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जींद: मनरेगा मजदूर यूनियन सदस्यों की बस अड्डे पर हुई महापंचायत
मनरेगा मजदूर यूनियन की जिला इकाई के आह्वान पर बुधवार को जिले के मनरेगा मजदूरों ने पुराना बस अड्डा पर महापंचायत का आयोजन किया। इसकी अध्यक्षता मजदूर प्रांतीय उपप्रधान काॅ. सत्यवीर सिंह ने की।
महासचिव कॉ. सोमनाथ, पूर्व राज्य प्रधान कामरेड पाल सिंह ने कहा कि यह नया कानून ग्रामीण मजदूरों के रोजगार गारंटी के वैधानिक अधिकार का खुला खात्मा है। मनरेगा में काम मांगने पर रोजगार देना या बेरोजगारी भत्ता देना सरकार की कानूनी जिम्मेदारी थी, जिसे वीबी एंड जीरामजी कानून के जरिए समाप्त कर दिया गया है। मांग-आधारित व्यवस्था को खत्म कर बजट-सीमित व्यवस्था थोपना मजदूरों के साथ घोर विश्वासघात है। निर्माण कार्य मजदूर मिस्त्री यूनियन के उपप्रधान रघुवीर विरोधिया, सूरजभान चहल, अधिवक्ता बलवान सिंह ने कहा कि
मोदी सरकार द्वारा इस कानून के तहत केंद्र का मनमाना नियंत्रण स्थापित किया गया है। पूर्व-स्वीकृत योजनाओं, मानक आवंटनों और ग्राम पंचायतों को मनमर्जी से श्रेणियों में बांटकर रोजगार देने का प्रावधान दर्शाता है कि 125 दिन रोजगार देने का दावा केवल जुमला है। वास्तव में सरकार सभी मजदूरों को सौ दिन का रोजगार देने में विफल रही है और अब अपनी नाकामी छिपाने के लिए यह कानून लेकर आई है, ताकि शहरों के आसपास के पूंजीपतियों और गांव के धनी किसानों को सस्ते मजदूर उपलब्ध कराए जा सकें। उन्होंने कहा कि कृषि में मशीनीकरण और घटते रोजगार के कारण ही मनरेगा कानून लाया गया था, जबकि जीरामजी इस मूल भावना के ठीक उलट जाकर मजदूरों को धनी किसानों और पूंजीपतियों के सामने कम मजदूरी पर काम करने को मजबूर करेगा। उन्होंने कहा कि यह कानून राज्यों, पंचायतों और ग्राम सभाओं की भूमिका को कमजोर कर शक्ति का केंद्रीयकरण केंद्र सरकार के हाथों में करता है, जो संविधान की संघीय भावना के विरुद्ध है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांग नहीं मानीं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस अवसर पर हवासिंह, सरोज ढाकल, कृष्ण सरोहा, सरोज दबलैन, राजेश, शमशेर बडनपुर, जन संघर्ष मंच हरियाणा से सुधीर शास्त्री मौजूद रहे।
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