 लाख साइकिल हर महीने बिक रही थी। अब इसकी डिमांड आधी हो गई है।
आपको बता दे कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा साइकिल उत्पादक देश है। देश में हर साल लगभग 5 करोड़ साइकिलों का उत्पादन होता है, जबकि चीन करीब 22 करोड़ साइकिलें बनाकर दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक बना हुआ है। विशेष रूप से यूरोपीय बाजार में, जहां कभी भारतीय साइकिल निर्माताओं की अच्छी हिस्सेदारी थी, वहां अब चीनी कंपनियों का वर्चस्व बढ़ गया है। कम लागत, बड़े पैमाने पर उत्पादन और मजबूत सप्लाई चेन के कारण चीन ने यूरोप सहित कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि मांग में कमी, बढ़ती इन्वेंट्री और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के कारण भारतीय साइकिल उद्योग पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में निर्यात बढ़ाने, नई तकनीक अपनाने और घरेलू बाजार में मांग को प्रोत्साहित करने की दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
हांसी के साइकिल उद्योग मालिक के अनुसार उन्होंने करियर की शुरुआत एटलस साइकिल में वेंडर के रूप में काम करके की थी। लेकिन जब एटलस साइकिल का संचालन बंद हुआ, तब हमने हिम्मत नहीं हारी और अपना स्वयं का उद्योग स्थापित किया। पिछले लगभग 40 वर्षों से हम लगातार साइकिल निर्माण के क्षेत्र में काम कर रहे हैं।
साइकिल उद्योग मालिक कमलेश गर्ग का कहना है कि एक समय था जब भारत में साइकिल आम आदमी की पहचान थी। बच्चे रोज़ साइकिल से स्कूल जाते थे और बड़े भी अपने दैनिक कामों के लिए इसका इस्तेमाल करते थे। लेकिन समय के साथ लोगों में साइकिल चलाने का चलन कम होता गया। अब ज्यादातर लोग साइकिल को जरूरत से ज्यादा शौक या फिटनेस के लिए चलाते हैं।
आजकल रेंजर साइकिलों का क्रेज बच्चों और युवाओं के बीच तेजी से बढ़ा है। गियर, डिस्क ब्रेक, सस्पेंशन और कई आधुनिक फीचर्स के कारण ये साइकिलें आकर्षक तो हैं, लेकिन इन्हीं फीचर्स की वजह से इनकी कीमत भी पहले की तुलना में काफी बढ़ गई है। साइकिल का उपयोग कम होने की एक बड़ी वजह सुरक्षित साइकिल ट्रैक का अभाव भी है।
उन्होंने बताया कि अधिकांश शहरों में साइकिल के लिए अलग लेन नहीं है। भारी ट्रैफिक के कारण बच्चे और आम लोग सड़क पर सुरक्षित तरीके से साइकिल नहीं चला पाते। ऐसे में अभिभावक भी बच्चों को साइकिल लेकर बाहर भेजने से कतराते हैं।
सरकार और प्रशासन से अपील है कि शहरों और कस्बों में अलग से साइकिल ट्रैक बनाए जाएं। इससे लोगों का साइकिल चलाने का उत्साह बढ़ेगा, सड़क दुर्घटनाओं का खतरा कम होगा, पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा।
हरियाणा में हमारा उद्योग प्रमुख साइकिल निर्माताओं में शामिल है। इसके साथ ही हम कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और गोवा जैसे राज्यों में भी अपनी साइकिलों की सप्लाई कर रहे हैं। अब हमारी योजना अंतरराष्ट्रीय बाजार में कदम रखने की है औकी र जल्द ही ईस्ट अफ्रीका में भी अपना कारोबार शुरू करने जा रहे हैं।
लोहे के पार्ट निर्माता कुर्बान ने बताया कि वह कई वर्षों से साइकिल उद्योग से जुड़े हुए हैं। उनके यहां साइकिल में इस्तेमाल होने वाले लोहे के सभी पार्ट तैयार करते हैं। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता और मजबूती का विशेष ध्यान रखा जाता है, ताकि तैयार किए गए पार्ट लंबे समय तक टिकाऊ रहें। उनके अनुसार, स्थानीय स्तर पर पार्ट्स का निर्माण होने से साइकिल उद्योग को मजबूती मिलती है।
हम 2,000 से लेकर 10,000 तक की साइकिलें तैयार करते हैं। आजकल 5,000 रुपए तक की रेंजर साइकिलों की सबसे अधिक मांग देखने को मिल रही है। आधुनिक फीचर्स और आकर्षक डिजाइन के कारण बच्चों और युवाओं में रेंजर साइकिल का क्रेज लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि आज अगर सुरक्षित माहौल मिलेगा। ओर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हों, तो हर बच्चा और हर नागरिक अपने जीवन में फिर से साइकिल चलाने की आदत अपना सकता है।
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