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झज्जर में फैशन डिजाइनर और शोधार्थी बहनें चला रही रेस्टोरेंट, पुरुषों को दे रही टक्कर
रेस्टोरेंट, होटल जैसे व्यवसाय में आमतौर पर पुरुष ही देखे जाते हैं, लेकिन बिठला गांव हाल शहर के आर्य नगर निवासी दो बहनों ने इस सोच को बदलकर रख दिया है।
झज्जर जैसे ग्रामीण आंचल कहे जाने वाले शहर में जहां फूड इंडस्ट्री अभी ज्यादा नहीं है, वहीं दो बेटियों ने अपने शहर को आगे ले जाने के लिए फूड इंडस्ट्री में कदम रखा है। आर्य नगर निवासी सुभाष रोहिला व अनीता रोहिला की दोनों बेटियों सुरभि रोहिला और मीनू रोहिला ने एक साल पहले फरवरी 2025 में पुरानी तहसील रोड पर घर की मेज-कुर्सियों और दो हजार रुपये से रेस्टोरेंट शुरू किया था।
इस दौरान लोगों ने व्यंग्य भी किए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। इसी का नतीजा है कि लगभग एक साल में ही उनका रेस्टोरेंट एक अलग पहचान बना चुका है। रेस्टोरेंट की शुरुआत थोड़ी रेसेपी बनाने से शुरू की थी, लेकिन मांग के अनुसार अब अधिकतर सामान यहां मिलता है।
सुरभि फैशन डिजाइनर का कोर्स कर रही है और मीनू शोधार्थी और एजुकेटर हैं। उन्होंने बताया कि जब भी कोई आयोजन होता तो खाने के लिए बाहर जाना पड़ता था।
फिर उन्हें लगा कि ऐसा स्थान शहर के लोगों को दिया जाए, जहां फैमिली आए और अपना बेहतर समय बिताए और खाना भी खाए। इसके लिए उन्होंने शहर के अलग-अलग दुकान, रेहड़ियों पर जाकर वहां बनने वाले सामान को भी देखा। फरवरी 2025 में घर की कुर्सी-मेज और पापा से दो हजार रुपये लेकर अपना खुद रेस्टोरेंट शुरू किया। शुरुआत में अपनी जेब से ही खर्चा निकाला, लेकिन तब कस्टमर का उनका खाना पसंद आया तो इसे आगे बढ़ाया।
उन्होंने बताया कि रेस्टोरेंट में जितना भी सामान है, वह होने वाली सेविंग से खरीदा गया है। उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता ने कभी लड़की होने पर कोई बंदिशें नहीं लगाई बल्कि हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इस रेस्टोरेंट के संचालन में उनकी मां अनीता भी पूरा सहयोग करती हैं।
6 माह तक खुद बनाई हर रेसेपी, फिर रखे कारीगर
सुरभि व मीनू ने बताया कि शुरुआत के 6 माह में हर रेसेपी खुद तैयार की। जब कस्टमर बढे़ तो कारीगर रखे गए। यह अब परिवार के सभी सदस्य एक साथ आते हैं। जो राशि रेस्टोरेंट से आती है, वह इसी पर लगाई जाती है।
फ्रेंचाइजी के मिल रहे ऑफर
सुरभि व मीनू ने बताया कि उनका छोटा से रेस्टोरेंट की रेसेपी सभी को पसंद आ रही है। यही वजह है कि उनको फ्रेंचाइजी खोलने के ऑफर मिले हैं, जिस पर योजना बनाई जा रही है। वह चाहते हैं कि काम बढे़, लेकिन उसे धीरे-धीरे आगे लेकर जाएंगे।
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