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नारनौल में महिला आईटीआई में सिलाई कढ़ाई सीख भविष्य संवारने में जुटी 36 लड़कियां
एक समय था जब आईटीआई में प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए गिनी चुनी ही लड़कियां दाखिला लेती थीं। लेकिन अब लड़कियों में ही नहीं बल्कि महिलाओं में भी आईटीआई के प्रति खासा रुझान देखने को मिल रहा है। पुरानी कचहरी के पास स्थित महिला आईटीआई में फिलहाल 36 छात्राएं सिलाई कढ़ाई का प्रशिक्षण प्राप्त कर अपना भविष्य संवारने में जुटी हुई हैं। सिलाई व कढ़ाई का ये कोर्स एक साल का होता है और इसमें प्रशिक्षण ले रही अधिकांश छात्राओं का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पास होकर आईटीआई में बतौर अनुदेशक के पद पर नौकरी करना है।
4-4 हजार रुपये की मिलती है किट:
सिलाई कढ़ाई विभाग की अनुदेशक सुरेश कुमारी ने बताया कि परीक्षा के दौरान प्रथम व द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाली छात्राओं को मुख्यालय की ओर से 4-4 हजार रुपये की एक किट बतौर पुरस्कार स्वरूप भेंट की जाती है। इस किट में एक सिलाई मशीन, कैंची, इंची टेप, प्रेस व बैग आदि शामिल होता है, ताकि छात्रा पास होने के बाद भी घर पर सिलाई कढ़ाई का कार्य जारी रखते हुए स्वरोजगार को अपना कर स्वावलंबी बन सके।
36 में से 3 हैं विवाहित:
इन 36 छात्राओं में से तीन छात्राएं कविता, बबली व रीना विवाहित हैं और इनमें से कविता के दो बच्चे भी हैं। साथ ही एक छात्रा रीना की तो हाल ही में कोर्स के दौरान ही शादी हुई है। इसके अलावा एक छात्रा बबली ऐसी है जो स्वयं तो आईटीआई कर ही रही है, जबकि उसका पति भी महेंद्रगढ़ रोड स्थित आईटीआई में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा है।
शादी हो गई है और दो बच्चे भी हैं। सास ससुर व पति के कहने पर आईटीआई में दाखिला लिया है, ताकि प्रतियोगी परीक्षा पास कर आईटीआई में अनुदेशक के तौर पर नौकरी हासिल कर अपने पैरों पर खड़ी हो सकूं।-कविता, छात्रा
प्रतियोगी परीक्षा में पास होकर सरकारी नौकरी करना ही पहली प्राथमिकता है, अगर सफल नहीं हो सकी तो अपना सिलाई सेंटर खोल कर आत्मनिर्भर तो बनूंगी ही, साथ ही गरीब लड़कियों को सिलाई का हुनर सिखा कर कामयाब करूंगी।-बबली, छात्रा
अभी हाल ही शादी हुई है और पति एमबीए कर रहे हैं। कोर्स पूरा करने के बाद उनका सपना है कि खुद का बुटीक शुरू कर आत्मनिर्भर बनूं।- रीना, छात्रा
छात्राओं को संस्थान में बेहतर वातावरण के साथ प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही ये भी ध्यान रखा जा रहा है कि उन्हें प्रशिक्षण के दौरान किसी प्रकार की दिक्कत का सामना न करना पड़े।
विनोद खनगवाल, प्राचार्य, अतिरिक्त प्रभार, महिला आईटीआई नारनौल।
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