{"_id":"69a679448305f32ef603b085","slug":"video-vegetables-grown-on-the-rooftop-using-kitchen-waste-2026-03-03","type":"video","status":"publish","title_hn":"हिसार: रसोई के कचरे से छत पर उगाई सब्जियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छोटी-सी सोच और थोड़ा-सा प्रयास किसी भी घर को हरा-भरा बना सकता है। रसोई का कचरा भी सही उपयोग हो तो वही पौष्टिक सब्जियों की खाद बन जाता है। इसी सोच के साथ सेक्टर-14 की अन्नू सूरा ढींगड़ा पिछले 13 वर्षों से अपने घर की छत पर ऑर्गेनिक सब्जियां उगा रही हैं। उन्होंने 100 से अधिक पौधे लगाए हुए हैं और ‘हरी भरी वसुंधरा’ से जुड़ी हुई हैं। ऑर्गेनिक खेती के लिए अन्य महिलाओं को भी जागरूक कर रही हैं। अन्नू घर के किचन वेस्ट से कम्पोस्ट तैयार करती हैं और उसी जैविक खाद से गोभी, काली गाजर, चुकंदर, टमाटर, करेला, घीया और तोरी जैसी सब्जियां उगाती हैं। हर घर यदि यह पहल करे तो स्वच्छता और सेहत दोनों बेहतर हो सकती हैं।
अनु ने बताया कि मैं पिछले 13 वर्षों से अपने घर की छत पर ऑर्गेनिक सब्जियां उगा रही हूं। अब तक 100 से अधिक पौधे लगा चुकी हूं और ‘हरी भरी वसुंधरा’ से जुड़कर पर्यावरण संरक्षण और जैविक खेती के प्रति लोगों को जागरूक भी कर रही हूं। मेरी सोच सरल है: रसोई का कचरा कूड़े में क्यों जाए, जब वही हमारी सब्जियों की खाद बन सकता है। मैं घर के किचन वेस्ट को अलग इकट्ठा करती हूं और उससे कम्पोस्ट तैयार करती हूं। कुछ कचरा ऐसा होता है जिसे फेंकना पड़ता है, लेकिन अधिकांश जैविक कचरे को घर पर ही खाद में बदला जा सकता है। इससे न केवल घर का कचरा कम होता है, बल्कि हमें शुद्ध और सुरक्षित सब्जियां भी मिलती हैं।
मेरी छत आज एक छोटे से किचन गार्डन में बदल चुकी है। सर्दियों में मैंने सलाद वाली गोभी उगाई थी, जिसमें अब बीज बनने लगे हैं। गमलों में काली गाजर लगाई, जो बाजार में आसानी से नहीं मिलती और पोषक तत्वों से भरपूर होती है। इसके अलावा चुकंदर, टमाटर और अन्य मौसमी सब्जियां भी उगाईं। हर गमले में सजावटी पौधों के साथ टमाटर लगाया था।
मौसम बदलते ही मैं गर्मियों की तैयारी शुरू कर देती हूं। मैंने देसी करेला बो दिया है, जो ग्रिल पर फैलकर अच्छी पैदावार देगा। 16 से 18 इंच की पुरानी बाल्टियों में कम्पोस्ट और मिट्टी मिलाकर घीया और तोरी के बीज लगाए हैं। एक बाल्टी में एक बेल आराम से चल जाती है। छोटे डिब्बों और कनस्तरों का भी उपयोग करती हूं, ताकि बेकार चीजें भी काम आ सकें।
मैंने बैंगन के बीज भी डाले हैं, क्योंकि बाजार में बैंगन पर सबसे ज्यादा कीटनाशकों का छिड़काव किया जाता है। इसलिए मैं कोशिश करती हूं कि जो सब्जियां ज्यादा रसायनयुक्त होती हैं, उन्हें घर पर जैविक तरीके से उगाऊं। मैं अन्य महिलाओं और किसानों को भी प्रेरित करती हूं कि वे अपने घर या खेत के एक छोटे हिस्से में ऑर्गेनिक खेती जरूर शुरू करें। देसी बीज अपनाएं और कीटनाशकों का उपयोग कम करें। अगर हर घर अपनी छत या आंगन का थोड़ा-सा हिस्सा हरा-भरा कर ले, तो शहर भी स्वच्छ रहेगा और परिवार भी स्वस्थ रहेगा।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम वीडियो सिर्फ सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है
प्रीमियम वीडियो
सभी विशेष आलेख
फ्री इ-पेपर
सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।